आगरा: हरियाणा से आई जहरीली शराब ने ली 17 लोगों की जान, पुलिस की जांच में हुआ खुलासा
आगरा जिले में बीते सप्ताह जहरीली शराब पीने से 17 लोगों की मौत हो गई। इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।
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आगरा जिले के ताजगंज, डौकी, शमसाबाद और इरादतनगर क्षेत्र में 17 लोगों की जान लेने वाली जहरीली शराब हरियाणा से आने की जानकारी पुलिस को मिली है। शमसाबाद के ऊंचा गांव का मनोज यह शराब मंगवाता है। वो सप्लायर दारा और ठेका संचालक हेमंत तक पहुंचाता है। इसके बाद जहरीली शराब की बिक्री ठेकों से की जाती है। पुलिस की छानबीन में यह बात सामने आई है। पुलिस अब मनोज की तलाश कर रही है। हालांकि अभी पुलिस कई और सवालों के जवाब ढूंढ रही है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि ऊंचा गांव के मनोज का भाई चार साल पहले मथुरा में ठेका चलाता था। यहां मनोज बैठा करता था। उसका ठेका बंद हो गया। इस पर मनोज ने अवैध शराब का धंधा शुरू कर दिया। उसकी मुलाकात दारा सिंह से हो गई। दारा सिंह भी ठेके का सेल्समैन था। दो साल पहले अपने रिश्तेदार से मिलकर स्कूल में शराब बनाता था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। बाद में वो मनोज के संपर्क में आ गया।
मनोज हरियाणा से शराब मंगाता है। दारा सिंह को शराब देता था। वो ठेकों और गांव में लोगों को सप्लाई करता था। ठेका संचालक हेमंत के तार भी मनोज से जुड़े हुए होने की जानकारी मिली है। पुलिस को छानबीन में यह पता चला है। हालांकि अभी हेमंत और मनोज की गिरफ्तारी, दारा को रिमांड पर लेने के बाद और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
हरियाणा से आता है केमिकल
पुलिस सूत्रों ने बताया कि शराब की अवैध बिक्री करने वाले हरियाणा से एक्स्ट्रा न्यूट्रल एल्कोहल (ईईएनए) लेकर आते हैं। यह औद्योगिक इकाई और दुकान के लिए ड्रम में लाया जा सकता है। इसका प्रयोग शराब बनाने में किया जाने लगा है। मगर, इससे शराब साइंटिफिक तरीके से ही बन सकती है।
कई बार इसकी मात्रा गलत होने पर शराब जहरीली हो सकती है। अवैध कारोबार करने वाले मिथाइल एल्कोहल भी मिलाते हैं। यह केमिकल जो हरियाणा से नहीं ला पाते हैं, वो वहीं शराब बनवा लेते हैं। इसके बाद बोतलों में पैकिंग करके और यूपी का लेबल लगा दिया जाता है।
ठेकों पर नकली, घरों पर असली
जेल भेजे गए आरोपियों से यह भी पता चला है कि ठेकों से ही नकली शराब की बिक्री होती है। गांव में बेचने वालों को असली शराब ही दी जाता है। क्योंकि घरों से बेचने वालों के पकड़े जाने की आशंका रहती है। अगर, वो नकली शराब बेचते पकड़े गए तो ठेके का भी नाम लेंगे। इसलिए सेल्समैन उन्हें असली शराब ही अवैध तरीके से बेच देते हैं।