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Agra: दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में युवक को 19 साल बाद मिली रिहाई, थाने में हर सप्ताह लगानी होगी हाजिरी

Mon, 15 Aug 2022 10:43 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: विजय पुंडीर Updated Mon, 15 Aug 2022 10:43 AM IST
सार

घटना वर्ष 2003 में हुई थी। पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दो साल बाद उसे मृत्युदंड की सजा हो गई। वर्ष 2012 में दया याचिका पर राष्ट्रपति ने मृत्युदंड की सजा को इस शर्त के साथ उम्रकैद में बदला कि वह अपनी बाकी जिंदगी बिना पेरोल के जेल में बिताएगा।

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Agra News Youth got release after 19 years in murder case after rape
केंद्रीय कारागार आगरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बालिका के अपहरण व दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में जेल में बंद युवक की रविवार को 19 साल बाद रिहाई हुई। घटना के वक्त वह 13 साल का और बालिका 5 साल की थी। केंद्रीय कारागार प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत का आदेश मिलने पर उसे रिहा किया। हालांकि उसे थाना ताजगंज में हर सप्ताह हाजिरी लगानी होगी।

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घटना वर्ष 2003 में हुई थी। पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दो साल बाद उसे मृत्युदंड की सजा हो गई। वर्ष 2012 में दया याचिका पर राष्ट्रपति ने मृत्युदंड की सजा को इस शर्त के साथ उम्रकैद में बदला कि वह अपनी बाकी जिंदगी बिना पेरोल के जेल में बिताएगा। उसके पास अपनी उम्र का कोई प्रमाण नहीं था। उसने अपनी आयु के परीक्षण के लिए गुहार लगाई थी।
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मेडिकल बोर्ड ने वर्ष 2013 में उसकी उम्र 23 वर्ष पाई। इस तरह से वह घटना के समय 13 साल का था। इससे उसकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अंतरिम जमानत स्वीकृत कर रिहाई के आदेश किए। केंद्रीय जेल के अधीक्षक वीके सिंह ने बताया कि बंदी को व्यक्तिगत बंध पत्र पर रिहा कर दिया गया है। उसे हर सप्ताह संबंधित थाना में अपनी हाजिरी भी देनी होगी।
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परिवार ने तोड़ लिया था नाता
बालिका की दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना से परिवार ने आरोपी से नाता तोड़ लिया था। मोहल्ला छोड़कर भी चले गए। घर में सिर्फ रिश्तेदार रहते हैं। परिवार के लोगों ने कभी उससे मुलाकात नहीं की। यही वजह थी कि उसके किशोर होने के बावजूद रिहाई में इतने साल लग गए। जेल प्रशासन के मुताबिक, बंदी को लेने के लिए परिवार का कोई व्यक्ति नहीं आया था। वह जेल से बाहर निकाला गया। इसके बाद खुद ही चला गया। उसने जेल के कर्मचारियों से यही कहा कि वह घर जाएगा। मगर, मोहल्ले में परिवार नहीं रहता है। वह कहां जाएगा? यह किसी को नहीं बताया। 

दरिंदगी को याद कर रोने लगते हैं...
बालिका के पिता ने बताया कि हम सभी देवी जागरण के कार्यक्रम में लगे थे। पांच साल की बेटी बच्चों के साथ खेल रही थी। तभी दरिंदा आया, चॉकलेट खिलाने के बहाने ले जाकर उसके साथ वारदात की। आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया। 2003 की वह काली रात आज भी उन्हें याद है। पूरा परिवार उस दिन को याद कर रोने लगता है। तब उनके दो बच्चे थे। बेटी बड़ी थी। बेटा छोटा था। बाद में दो बच्चे और हुए। आरोपी ने बेटी की जो हालत की थी उसे भूल नहीं सकते।

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