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विनोद अग्रवाल के भजनों की दीवानी है ताजनगरी, उनका यह वादा रह गया अधूरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 06 Nov 2018 08:17 PM IST
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भजन गायक विनोद अग्रवाल (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
प्रख्यात भजन गायक विनोद अग्रवाल का ताजमहल के शहर से गहरा नाता रहा है। सन 2000 से उनके गायकी का सिलसिला आगरा में शुरू हुआ और उसके बाद 2006 से 2018 तक लगातार आगरा में भजन गाने आ रहे थे। नव संवत्सर के शुभारंभ पर सामाजिक संस्था मुरलीधर मनुहार के आमंत्रण पर आते थे।
मुरलीधर मनुहार संस्था के अध्यक्ष पुष्पेंद्र त्रिवेदी ने बताया कि सन 2000-01 में विनोद अग्रवाल की भजन संध्या सूरसदन प्रेक्षागृह में हुई थी। यहां उन्हें पहली बार सुना और उसके बाद उनके भजनों की ऐसी दीवानगी हुई कि जहां तक संभव होता वे भजन संध्या में जरूर पहुंचते थे।
2006 में वृंदावन में भजन संध्या हुई तो वहां पहली बार विनोद अग्रवाल से मिलने का सौभाग्य मिला और नव संवत्सर पर आगरा में कार्यक्रम करने का आमंत्रण दिया तो उन्होंने आमंत्रण स्वीकार कर लिया। 2006 से ऐसा सिलसिला प्रारंभ हुआ कि 2018 तक लगातार वे नव संवत्सर पर आयोजित भजन संध्या में शामिल होने आते रहे।
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मुरलीधर मनुहार संस्था के अध्यक्ष पुष्पेंद्र त्रिवेदी ने बताया कि सन 2000-01 में विनोद अग्रवाल की भजन संध्या सूरसदन प्रेक्षागृह में हुई थी। यहां उन्हें पहली बार सुना और उसके बाद उनके भजनों की ऐसी दीवानगी हुई कि जहां तक संभव होता वे भजन संध्या में जरूर पहुंचते थे।
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2006 में वृंदावन में भजन संध्या हुई तो वहां पहली बार विनोद अग्रवाल से मिलने का सौभाग्य मिला और नव संवत्सर पर आगरा में कार्यक्रम करने का आमंत्रण दिया तो उन्होंने आमंत्रण स्वीकार कर लिया। 2006 से ऐसा सिलसिला प्रारंभ हुआ कि 2018 तक लगातार वे नव संवत्सर पर आयोजित भजन संध्या में शामिल होने आते रहे।
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मई, 2019 का आमंत्रण किया था स्वीकार
पुष्पेंद्र त्रिवेदी बताते हैं कि इस बार नव संवत्सर पर तो उन्हें आना ही था लेकिन पुष्पेंद्र त्रिवेदी के निजी कार्यक्रम में भी आने का निमंत्रण स्वीकार किया था। पहले निजी कार्यक्रम में आने से इनकार कर रहे थे लेकिन जब पुष्पेंद्र त्रिवेदी की मां ने अधिकार के साथ उनके कान खींचे तो विनोद अग्रवाल ने कहा कि अब तो हाईकमान यहां आ गया। मैं जरूर आऊंगा लेकिन विनोद अग्रवाल अपना वादा पूरा किए बिना ही इस दुनिया से विदा ले गए।
आगरा में उनकी दीवानगी का आलम यह रहा कि जब वे वल्देव (जगाधरी वालों) के साथ कान्हा का गुणगान करते और गोपियों की विरह वेदना को योगेश्वर श्रीकृष्ण तक पहुंचाते तो उनके साथ कार्यक्रम स्थल पर मौजूद हर आंख नम हो जाती। कोई झूम कर नाच उठता तो कोई भक्ति रस की गंगा में डुबकी लगाने लगता। विनोद अग्रवाल की अंतिम भजन संध्या जीआईसी मैदान में हुई।
मुरलीधर मनुहार संस्था के सचिव रीतेश शुक्ला का कहना है कि विनोद अग्रवाल अनुशासन को विशेष महत्व देते थे। उनके कार्यक्रम में शोरशराबा नहीं होता था और मंच भी अनुशासित रहता था। कमला नगर में आयोजित जनकपुरी में विनोद अग्रवाल भजन गाने आए थे।
यहां न केवल सामने बैठी जनता हंगामा कर रही थी बल्कि मंच पर अफरातफरी का माहौल था। विनोद अग्रवाल ने कई बार आयोजकों और जनता को शांत रहने को कहा लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। इससे नाखुश होकर विनोद अग्रवाल ने कार्यक्रम को बीच में ही छोड़ दिया।
आगरा में उनकी दीवानगी का आलम यह रहा कि जब वे वल्देव (जगाधरी वालों) के साथ कान्हा का गुणगान करते और गोपियों की विरह वेदना को योगेश्वर श्रीकृष्ण तक पहुंचाते तो उनके साथ कार्यक्रम स्थल पर मौजूद हर आंख नम हो जाती। कोई झूम कर नाच उठता तो कोई भक्ति रस की गंगा में डुबकी लगाने लगता। विनोद अग्रवाल की अंतिम भजन संध्या जीआईसी मैदान में हुई।
मुरलीधर मनुहार संस्था के सचिव रीतेश शुक्ला का कहना है कि विनोद अग्रवाल अनुशासन को विशेष महत्व देते थे। उनके कार्यक्रम में शोरशराबा नहीं होता था और मंच भी अनुशासित रहता था। कमला नगर में आयोजित जनकपुरी में विनोद अग्रवाल भजन गाने आए थे।
यहां न केवल सामने बैठी जनता हंगामा कर रही थी बल्कि मंच पर अफरातफरी का माहौल था। विनोद अग्रवाल ने कई बार आयोजकों और जनता को शांत रहने को कहा लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। इससे नाखुश होकर विनोद अग्रवाल ने कार्यक्रम को बीच में ही छोड़ दिया।