आगरा में डेल्टा वैरिएंट का खतरा:अलर्ट जारी, दूसरे राज्यों से आए लोगों की जीनोम सीक्वेंसिंग
रेलवे स्टेशन, बस अड्डों पर यात्रियों की आरटीपीसीआर जांच होगी। दूसरे राज्यों से आए लोगों की जीनोम सीक्वेंसिंग भी कराई जाएगी। इनकी 14 दिन तक निगरानी रखी जाएगी।
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कोरोना वायरस के डेल्टा और डेल्टा प्लस स्वरूप के मरीज मिलने के बाद ताजनगरी में अलर्ट जारी कर दिया है। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों पर यात्रियों की आरटीपीसीआर जांच होगी। दूसरे राज्यों से आए लोगों की जीनोम सीक्वेंसिंग भी कराई जाएगी। इनकी 14 दिन तक निगरानी रखी जाएगी।
सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि डेल्टा स्वरूप बेहद खतरनाक है। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के उज्जैन में डेल्टा प्लस से एक-एक मौत हो चुकी है। इसके अलावा डेल्टा स्वरूप के दिल्ली, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिसा, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना में मरीज मिल चुके हैं। ऐसे में यहां की यात्रा करने वाले लोगों की आरटीपीसीआर जांच कराने के साथ जीनोम सीक्वेंसिंग भी कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि इन यात्रियों की 14 दिन तक निगरानी की जाएगी। इनके संपर्क में आए लोगों की सूची बनाकर जांच करेंगे। अगर किसी को लक्षण प्रतीत होते हैं तो तत्काल उनको इलाज दिया जाएगा। इसके अलावा बस अड्डे, रेलवे स्टेशन पर नियमित रूप से यात्रियों के नमूने लेकर वायरस की जांच कराई जा रही है। हर सप्ताह जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए नमूने भेजे जाएंगे।
आगरा में वायरस का दक्षिण अफ्रीकी और अज्ञात स्वरूप मिला
आगरा में कोरोना वायरस के दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन और अज्ञात स्ट्रेन के मरीज मिल चुके हैं। इनकी जांच जीनोम सीक्वेंसिंग कराने के बाद पता चली थी। इसी साल कमला नगर की 26 साल की युवती दक्षिण अफ्रीका की यात्रा करके लौटी थी, उसमें दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन की पुष्टि हुई थी। ट्रांस यमुना कॉलोनी के 38 साल के युवक में अज्ञात स्ट्रेन मिल चुका है।
तेजी से संक्रमण करने की क्षमता: डॉ. आरती अग्रवाल
एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि डेल्टा स्वरूप अभी तक के स्वरूपों से ज्यादा खतरनाक है। यह तेजी से संक्रमण फैलाता है। लोग टीकाकरण करवाएं और मास्क बिना घर से बाहर नहीं निकलें तो संक्रमण से बचाव होगा।
ये होते हैं लक्षण
वायरस के डेल्टा स्वरूप के लक्षण भी लगभग पहले स्वरूप के समान ही हैं। इसमें सूखी खांसी होती है, बुखार आने के साथ कमजोरी और थकान महसूस होने लगती है। हालत बिगड़ने पर सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी और सांस फूलने लगती है। बातचीत करने में भी मरीज को परेशानी होने लगती है।
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