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हमारी धरोहर: लाहौर तक भेजी जाती थी इस मंडी की सौंठ, 1857 के गदर की भी है गवाह

Sun, 13 Dec 2020 12:04 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 13 Dec 2020 12:04 AM IST
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agra sonth ki mandi history
सौंठ की मंडी का क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला

मुगल बादशाह अकबर के दौर में आगरा की सौंठ की मंडी का बड़ा नाम था। यह जगह आज मानसिक चिकित्सा संस्थान के पास है। तब यह आगरा-मथुरा रोड कहलाती थी। बिल्लोचपुरा के पास सौंठ की मंडी लगती थी। यहां से सौंठ लाहौर तक जाती थी। 

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आगरा और लाहौर व्यापार के बड़े केंद्र थे। आगरा के आसपास अदरक की खेती होती थी, उसी से सौंठ तैयार की जाती थी। लेकिन मुगलों का दौर खत्म होते ही यह मंडी खत्म हो गई। 
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इस मंडी अब सौंठ की एक भी दुकान नहीं है। यहां पास में हलवाई की बगीची है जिसे फुलट्टी निवासी ग्यासो भक्तानी ने बनवाया था। एक अंग्रेज अफसर के मानसिक रोग हो जाने पर अंग्रेज हुकूमत के समय यहां मानसिक चिकित्सालय बनवाया गया। 

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अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ा दिए थे 20 मेवाती

सौंठ की मंडी 1857 के गदर की भी गवाह रही। क्रांतिकारियों ने आगरा कॉलेज के प्रोफेसर मेजर जैकब सहित 20 अंग्रेजों को मार डाला था। शहर में क्रांति की चिंगारी आगरा कॉलेज से ही फूटी थी। फिरंगी अफसरों में खलबली मच गई थी। 

इतिहासकार राज किशोर राजे ने बताया कि इसी दौरान सेंट पीटर्स चर्च को भी लूटा गया। वहां से लाया गया माल इसी मंडी में छिपाया गया था। धीरे-धीरे अंग्रेज सैनिकों ने स्थिति पर काबू किया। छिपाया हुआ माल बरामद होने पर 18 मेवातियों को फांसी पर चढ़ा दिया था।
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