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UP: आगरा विवि के असिस्टेंट प्रोफेसर की छात्रा पर डोली नीयत, हाथ पकड़कर की जबरदस्ती; 21 दिन बाद भी न मिला न्याय
Sat, 15 Jun 2024 07:00 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 15 Jun 2024 07:00 AM IST
सार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि के पालीवाल पार्क परिसर में स्थित समाज विज्ञान संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर पर छात्रा ने छेड़खानी का आरोप लगाया था। इस मामले में छात्रा को 21 दिन के बाद भी न्याय नहीं मिला है।
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आगरा यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर ने छात्रा से की छेड़छाड़
- फोटो : freepik.com
विस्तार
डाॅ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में समाजिक विज्ञान संस्थान की छात्रा ने असिस्टेंट प्रोफेसर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। आरोप के 21 दिन बीतने के बाद भी विवि प्रशासन ने अब तक आरोपी शिक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। प्रकरण में विवि की विशाखा समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुकी है।
विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क स्थित समाज विज्ञान संस्थान (आईएसएस) की मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) की छात्रा ने 24 मई को असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. राजीव वर्मा पर छेड़छाड़ करने, गाली गलौज, मारपीट के साथ जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करने के आरोप लगाए थे।
इस प्रकरण की जांच यूजीसी की गाइड लाइन के तहत गठित विशाखा समिति को सौंपी गई। समिति ने 27 मई को पीड़ित छात्रा के बयान दर्ज किए। इसके बाद छात्रा के साथी छात्र-छात्राएं, आईएसएस संस्थान के शिक्षक और कर्मचारियों और सबसे अंत में आरोपित असिस्टेंट प्रोफेसर के बयान दर्ज किए गए।
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विशाखा समिति की प्रभारी प्रो. विनीता सिंह, सदस्य उपकुलसचिव ममता सिंह, अधिवक्ता नम्रता मिश्रा, संस्थान के डाॅ. रनवीर सिंह, एनजीओ सदस्य सुमन सुराना के साथ दो छात्रा प्रतिनिधियों की मौजूदगी में बयान दर्ज करने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दिया।
मगर, प्रकरण ने 21 दिन बाद भी विशाखा समिति की रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कुलसचिव डाॅ. राजीव कुमार ने बताया कि एक अन्य टीम को विशाखा समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की सिफारिश करनी है। टीम के कुलपति प्रो. आशुरानी को रिपोर्ट देते ही आग की कार्रवाई की जाएगी।
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विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क स्थित समाज विज्ञान संस्थान (आईएसएस) की मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) की छात्रा ने 24 मई को असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. राजीव वर्मा पर छेड़छाड़ करने, गाली गलौज, मारपीट के साथ जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करने के आरोप लगाए थे।
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इस प्रकरण की जांच यूजीसी की गाइड लाइन के तहत गठित विशाखा समिति को सौंपी गई। समिति ने 27 मई को पीड़ित छात्रा के बयान दर्ज किए। इसके बाद छात्रा के साथी छात्र-छात्राएं, आईएसएस संस्थान के शिक्षक और कर्मचारियों और सबसे अंत में आरोपित असिस्टेंट प्रोफेसर के बयान दर्ज किए गए।
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विशाखा समिति की प्रभारी प्रो. विनीता सिंह, सदस्य उपकुलसचिव ममता सिंह, अधिवक्ता नम्रता मिश्रा, संस्थान के डाॅ. रनवीर सिंह, एनजीओ सदस्य सुमन सुराना के साथ दो छात्रा प्रतिनिधियों की मौजूदगी में बयान दर्ज करने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दिया।
मगर, प्रकरण ने 21 दिन बाद भी विशाखा समिति की रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कुलसचिव डाॅ. राजीव कुमार ने बताया कि एक अन्य टीम को विशाखा समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की सिफारिश करनी है। टीम के कुलपति प्रो. आशुरानी को रिपोर्ट देते ही आग की कार्रवाई की जाएगी।