आगरा: प्रशासन ने जारी किया ब्लैक फंगस का अलर्ट, चार संदिग्ध मरीज मिले, इलाज और जांच की गाइडलाइन जारी
24 घंटे में दो नए समेत कुल चार संदिग्ध मरीज मिले हैं। जिनमें एक कोरोना संक्रमित है। इन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
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जिला प्रशासन और कोविड टास्क फोर्स ने ताजनगरी में ब्लैक फंगस बीमारी को लेकर गुरुवार को रेड अलर्ट जारी किया है। 24 घंटे में दो नए समेत कुल चार संदिग्ध मरीज मिले हैं। जिनमें एक कोरोना संक्रमित है। इन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। तीन मरीजों में पुष्टि के लिए बायोप्सी एवं फंगस कल्चर नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। जिनकी रिपोर्ट शुक्रवार तक आ सकती है।
गुरुवार को जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह और ब्लैक फंगस नोडल अधिकारी डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बचाव, उपचार और जांच को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज में नाक, कान, गला विभाग के सह आचार्य डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि चार संदिग्ध एसएन में भर्ती हुए हैं।
जिनमें दो संदिग्ध गुरुवार को आए। इनमें एक कोरोना संक्रमित है। बाकी तीनों में ब्लैक फंगस की पुष्टि के लिए बायोप्सी एवं फंगस कल्चर टेस्ट के लिए सैंपल भेजे हैं। उन्होंने बताया कि एसएन में ब्लैक फंगस मरीजों को भर्ती करने के लिए आठ बेड का स्पेशल वार्ड मेडिसिन विभाग में बनाया है।
एसएन में होंगी जांच व ऑपरेशन
जिलाधिकारी ने बताया कि ब्लैक फंगस मरीजों के उपचार के लिए 60 इंजेक्शन की वायल एसएन मेडिकल कॉलेज को मिल गई हैं। ऐसे मरीजों की जांच, दवाईयां व ऑपरेशन एसएन में ही होंगे। संदिग्ध मरीज को सबसे पहले इमरजेंसी में भर्ती होना पड़ेगा वहां से वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा।
मधुमेह रोगियों को ज्यादा खतरा
डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि मधुमेह रोगियों में ब्लैक फंगस का खतरा अधिक है। बिना चिकित्सक की सलाह मधुमेह रोगियों को स्टेरायड्स दवाएं नहीं खानी हैं। कीमोथेरेपी व ऐसे मरीज जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम है वे जल्दी इस फंगस की चपेट में आ सकते हैं।
ये हैं लक्षण
- आंख, होठ, चेहरे पर सूजन।
- नाक में पपड़ी जमना, खून आना।
- सिर दर्द होना, चक्कर-उल्टी आना।
- चेहरे पर भारीपन, सांस की दिक्कत।
जानलेवा है ऑपरेशन
शरीर के जिस हिस्से में ब्लैक फंगस हो जाता है उस पूरे हिस्से को ऑपरेशन के द्वारा काट कर अलग किया जाता है। ऐसे में ये ऑपरेशन जानलेवा एवं कष्टदायक होते हैं। डॉ. अखिल प्रताप के मुताबिक अगर आंख में ब्लैक फंगस है तो उस पूरी आंख को निकालना पड़ता है। प्राणघातक सर्जरी में मरीजों की जान तक जा सकती है।
ये होता है ब्लैक फंगस
ब्लैक फंगस एक फफूदी है। जो शरीर के अंदरूनी अंगों एवं बाहरी अंगों में हो सकती है। इसके होने का कारण गंदगी है। मरीज का तकिया, रजाई-गद्दे, कपड़े से भी हो सकती है। दूषित पानी व साफ-सफाई नहीं होने से भी ब्लैक फंगस हो सकता है।
दवाओं के दुष्प्रभाव अधिक
ब्लैक फंगस में उपचार के लिए एंटी फंगल दवाईयां, इंजेक्शन इस्तेमाल होते हैं। डॉ. अखिल प्रताप के मुताबिक एंटी फंगल दवाएं बेहद टॉक्सिक होने के कारण गुर्दें व हृदय पर इनका दुष्प्रभाव अधिक पड़ता है। ऐसे में दवाएं विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में ही दी जाती हैं।
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