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पुलिस का फर्जी गुडवर्क: दिन की घटना, रात में गिरफ्तारी,अपने ही झूठ में फंसी पुलिस, कोर्ट में सामने आई सच्चाई
Sat, 11 Feb 2023 02:28 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 11 Feb 2023 02:28 PM IST
सार
पुलिस ने एक बदमाश को पकड़कर मुठभेड़ दिखाई थी, लेकिन पुलिस ने जो कहानी तैयार की, वो पूरी तरह फर्जी थी। इसका खुलासा अदालत में हो गया।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
आगरा के अपर जिला जज- दिनेश तिवारी ने पुलिस पर जानलेवा हमला एवं आयुध अधिनियम के आरोपी दयाल नगर निवासी अजय शर्मा को साक्ष्य के अभाव में बरी करने के आदेश दिए। इस केस में गवाह के बयान अहम रहे। पुलिस ने आरोपी को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर गुडवर्क दिखाया था। पीड़ित की मौजूदगी भी साथ दिखाई थी। मगर, गवाह के बयान में गुडवर्क और पुलिस के दावे फर्जी निकले।
थाना सिकंदरा में मुकदमा दर्ज कराया गया था। 27 जुलाई 2006 को घटना हुई थी। पुष्पांजलि कामर्शियल कॉम्प्लेक्स शास्त्रीपुरम रोड निवासी डॉ. पीके उपाध्याय के घर में तीन बदमाशों ने घुस कर वारदात की थी। उनकी पत्नी के साथ मारपीट कर फायरिंग की गई थी। पुलिस की विवेचना के मुताबिक, रात में दरोगा विनोद कुमार गश्त पर थे। तभी बदमाशों के औद्योगिक क्षेत्र में आने की जानकारी मिली।
इस पर पुलिस डॉ. पीके उपाध्याय को पहचान के लिए अपने साथ लेकर पहुंची। बदमाशों ने पुलिस पर फायर किया, जिससे पुलिसकर्मी बच गए। जवाबी कार्रवाई में आरोपी अजय पकड़ा गया। उससे एक बाइक, एक तमंचा, मिर्ची पाउडर और एक मोबाइल बरामद हुआ। दरोगा विनोद कुमार की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ जानलेवा हमला और आयुध अधिनियम के तहत मुकदमा लिखा गया था।
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अभियोजन पक्ष की तरफ से गवाही के लिए वादी विनोद कुमार, सिपाही ध्यानपाल, एसआई धर्मवीर सिंह, एसआई हरेंद्र पाल सिंह और डॉ. पीके उपाध्याय को अदालत में पेश किया गया। दिन में घटित घटना की रात को ही पुलिस ने बदमाश की गिरफ्तारी दिखा दी। इसको गुडवर्क के रूप में दर्शाया। डॉ. उपाध्याय ने कहा कि वह पुलिस के साथ नहीं थे, घटना और बरामदगी के बारे में नहीं जानते। उनसे पुलिस ने केवल हस्ताक्षर कराया था। इसके बाद आरोपी के अधिवक्ता नीरज पाठक के तर्क पर अदालत ने आरोपी को बरी करने के आदेश दिए।
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थाना सिकंदरा में मुकदमा दर्ज कराया गया था। 27 जुलाई 2006 को घटना हुई थी। पुष्पांजलि कामर्शियल कॉम्प्लेक्स शास्त्रीपुरम रोड निवासी डॉ. पीके उपाध्याय के घर में तीन बदमाशों ने घुस कर वारदात की थी। उनकी पत्नी के साथ मारपीट कर फायरिंग की गई थी। पुलिस की विवेचना के मुताबिक, रात में दरोगा विनोद कुमार गश्त पर थे। तभी बदमाशों के औद्योगिक क्षेत्र में आने की जानकारी मिली।
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इस पर पुलिस डॉ. पीके उपाध्याय को पहचान के लिए अपने साथ लेकर पहुंची। बदमाशों ने पुलिस पर फायर किया, जिससे पुलिसकर्मी बच गए। जवाबी कार्रवाई में आरोपी अजय पकड़ा गया। उससे एक बाइक, एक तमंचा, मिर्ची पाउडर और एक मोबाइल बरामद हुआ। दरोगा विनोद कुमार की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ जानलेवा हमला और आयुध अधिनियम के तहत मुकदमा लिखा गया था।
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अभियोजन पक्ष की तरफ से गवाही के लिए वादी विनोद कुमार, सिपाही ध्यानपाल, एसआई धर्मवीर सिंह, एसआई हरेंद्र पाल सिंह और डॉ. पीके उपाध्याय को अदालत में पेश किया गया। दिन में घटित घटना की रात को ही पुलिस ने बदमाश की गिरफ्तारी दिखा दी। इसको गुडवर्क के रूप में दर्शाया। डॉ. उपाध्याय ने कहा कि वह पुलिस के साथ नहीं थे, घटना और बरामदगी के बारे में नहीं जानते। उनसे पुलिस ने केवल हस्ताक्षर कराया था। इसके बाद आरोपी के अधिवक्ता नीरज पाठक के तर्क पर अदालत ने आरोपी को बरी करने के आदेश दिए।