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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Agra News: The shrine of Hazrat Salim Chishti remains closed on the 20th day of Ramadan. The door is covered with a red curtain and a green sheet is spread on the floor, on which red roses are offered.

Agra News : रमजान के 20वें रोजे पर बंद रहता है हजरत सलीम चिश्ती का दरगाह, लाल रंग के पर्दे से ढका रहता है दरवाजा, फर्श पर बिछी होती है हरे रंग की चादर, जिस पर चढाए जाते हैं लाल गुलाब के फूल

Thu, 12 Mar 2026 11:57 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 11:57 AM IST
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Agra News: The shrine of Hazrat Salim Chishti remains closed on the 20th day of Ramadan. The door is covered with a red curtain and a green sheet is spread on the floor, on which red roses are offered.
 
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हजरत सलीम चिश्ती की दरगाह, फतेहपुर सीकरी

sachin rajan



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आगरा। उर्स सूफी संत की दरगाह पर लगने वाला एक पवित्र उत्सव है। उर्स रमजान के 20वें रोजे से शुरू होता है। रमजान के आखिरी 10 दिनों की विशेष इबादत 'एतिकाफ' भी अक्सर 20वें रोजे की शाम (मगरिब) से शुरू होती है, जिसमें लोग मस्जिद या दरगाहों के एकांत में इबादत करते हैं। यह दिन इस्लामी इतिहास में फतेह मक्का के दिन के रूप में भी मनाया जाता है। हिजरी कैलेंडर के अनुसार 8 हिजरी में इसी दिन पैगंबर मोहम्मद साहब ने अपने साथियों के साथ मक्का फतह की थी। आगरा के फतेहपुर सीकरी में हजरत सलीम चिश्ती का दरगाह दुनिया का एकमात्र दरगाह है, जो इस दिन बंद रहता है। हालांकि दरगाह में प्रवेश का एकमात्र दरवाजा लाल रंग के पर्दे से ढका होता है, फर्श पर हरे रंग की चादर बिछी होती है, जिस पर इस दिन आने वाले जायरिन लाल गुलाब और चादर चढाते हैं। यहां 20वें रोजे पर विशेष इबादत 'एतिकाफ' अदा की जाती है। इस दिन दरगाह पर विशेष लाइटनिंग की जाती है, जिससे दरगाह परिसर जगमगा उठता है। अगले दिन अल सुबह सुर्योदय के साथ गुल की रस्म अदा की जाती है। हजरत सलीम चिश्ती बादशाह अकबर के गुरु जी थे। मुगल बादशाह अकबर संतान न होने पर यहां आए और सलीम चिश्ती से दुआ की गुजारिश की। उनकी भविष्यवाणी से अकबर के बेटे जहांगीर का जन्म हुआ। 1570 में मुगल बादशाह अकबर द्वारा बनवाई गई लाल पत्थर की इस दरगाह पर जहांगीर ने सफेद संगमरमर लगवाया, जो महीन व नायाब वास्तुकला के तौर पर जालीदार नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है, जहां लोग मन्नतें मांगने आते हैं। यहां लोग लाल गुलाब चढाने के पश्चात लाल धागे को बांधकर मन्नत मांगते हैं। जालीदार नक्काशी में लाल धागे से तीन गांठेॅ बांधने के साथ तीन मन्नतें मांगी जाती हैं। मन्नतें पूरी होने के बाद लोग चादरपोशी के लिए आते हैं। 'उर्स' का अर्थ 'विवाह' (शबे उरूसी) है, जो संत की आत्मा का परमात्मा (अल्लाह) से मिलन का प्रतीक भी है। इसमें कव्वाली, जियारत, चादरपोशी और मन्नतें मांगी जाती हैं। रिपोर्ट : सचिन
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