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UP: विदेशों में बेचे जा रहे भारतीय युवक, हर एक की कीमत 3500 डॉलर...बेरोजगारों की है डिमांड

Tue, 28 Oct 2025 01:26 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 28 Oct 2025 01:26 PM IST
सार

साइबर सेल, थाना साइबर क्राइम, साइबर इंटेलिजेंस ने इंटरनेशनल साइबर ठगी गैंग का भंडाफोड़ किया है। ये गैंग विदेश में नौकरी के नाम पर बेरोजगार युवाओं को भेजते हैं। इसके लिए वो ठग गैंग से मोटी रकम वसूलते हैं। फिर वहां उन्हें ठगी करने की ट्रेनिंग दी जाती है। 

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Agra Police Busts International Cyber Fraud Gang Trafficking Indian Youths to Cambodia and Thailand
पुलिस गिरफ्त में आऱोपी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

वियतनाम, कंबोडिया व लाओस में बैठे चीनी साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग और हनी ट्रैप के माध्यम से लोगों से ठगी के लिए भारत के बेरोजगार युवाओं की खरीद फरोख्त कर रहे हैं। यहां के एजेंटों की मदद से युवाओं को मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छे पैकेज की नाैकरी का झांसा देकर अपने पास बुलाते हैं। पासपोर्ट-वीजा जब्त करने के बाद ट्रेनिंग देकर ठगी कराते हैं। विदेश और गृह मंत्रालय के इनपुट पर आगरा पुलिस ने विदेशी साइबर ठगों के तीन एजेंटों को गिरफ्तार किया है। दो को आगरा लाकर मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया। तीसरे को ट्रांजिट रिमांड पर लाया जा रहा है। आरोपी बीते 5-6 साल में कई युवाओं को विदेश भेजकर 500 करोड़ की ठगी करा चुके हैं।

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अपर पुलिस उपायुक्त आदित्य सिंह ने बताया कि विदेश मंत्रालय को कुछ महीने पहले ईमेल से शिकायत मिली थी कि भारत के युवाओं को वियतनाम में अच्छे पैकेज पर नाैकरी की बात कहकर बुलाया गया। उनसे साइबर ठगी कराई जा रही है। विरोध करने पर बंधक बनाकर रखा जाता है। खाना-पानी तक नहीं दिया जाता। भारत आने के लिए रुपयों की मांग भी की जा रही है। इस पर गृह मंत्रालय को जानकारी दी गई। बाद में युवकों को रेस्क्यू किया गया। देश लाैटने वाले युवकों की जानकारी संबंधित राज्य और जिले की पुलिस से भी साझा की गई थी।

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आगरा के 22 युवक विदेश में रहकर आए थे। इनकी लिस्ट मिलने पर पुलिस ने जांच की। पूछताछ भी की गई। इसमें मलपुरा के नगला वारे निवासी साैरभ और दोस्त अभिज्ञान को अजय शुक्ला नाम के एजेंट ने 16 जून को नाैकरी का झांसा देकर बैंकाक के रास्ते कंबोडिया भेजा था। इसके बदले में 3.5 लाख रुपये एक व्यक्ति से लिए थे। वहां पर साइबर ठगी कराई जाने लगी। विरोध पर उत्पीड़न किया गया। बाद में तीन-तीन लाख रुपये लेने के बाद वापस आने दिया गया। साइबर ठग दूसरे एजेंटों की मदद से रुपयों को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते हैं।

पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत करते हुए बताया कि साइबर स्लेवरी में कई भारतीय युवा फंसे हुए हैं। इस पर पुलिस ने जांच शुरू की। आरोपी एजेंट मध्य प्रदेश के सीधी जिले के ग्राम नाैधिया निवासी अजय कुमार शुक्ला और उन्नाव जिले के छोटा चाैराहा, एबी नगर, जैर खिड़की थाना कोतवाली निवासी मोहम्मद आतिफ खान को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। यहां से जेल भेज दिया गया। वहीं तीसरे आरोपी आमिर को महाराष्ट्र के रत्नागिरी से पकड़ा गया है। उसे भी आगरा लाया जा रहा है।



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मर्चेंट नेवी में नाैकरी करते हुए चीनी ठगों से हुई दोस्ती
एडीसीपी आदित्य सिंह ने बताया कि विदेश में साइबर ठगी का गिरोह चीनी नागरिक चला रहे हैं। गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद आतिफ उर्फ राॅनी और अजय कुमार शुक्ला लोगों को विदेश भेजने का काम करते थे। पुलिस की पूछताछ में आतिफ ने बताया कि वह स्नातक पास है। मर्चेंट नेवी का कोर्स करने के बाद वर्ष 2022 में कंबोडिया चला गया था। तब से वहीं रह रहा था। वहां उसकी मुलाकात चीनी साइबर ठगों से हो गई। उन्होंने उसे रुपयों का लालच दिया। उसका काम सिर्फ भारतीय युवाओं को कंबोडिया पहुंचाना था। इसके बदले में उसे एक व्यक्ति के 3500 से 4000 डालर तक मिलते थे। इसके लिए उसने भारत में बैठे अपने एजेंटों से संपर्क किया। वह युवकों को नाैकरी का झांसा देकर फंसाते थे। रकम लेकर विदेश भेज देते थे। 

वह उन्हें साइबर ठगी करने वालों के पास पहुंचा देता था। आतिफ के पासपोर्ट की समयावधि समाप्त हो गई थी। तभी वह भारत आया। वह 50 से अधिक युवाओं को कंबोडिया भेज चुका है। बंधक बनाने के बाद सभी से साइबर ठगी कराई जाती थी। डालर में मिलने वाली धनराशि को अन्य तरीके से अपने देश की धनराशि में बदल लेता था। उसके फोन में कई लोगों की चैट भी मिली हैं, जिसमें साइबर स्लेवरी के संबंध में बात का उल्लेख है। आरोपियों के संबंध पाकिस्तानी ठगों से भी सामने आए हैं। एक पाकिस्तानी एजेंट की फोटो आरोपी के फोन में मिली है।
 

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