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आगरा: हौसले के सामने वायरस भी पस्त, दो बार दी कोरोना को मात, संभाल रहे मरीजों की जिम्मेदारी
Thu, 14 Jan 2021 12:10 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 14 Jan 2021 12:10 PM IST
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कोरोना वायरस को दो बार मात देने वाले एसएन के चिकित्सक
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकीय स्टाफ में ऐसे भी कई लोग हैं जो दो बार कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। लेकिन, इन्होंने दोनों बार उसे पस्त कर दिया और अपना क्वारंटीन समय पूरा कर फिर से मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी संभाल ली। दो बार संक्रमित होने वालों में एक चिकित्सक और एक वार्ड ब्वाय भी है। एसएन कॉलेज में अभी तक दो बार संक्रमित होने के सात मामले मिले हैं। इनमें एसएन की मेडिकल छात्रा, चिकित्सक, वार्ड ब्वॉय हैं। इसके अलावा मरीज अन्य जिलों के हैं। ये विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए आए थे, जांच कराने पर इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव मिली थी।
ऐसे स्टाफ की बदौलत ही कोरोना से पार पा सके
मेडिकल कॉलेज के वार्ड ब्वाय, डॉक्टर दोबारा संक्रमित हुए और ठीक होकर फिर मरीजों के इलाज में जुटे हैं। चाहते तो वे हट सकते थे, लेकिन मानवता के लिए उन्होंने ऐसा नहीं किया, ऐसे स्टाफ की बदौलत ही कोरोना से हम पार पा सके। - डॉ. संजय काला, प्राचार्य
एंटीबॉडीज न बनने से कुछ लोगों को दोबारा संक्रमण हुआ
कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज न बनने से कुछ मरीजों में दोबारा संक्रमण हो सकता है, लेकिन पूरी तरह से सावधानी और चिकित्सकीय निगरानी मेें मरीज पूरी तरह से ठीक भी हुए। दोबारा संक्रमित होने के सात-आठ मामले सामने आए हैं। - डॉ. आरसी पांडेय, सीएमओ
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ऐसे स्टाफ की बदौलत ही कोरोना से पार पा सके
मेडिकल कॉलेज के वार्ड ब्वाय, डॉक्टर दोबारा संक्रमित हुए और ठीक होकर फिर मरीजों के इलाज में जुटे हैं। चाहते तो वे हट सकते थे, लेकिन मानवता के लिए उन्होंने ऐसा नहीं किया, ऐसे स्टाफ की बदौलत ही कोरोना से हम पार पा सके। - डॉ. संजय काला, प्राचार्य
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एंटीबॉडीज न बनने से कुछ लोगों को दोबारा संक्रमण हुआ
कोरोना वायरस की एंटीबॉडीज न बनने से कुछ मरीजों में दोबारा संक्रमण हो सकता है, लेकिन पूरी तरह से सावधानी और चिकित्सकीय निगरानी मेें मरीज पूरी तरह से ठीक भी हुए। दोबारा संक्रमित होने के सात-आठ मामले सामने आए हैं। - डॉ. आरसी पांडेय, सीएमओ
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दूसरी बार भी वही इलाज चलता है
कई लोगों में संक्रमण से पहली बार में एंटीबॉडीज नहीं बन पाती हैं, ऐसे में दोबारा वायरस के हैवी लोड से व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। ऐसे बहुत ही कम मामले होते हैं। दूसरी बार भी वही इलाज रहता है। खुद मेरे बेटे ने दो बार कोरोना को मात दी है। -डॉ. राजीव उपाध्याय, निर्वाचित अध्यक्ष आईएमए
महामारी में डॉक्टरों को है जिम्मेदारी का अहसास: डॉ. शिवम
एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉ. शिवम उपाध्याय अक्तूबर में संक्रमित हुए थे। बीते महीने दिसंबर में इनके साथी की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर दोबारा जांच कराई तो फिर से संक्रमित मिले। होम आइसोलेशन में रहे और इनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। आइसोलेशनल समय पूरा करने के बाद एसएन में फिर से सेवाएं देना शुरू कर दिया है। इनका कहना है कि कोरोना महामारी में डॉक्टरों को अपनी जिम्मेदारी का एहसास है।
लोगों के हौसले से हुआ उत्साहित: मुकेश गौतम
एसएन कॉलेज के वार्ड ब्वाय मुकेश गौतम ने बताया कि कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद ड्यूटी ज्वाइनिंग के वक्त दोबारा कोरोना की जांच की तो उसमें फिर रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस बार उन्हें मन में कुछ डर लगा, लेकिन काउंसिलिंग और लोगों के भरोसे से हिम्मत बंधी और कोरोना वायरस को मात दी। ड्यूटी ज्वाइन की और फिर से मरीजों की सेवा में जुट गए।
कई लोगों में संक्रमण से पहली बार में एंटीबॉडीज नहीं बन पाती हैं, ऐसे में दोबारा वायरस के हैवी लोड से व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। ऐसे बहुत ही कम मामले होते हैं। दूसरी बार भी वही इलाज रहता है। खुद मेरे बेटे ने दो बार कोरोना को मात दी है। -डॉ. राजीव उपाध्याय, निर्वाचित अध्यक्ष आईएमए
महामारी में डॉक्टरों को है जिम्मेदारी का अहसास: डॉ. शिवम
एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉ. शिवम उपाध्याय अक्तूबर में संक्रमित हुए थे। बीते महीने दिसंबर में इनके साथी की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर दोबारा जांच कराई तो फिर से संक्रमित मिले। होम आइसोलेशन में रहे और इनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। आइसोलेशनल समय पूरा करने के बाद एसएन में फिर से सेवाएं देना शुरू कर दिया है। इनका कहना है कि कोरोना महामारी में डॉक्टरों को अपनी जिम्मेदारी का एहसास है।
लोगों के हौसले से हुआ उत्साहित: मुकेश गौतम
एसएन कॉलेज के वार्ड ब्वाय मुकेश गौतम ने बताया कि कोरोना वायरस से ठीक होने के बाद ड्यूटी ज्वाइनिंग के वक्त दोबारा कोरोना की जांच की तो उसमें फिर रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस बार उन्हें मन में कुछ डर लगा, लेकिन काउंसिलिंग और लोगों के भरोसे से हिम्मत बंधी और कोरोना वायरस को मात दी। ड्यूटी ज्वाइन की और फिर से मरीजों की सेवा में जुट गए।