{"_id":"5f58d4496df4732adf393506","slug":"amar-ujala-hindi-hai-hum-campaign-idioms-and-proverbs-of-braj-and-rajasthan-can-be-understood-in-hindi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"#हिंदीहैंहम: हिंदी में समझ सकेंगे ब्रज और राजस्थान के मुहावरों व लोकोक्तियां, संस्थान करा रहा कोश तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
#हिंदीहैंहम: हिंदी में समझ सकेंगे ब्रज और राजस्थान के मुहावरों व लोकोक्तियां, संस्थान करा रहा कोश तैयार
Thu, 10 Sep 2020 05:39 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 10 Sep 2020 05:39 AM IST
सार
हिंदी संस्थान की निदेशिका प्रो. बीना शर्मा ने बताया कि दोनों भाषाओं की तमाम ऐसी कहावतें और लोकोक्तियां हैं, जिनमें जीवन से जुड़ी गूढ़ बातें छिपी हैं। इसमें माटी की खुशबू है। जो लोग ब्रज भाषा और राजस्थानी को नहीं समझते या कम समझते हैं, वे कोश के माध्यम से इन भाषाओं के मुहावरों और कहावतों को समझ सकेंगे।
विज्ञापन
हिंदी हैं हम
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय हिंदी संस्थान ने ब्रज और राजस्थानी भाषाओं की लोकोक्तियों और मुहावरों को संरक्षित करने के लिए इनका कोश तैयार कर रहा है। इसके जरिए इन्हें हिंदी में सहजता और सरलता से समझा जा सकेगा। ये बड़े ही रोचक मुहावरे और लोकोक्तियां हैं। संस्थान का यह प्रयास हिंदी के प्रचार प्रसार के साथ ही कम क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषाओं और उनके लोक साहित्य को संरक्षित करने के लिए भी है।
हिंदी संस्थान की निदेशिका प्रो. बीना शर्मा ने बताया कि दोनों भाषाओं की तमाम ऐसी कहावतें और लोकोक्तियां हैं, जिनमें जीवन से जुड़ी गूढ़ बातें छिपी हैं। इसमें माटी की खुशबू है। जो लोग ब्रज भाषा और राजस्थानी को नहीं समझते या कम समझते हैं, वे कोश के माध्यम से इन भाषाओं के मुहावरों और कहावतों को समझ सकेंगे।
39 अध्येता कोश तैयार करा चुका संस्थान
पहले की अपेक्षा कहावतों और लोकोक्तियों का प्रयोग भी बातचीत में कम होता जा रहा है, ऐसे में इनको संरक्षित करने का भी प्रयास है। केंद्रीय हिंदी संस्थान छोटी-छोटी भाषाओं को हिंदी से जोड़ने और उनको बचाने के उद्देश्य से अब तक 39 अध्येता कोश तैयार करा चुका है। 11 छपने की प्रक्रिया में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
हिंदी संस्थान की निदेशिका प्रो. बीना शर्मा ने बताया कि दोनों भाषाओं की तमाम ऐसी कहावतें और लोकोक्तियां हैं, जिनमें जीवन से जुड़ी गूढ़ बातें छिपी हैं। इसमें माटी की खुशबू है। जो लोग ब्रज भाषा और राजस्थानी को नहीं समझते या कम समझते हैं, वे कोश के माध्यम से इन भाषाओं के मुहावरों और कहावतों को समझ सकेंगे।
विज्ञापन
39 अध्येता कोश तैयार करा चुका संस्थान
पहले की अपेक्षा कहावतों और लोकोक्तियों का प्रयोग भी बातचीत में कम होता जा रहा है, ऐसे में इनको संरक्षित करने का भी प्रयास है। केंद्रीय हिंदी संस्थान छोटी-छोटी भाषाओं को हिंदी से जोड़ने और उनको बचाने के उद्देश्य से अब तक 39 अध्येता कोश तैयार करा चुका है। 11 छपने की प्रक्रिया में हैं।
विज्ञापन
प्रत्येक कोश में 2000 मुहावरों व लोकोक्तियों रखा जाएगा
राजस्थानी और ब्रज भाषा के कोश में 2000-2000 कहावतों व लोकोक्तियों को रखा जाएगा। इनको जुटाने का काम चल रहा है। हिंदी लोक शब्दकोश परियोजना के डॉ. दिग्विजय शर्मा ने बताया कि अभी तक ब्रज की 1500 और राजस्थानी की 1000 लोकोक्तियों और मुहावरों का संग्रह किया जा चुका है।
ब्रज की लोकोक्तियां और उनके हिंदी में अर्थ
1. लोकोक्ति : फुलैगौ सो झरैगौ, चढ़ैगौ सो गिरैगौ
हिंदी में अर्थ - जो फूल पूरा खिल जाता है, वह गिरेगा ही और जो जल्द बहुत ऊपर चढ़ेगा वह निश्चित गिरेगा ही।
उदाहरण- मैं सांची कहूँ तोते लाला, तू जादा फूलैगौ तौ झरैगौ, जादा चढ़ैगौ सो गिरैगौ।
2. लोकोक्ति: बेईमान तेरौई आसरौ
अर्थ - बेईमानी किए बिना जीवन जीना मुश्किल हो जाना
उदाहरण: यां तौ भइया रे, सिगरे झूठ पै ई टिके एं। सिग कहें बेईमान तेरौई आसरौ।
राजस्थानी और ब्रज भाषा के कोश में 2000-2000 कहावतों व लोकोक्तियों को रखा जाएगा। इनको जुटाने का काम चल रहा है। हिंदी लोक शब्दकोश परियोजना के डॉ. दिग्विजय शर्मा ने बताया कि अभी तक ब्रज की 1500 और राजस्थानी की 1000 लोकोक्तियों और मुहावरों का संग्रह किया जा चुका है।
ब्रज की लोकोक्तियां और उनके हिंदी में अर्थ
1. लोकोक्ति : फुलैगौ सो झरैगौ, चढ़ैगौ सो गिरैगौ
हिंदी में अर्थ - जो फूल पूरा खिल जाता है, वह गिरेगा ही और जो जल्द बहुत ऊपर चढ़ेगा वह निश्चित गिरेगा ही।
उदाहरण- मैं सांची कहूँ तोते लाला, तू जादा फूलैगौ तौ झरैगौ, जादा चढ़ैगौ सो गिरैगौ।
2. लोकोक्ति: बेईमान तेरौई आसरौ
अर्थ - बेईमानी किए बिना जीवन जीना मुश्किल हो जाना
उदाहरण: यां तौ भइया रे, सिगरे झूठ पै ई टिके एं। सिग कहें बेईमान तेरौई आसरौ।
राजस्थानी लोकोक्ति
1.लोकोक्ति: अणघड़ भाटौ पकढ़णौ
अर्थ - किसी बात पर अड़ियल रुख अपनाना
उदाहरण: सांची बात पुछनौ मिनख अणघड माटो पकरणौ आच्छु कोनी लागै
2.लोकोक्ति: पगड़ी राख घी खाणुओ
अर्थ - प्रतिष्ठा बनाए रखकर व्यय भार उठाना
उदाहरण: गांव रा लोग जीवन भर पागणि राख घी खावै।
1.लोकोक्ति: अणघड़ भाटौ पकढ़णौ
अर्थ - किसी बात पर अड़ियल रुख अपनाना
उदाहरण: सांची बात पुछनौ मिनख अणघड माटो पकरणौ आच्छु कोनी लागै
2.लोकोक्ति: पगड़ी राख घी खाणुओ
अर्थ - प्रतिष्ठा बनाए रखकर व्यय भार उठाना
उदाहरण: गांव रा लोग जीवन भर पागणि राख घी खावै।