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आगरा की तीन आवाज मेट्रो, एयरपोर्ट और बैराज 

Sun, 26 Mar 2017 12:12 AM IST
आगरा की तीन आवाज मेट्रो, एयरपोर्ट और बैराज 
आगरा की तीन आवाज मेट्रो, एयरपोर्ट और बैराज  Updated Sun, 26 Mar 2017 12:12 AM IST
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एयरपोर्ट - फोटो : अमर उजाला

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शहर की प्यास बुझाने और पर्यटन को पंख लगाने के लिए आगरा पिछले कई सालों से तीन आवाज उठा रहा है। यमुना नदी पर बैराज, ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट और मेट्रो ट्रेन, इन तीनों प्रस्तावों पर केंद्र और प्रदेश सरकार ने मिलकर काम भी किया। चीजें शुरू भी हुईं। लेकिन सरकारों के साथ इन प्रस्तावों की प्राथमिकता भी बदलती रहीं। इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण शुरू हुआ तो मेट्रो ट्रेन की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी दी जा चुकी है। बैराज का तो शिलान्यास भी हो चुका था। इसके बावजूद यह तीनों प्रोजेक्ट अधर में लटके हैं।

इंटरनेशनल एयरपोर्ट का रुका काम
शहर में पर्यटन को बढ़ाने के लिए ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए केंद्र और प्रदेश दोनों सरकारों ने जोरशोर से पहल शुरू की। केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा और तत्कालीन प्रदेश के मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने अलग-अलग इसकी घोषणा भी की थी। पहले सिविल एन्क्लेव और फिर बाद में इसी को विस्तार रूप देकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने पर सहमति भी बन गई। काम भी शुरू कर दिया गया। खेरिया हवाई अड्डे के पास ही धनौली के आसपास जमीन का अधिग्रहण शुरू कर दिया गया। लेकिन यह सिर्फ दिखावी कवायद ही साबित हुई। क्योंकि प्रस्तावित 55 एकड़ जमीन के सापेक्ष सिर्फ 15 हेक्टेयर जमीन का ही अधिग्रहण हो पाया है। बजट के अभाव में अधिग्रहण रोकना पड़ा। पिछले पांच महीने से प्रशासन की ओर से 64 करोड़ रुपये की डिमांड की जा रही है लेकिन इसे अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। इसकी वजह से काम रुका हुआ है।
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डीपीआर मंजूरी के बाद अटकी मेट्रो
ताजनगरी में पर्यटन के बढ़ावे और ट्रैफिक से छुटकारे के लिए 2015 में आगरा में मेट्रो ट्रेन के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई थी। इसके लिए आगरा विकास प्राधिकरण को डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी दी गई। इसके लिए लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन (एलएमआरसी) और रेल इंडिया टेक्निकल एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज (राइट्स) को लगाया गया। इन एजेंसियों ने शहर के ट्रैफिक और आबादी का अध्ययन करने के बाद प्रस्ताव तैयार किया। एडीए ने पिछले साल इसे शासन को सौंप दिया, जिसे मंजूरी भी मिल गई। मगर, इसके बाद कोई कवायद नहीं हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल के बाद एक बार फिर से इसकी उम्मीद जागी है।
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शिलान्यास के बाद भी गफलत में फंसा बैराज
शहर की जलापूर्ति पूरी तरह से यमुना पर निर्भर है। मगर, अब यमुना की ऐसी स्थिति नहीं रही कि वह शहर की प्यास बुझा सके। इसके लिए यमुना पर बैराज बनाने का कई बार प्रस्ताव तैयार हो चुका है लेकिन मूर्त रूप एक बार भी नहीं ले पाया। अस्सी के दशक में तो मनोहरपुर में बैराज का शिलान्यास तक हो गया था लेकिन समय के साथ यह प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया। बाद में ताजमहल के पास बैराज का प्रस्ताव तैयार किया गया। इस पर भी कोई कवायद नहीं हो सकी है। जबकि केंद्र सरकार गंगा के साथ-साथ यमुना को भी स्वच्छ और निर्मल बनाने पर जोर दे रही है। केंद्रीय जहाजरानी, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने तो यमुना में आगरा तक पानी के जहाज तक चलाने का एलान कर दिया था। मगर, जहाज चलाना तो दूर अब तक बैराज को भी हरी झंडी नहीं मिल पाई है। 


सपा सरकार ने भी बैराज के लिए ठोकी थी ताल
12 फरवरी 2015 को तत्कालीन प्रदेश के सिंचाई एवं लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने आगरा में एत्मादपुर के समोगर गांव में यमुना पर ताज बैराज बनाने का एलान किया था। उन्होंने कहा था कि यमुना नदी दिल्ली में मैली हो रही है। 

मेट्रो
2 कारीडोर तैयार किए गए हैं। पहला सिकंदरा से ताज ईस्ट गेट और दूसरा आगरा कैंट से कालिंदी विहार।
14 किमी लंबा होगा पहला कॉरीडोर
16 किमी होगी दूसरी कारीडोर की लंबाई
15-15 स्टेशन होंगे दोनों कारीडोर पर
14 हजार करोड़ की है यह योजना

एयरपोर्ट
55 एकड़ जमीन पर आगरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट विकसित करने का प्रस्ताव है 
15 हेक्टेयर जमीन का ही अब तक हो पाया है अधिग्रहण
64 करोड़ रुपये की शासन को जमीन अधिग्रहण के लिए भेजी गई हैं डिमांड
2000 हजार विदेशी पर्यटक प्रतिदिन आगरा आते हैं ताजमहल देखने
15 हजार भारतीय पर्यटक प्रतिदिन विभिन्न शहरों से आते हैं शहर में

बैराज
1997 में केंद्रीय जल आयोग ने मनोहरपुर में 13408 लाख रुपये की लागत से आगरा बैराज प्रस्ताव को स्वीकृति दी।
2013 में ताजमहल से 1.5 किमी की दूरी पर ताज बैराज की रूपरेखा तैयार की गई।
146 मीटर प्रस्तावित की गई थी समोगर के पास प्रस्तावित इस बैराज की क्षमता। 
1000 क्यूसिक पानी (वर्तमान में) गोकुल बैराज से आगरा के लिए छोड़ा जाता है।
 50 लाख रुपये ताज बैराज निर्माण के सर्वे के लिए सरकार की ओर से जारी किए गए थे।
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