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एक शहजादी की ख्वाहिश पर बनाई गई थी आगरा की यह मंडी, पुरुषों को नहीं थी प्रवेश की अनुमति
Fri, 18 Dec 2020 12:31 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 18 Dec 2020 12:31 AM IST
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शहजादी मंडी आगरा
- फोटो : अमर उजाला
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जहां ताजनगरी की ज्यादातर मंडियां मुगल बादशाह अकबर के दौर में बनाई गई थीं, वहीं एक मंडी उनके पौत्र शाहजहां ने बनवाई थी। इसका नाम है शहजादी मंडी। यहां सिर्फ मुगल शहजादियां खरीदारी करती थीं। यह मंडी बनाई भी एक शहजादी की ख्वाहिश पर गई थी, जिसका नाम था जहांआरा। वह शाहजहां की चहेती बेटी थी। उसने शाहजहां से कहा था कि मीना बाजार के अलावा भी एक ऐसा बाजार होना चाहिए जो सिर्फ मुगल शहजादियों के लिए हो।
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इतिहासकार राज किशोर राजे ने बताया कि शहजादी मंडी में शाही परिवार के पुरुषों को भी प्रवेश की अनुमति नहीं थी। न ही आम महिलाएं वहां जा सकती थीं। यह सिर्फ शहजादियों के लिए थी। यह मंडी कुछ मीना बाजार की तरह थी।
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मीना बाजार शाही परिवार की महिलाओं के खरीदारी करने के लिए होते थे। वहां दुकानदार भी महिलाएं होती थीं जबकि शहजादी मंडी में दुकानदार पुरुष होते थे। शाहजहां के इंतकाल के बाद ही शहजादी मंडी की रौनक फीकी हो गई। इसके बाद तो मुगलकाल में ही यह सिर्फ नाम की शहजादी मंडी रह गई, अन्य लोग भी खरीदारी के लिए आने लगे।
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अब होता है कपड़ों का कारोबार
शहजादी मंडी में करीब 45 वर्षों से कपड़े का काम कर रहे गोपाल प्रसाद सिंघल ने बताया कि आजादी से पहले ही यहां कपड़े का व्यापार शुरू हो गया था। अब यहां कपड़ों की 100 दुकानें हैं। इससे भी ज्यादा यह बाजार मुख्य रूप से दर्जी के काम के लिए जाना जाता है। शहर में एक ही जगह इतने दर्जी कहीं और नहीं है जितने यहां हैं। इनकी 100 से ज्यादा दुकानें हैं।
शहजादी मंडी में करीब 45 वर्षों से कपड़े का काम कर रहे गोपाल प्रसाद सिंघल ने बताया कि आजादी से पहले ही यहां कपड़े का व्यापार शुरू हो गया था। अब यहां कपड़ों की 100 दुकानें हैं। इससे भी ज्यादा यह बाजार मुख्य रूप से दर्जी के काम के लिए जाना जाता है। शहर में एक ही जगह इतने दर्जी कहीं और नहीं है जितने यहां हैं। इनकी 100 से ज्यादा दुकानें हैं।