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अमर उजाला शिक्षा अभियान: कोरोना काल में प्रायोगिक ज्ञान से दूर रहे विद्यार्थी, अब मिली राहत

Mon, 28 Mar 2022 12:56 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 28 Mar 2022 12:56 PM IST
सार

ऑनलाइन शिक्षा में विज्ञान वर्ग के छात्र-छात्राओं के सामने बड़ी समस्या रही। किताबी ज्ञान तो मिल रहा था, लेकिन प्रायोगिक ज्ञान से दूरी बन गई। स्कूल खुलने पर ऐसे छात्र-छात्राएं राहत महसूस कर रहे हैं।  

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Amar Ujala Education Campaign Students learning by experimenting strengthening foundation of education after Corona pandemic
महात्मा गांधी मांटेसरी सीनियर सेकेंड्री स्कूल में पढ़ाई करते विद्यार्थी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना काल में लंबे समय तक स्कूल बंद रहे तो मजबूरी में बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ी। घरों में शिक्षा का माहौल नहीं बन पा रहा था। बस किसी तरह कोर्स पूरा किया जा रहा था। इस दौरान सबसे अधिक दिक्कत विज्ञान वर्ग के छात्र-छात्राओं को हुई। कारण कि वे प्रायोगिक ज्ञान नहीं ले पा रहे थे। स्कूल खुलने पर ऐसे छात्र-छात्राएं राहत महसूस कर रहे हैं और प्रयोगशाला में प्रयोग करके शिक्षा की नींव मजबूत कर रहे हैं।

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महात्मा गांधी मांटेसरी सीनियर सेकेंड्री स्कूल ढोलपुरा के प्रधानाचार्य दिनेश प्रेमी ने बताया कि स्कूल बंद थे तो ऑनलाइन शिक्षा कराना एकमात्र विकल्प था। इसमें विद्यार्थी ज्यादा कुछ नहीं सीख पाए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कतें भी आईं और ध्यान भी केंद्रित नहीं हो पाया। शिक्षा की नींव को मजबूत करने के लिए जो ऑनलाइन कोर्स करा दिया था, उसे प्रयोगशाला में विद्यार्थियों से प्रयोग कराकर बताया जा रहा है। इससे जो उन्होंने ऑनलाइन पढ़ा वह अच्छे से समझ में आ रहा है। स्कूल बंद होने के बाद आए लर्निंग गैप को देखते हुए विद्यार्थियों को पढ़ाने में मुश्किलें आ रहीं थी। मगर प्रयोग आधारित पढ़ाई सफल साबित हो रही है। केमिस्ट्री, फिजिक्स सहित अन्य विषयों के प्रयोग कराए जा रहे हैं। 

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ये कहना है विद्यार्थियों का 

- ऑनलाइन क्लास से किताबों से पढ़ने की आदत बिल्कुल छूट गई थी। मोबाइल से पढ़ाई करने में ध्यान फोकस नहीं हो पाता था। ऐसे में पढ़ाई का नुकसान काफी हुआ। मगर अब ऑफलाइन क्लास शुरू हो गई हैं तो हम राहत महसूस कर रहे हैं।

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- नेहा शर्मा, 12 वीं छात्रा 

- ऑनलाइन पढ़ाई में कभी नेटवर्क की कमीं तो कभी मोबाइल का डिस्चार्ज होना। तमाम समस्याएं थी। आंखों में भी दर्द होने लगता है। अब कक्षा में बैठकर पढ़ाई का जो माहौल मिलता है, वो कहीं और नहीं।
-अपूर्णा शर्मा, 12 वीं छात्रा

- विज्ञान वर्ग की पढ़ाई प्रयोग आधारित होती है। हमने रसायन विज्ञान के कई प्रयोग पढ़ लिए, मगर उपकरणों से अंजान थे। ऐसे में समझना मुश्किल होता था। अब स्कूल खुल गए तो प्रयोगशाला में प्रयोग करके समझाया जा रहा है।
- वंश मिश्रा, 12 वीं छात्र

- ऑनलाइन क्लास में सिर्फ किताबी पढ़ाई होती है। इस दौरान उतना ही समझाया जाता था। क्लास में पढ़ाते समय मैडम उदाहरण देकर भी समझाती हैं, जो आसानी से आ जाता है। 

- रिया कुमारी, 12 वीं छात्रा

दोबारा कराना पड़ रहा रिवीजन 

ऑनलाइन हमने पढ़ाया, मगर बच्चों के समझ में ज्यादा नहीं आया। इसका कारण है कि हमें रिवीजन प्रयोग कराकर कराना पड़ रहा है। बड़े विद्यार्थियों में कम मेहनत करनी पड़ रही है, छोटी क्लासों के विद्यार्थियों में शिक्षा का स्तर काफी कम हो गया है। हम बच्चों की काउंसलिंग कर उनको पढ़ा रहे हैं। कक्षा 11 और 12वीं क्लास के विद्यार्थियों को प्रयोगशाला में प्रयोग कराए जा रहे हैं। 
- कल्पना राठौर, शिक्षिका, एमजीएम स्कूल, ढ़ोलपुरा

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