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शराब के ठेके बंद: पांच मौतों के बाद पसरा मातम, पुलिस और पीएसी का पहरा; मुआवजे की उठी मांग
Mon, 27 Oct 2025 09:10 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 27 Oct 2025 09:10 AM IST
सार
आगरा के नगला बूढ़ी में तेज रफ्तार कार हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद से यहां के शराब ठेके को लेकर लोगों में आक्रोश है।
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शराब के ठेके बंद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के नगला बूढ़ी में तेज रफ्तार कार ने पांच लोगों की जान ले ली। घटना के बाद से इलाके में पुलिस की लापरवाही के खिलाफ गुस्सा है। रविवार को इलाके में दुकानें तो खुल गईं मगर भीड़ नजर नहीं आई। लोग घटना के बारे में ही चर्चा करते नजर आए। शराब के ठेके बंद रहे। तनाव को देखते हुए पुलिस के साथ पीएसी भी तैनात है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकों पर सुबह से शाम तक शराबियों का जमावड़ा परेशान करता है। पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। शिकायत पर खानापूर्ति होती है। नगला बूढ़ी के लोगों का कहना है कि केंद्रीय हिंदी संस्थान से दयालबाग की तरफ जाने वाले रास्ते पर शराब के कई ठेके खुले हुए हैं। नियम है कि शराब खरीदने के बाद दुकान के बाहर ही न पी जाए। पिछले दिनों पुलिस आयुक्त के आदेश पर जगह-जगह अभियान भी चलाया गया था। कार्रवाई भी की गई थी। मगर उसका असर देखने को नहीं मिला है।
ये भी पढ़ें - अय्याश प्रोफेसर: पीएचडी की छात्रा का किया यौन शोषण, इसलिए चुप रही वो...फिर जो किया टूट गया सब्र
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स्थानीय लोगों का कहना है कि नगला बूढ़ी इलाके के ठेकों पर सुबह से लोगों की कतार लग जाती है। शराब पीने वाले सड़क पर ही जाम लड़ाते हैं। इसके बाद गाली-गलौज करते हैं। कई बार झगड़ते भी हैं। तेज गति में गाड़ी चलाने से हर पल टक्कर लगने का खतरा बना रहता है। शिकायत पर पहले तो पुलिस आती नहीं, यदि आ भी जाए तो लेन-देन कर चली जाती है।
घटना के बाद महिलाओं ने शराब के ठेकों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया था। इसके बाद से ठेके नहीं खुले हैं। लोगों का मानना है कि गुस्सा शांत होते ही फिर से ठेकों को खोल दिया जाएगा। उनकी मांग है कि इन ठेकों को निरस्त किया जाना चाहिए। आबादी क्षेत्र से दूर इनको खोलना चाहिए।
परिवारों को मुआवजा दे सरकार
क्षेत्रीय निवासी प्रमोद, शिवा, रामवीर, नरेंद्र, हरेश व अन्य लोगों का कहना है कि हादसे में मरने वाले सभी मजदूर वर्ग के लोग हैं। कमाने वाले की मृत्यु होने से आर्थिक संकट आ गया है।सरकार की तरफ से मदद मिलनी चाहिए। जिला प्रशासन के अलावा मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री राहत से मदद की जाए।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकों पर सुबह से शाम तक शराबियों का जमावड़ा परेशान करता है। पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। शिकायत पर खानापूर्ति होती है। नगला बूढ़ी के लोगों का कहना है कि केंद्रीय हिंदी संस्थान से दयालबाग की तरफ जाने वाले रास्ते पर शराब के कई ठेके खुले हुए हैं। नियम है कि शराब खरीदने के बाद दुकान के बाहर ही न पी जाए। पिछले दिनों पुलिस आयुक्त के आदेश पर जगह-जगह अभियान भी चलाया गया था। कार्रवाई भी की गई थी। मगर उसका असर देखने को नहीं मिला है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि नगला बूढ़ी इलाके के ठेकों पर सुबह से लोगों की कतार लग जाती है। शराब पीने वाले सड़क पर ही जाम लड़ाते हैं। इसके बाद गाली-गलौज करते हैं। कई बार झगड़ते भी हैं। तेज गति में गाड़ी चलाने से हर पल टक्कर लगने का खतरा बना रहता है। शिकायत पर पहले तो पुलिस आती नहीं, यदि आ भी जाए तो लेन-देन कर चली जाती है।
घटना के बाद महिलाओं ने शराब के ठेकों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया था। इसके बाद से ठेके नहीं खुले हैं। लोगों का मानना है कि गुस्सा शांत होते ही फिर से ठेकों को खोल दिया जाएगा। उनकी मांग है कि इन ठेकों को निरस्त किया जाना चाहिए। आबादी क्षेत्र से दूर इनको खोलना चाहिए।
परिवारों को मुआवजा दे सरकार
क्षेत्रीय निवासी प्रमोद, शिवा, रामवीर, नरेंद्र, हरेश व अन्य लोगों का कहना है कि हादसे में मरने वाले सभी मजदूर वर्ग के लोग हैं। कमाने वाले की मृत्यु होने से आर्थिक संकट आ गया है।सरकार की तरफ से मदद मिलनी चाहिए। जिला प्रशासन के अलावा मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री राहत से मदद की जाए।