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यूपी: जिस नाले की वजह से गई दो मजदूरों की जान, वो छह महीने में बनना था; मियाद खत्म होने के बाद भी अधूरा
Tue, 22 Sep 2026 11:39 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 22 Sep 2026 11:39 AM IST
सार
सिकंदरा में करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा नाला छह महीने में पूरा होना था, लेकिन सितंबर की समय सीमा बीतने के बाद भी काम अधूरा है। इसी नाला निर्माण के दौरान दो मजदूरों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद सुरक्षा मानकों और अधिकारियों की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
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आगरा में नाला निर्माण के दौरान बड़ा हादसा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में जिस नाले के निर्माण के दौरान हुए हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, वह शास्त्रीपुरम योजना व उसके आसपास के क्षेत्र और यूपीएसआईडीसी क्षेत्र को बरसाती जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए बनाया जा रहा है। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने कार्य पूरा करने के लिए छह महीने यानी सितंबर 2026 तक की समय सीमा तय की थी। मियाद खत्म होने के बाद भी यह अधूरा है।
शासन ने इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए करीब 37 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। विभागीय दस्तावेज के अनुसार परियोजना को दो अलग-अलग चरणों फेज-1 व फेज-2 में बांटा गया। फेज-1 में शास्त्रीपुरम चौराहे से चैनेज-715 एनएच क्रॉसिंग तक नाला निर्माण होना था, जिसकी अनुमानित लागत 19.19 करोड़ रुपये है। वहीं, फेज-2 में एनएच क्रॉसिंग से बापू आशाराम आश्रम तक नाले का निर्माण किया जाना है, जिसकी अनुमानित लागत 17.96 करोड़ करोड़ रुपये है। समय पर नाला न बनने से क्षेत्रीय लोगों को इस बार की बारिश में भी जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा। और अब सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते दो मजदूरों की जान चली गई।
अफसरों पर चुप्पी, उठ रहे सवाल
निर्माण के दौरान हुई लापरवाही पर फिलहाल ठेकेदार फर्म पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है। हालांकि ठेकेदार के साथ-साथ जिन अफसरों की जिम्मेदारी निर्माण की लगातार निगरानी की थी, उनको लेकर प्राधिकरण ने चुप्पी साध ली है। विभागीय सूत्रों की मानें तो मिट्टी खोदने का काम शुरू होने के बाद अधिकारियों ने शटरिंग लगाने के लिए फर्म को नोटिस तो दिया लेकिन सख्ती से सुरक्षा उपाय लागू कराने पर जोर नहीं दिया। चूंकि शुरुआती जांच में ठेकेदार के बिना सुरक्षा मानकों को पूरा किए निर्माण कराने की बात खुद अधिकारी ही मान रहे हैं। ऐसे में निगरानी में चूक को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल आला अधिकारी जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
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आगरा विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष एम अरुन्मौली ने बताया कि प्रकरण की विभागीय अधिकारियों की टीम जांच कर रही है। रिपोर्ट के आधार पर दोषी ठेकेदार व अन्य पर कार्रवाई की जाएगी।
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शासन ने इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए करीब 37 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। विभागीय दस्तावेज के अनुसार परियोजना को दो अलग-अलग चरणों फेज-1 व फेज-2 में बांटा गया। फेज-1 में शास्त्रीपुरम चौराहे से चैनेज-715 एनएच क्रॉसिंग तक नाला निर्माण होना था, जिसकी अनुमानित लागत 19.19 करोड़ रुपये है। वहीं, फेज-2 में एनएच क्रॉसिंग से बापू आशाराम आश्रम तक नाले का निर्माण किया जाना है, जिसकी अनुमानित लागत 17.96 करोड़ करोड़ रुपये है। समय पर नाला न बनने से क्षेत्रीय लोगों को इस बार की बारिश में भी जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा। और अब सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते दो मजदूरों की जान चली गई।
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अफसरों पर चुप्पी, उठ रहे सवाल
निर्माण के दौरान हुई लापरवाही पर फिलहाल ठेकेदार फर्म पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है। हालांकि ठेकेदार के साथ-साथ जिन अफसरों की जिम्मेदारी निर्माण की लगातार निगरानी की थी, उनको लेकर प्राधिकरण ने चुप्पी साध ली है। विभागीय सूत्रों की मानें तो मिट्टी खोदने का काम शुरू होने के बाद अधिकारियों ने शटरिंग लगाने के लिए फर्म को नोटिस तो दिया लेकिन सख्ती से सुरक्षा उपाय लागू कराने पर जोर नहीं दिया। चूंकि शुरुआती जांच में ठेकेदार के बिना सुरक्षा मानकों को पूरा किए निर्माण कराने की बात खुद अधिकारी ही मान रहे हैं। ऐसे में निगरानी में चूक को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल आला अधिकारी जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
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आगरा विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष एम अरुन्मौली ने बताया कि प्रकरण की विभागीय अधिकारियों की टीम जांच कर रही है। रिपोर्ट के आधार पर दोषी ठेकेदार व अन्य पर कार्रवाई की जाएगी।