हिरासत में मौत का मामला: 31 दिन बाद भी एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी जांच, उठ रहे सवाल
पुलिस हिरासत में सफाईकर्मी की मौत के मामले में पुलिस जांच का ढुलमुल रवैया सामने आया है। कासगंज पुलिस की टीम को इस मामले की जांच सौंपी गई, लेकिन जांच सिर्फ दो ही बार आगरा आई।
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आगरा के थाना जगदीशपुरा में पुलिस हिरासत में सफाईकर्मी अरुण नरवार की मौत के मामले की जांच 31 दिन बाद भी एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है। कासगंज से विवेचक दो बार ही आगरा आए। इसके बाद टीम नहीं आई। इससे कई सवाल भी उठ रहे हैं।
थाना जगदीशपुरा के मालखाने में 25 लाख की चोरी हुई थी। 17 अक्तूबर को चोरी का पता चला था। मामले में पुलिस ने सफाईकर्मी पुल छिंगा मोदी निवासी अरुण नरवार को हिरासत में लिया। 20 अक्तूबर को अरुण की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी।
घटना के बाद राजनीति गर्मा गई थी। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। परिवार के लोगों का कहना था कि पुलिस ने अरुण की पिटाई की, उसकी जान ले ली। मामले में अज्ञात में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। केस की जांच कासगंज के ढोलना थाना के प्रभारी निरीक्षक ओपी सिंह को दी गई थी। 31 दिन बाद भी विवेचना आगे नहीं बढ़ सकी है।
विवेचक ओपी सिंह ने बताया कि विवेचना में सभी तथ्यों को देखा जा रहा है। जल्द ही टीम आगरा आएगी। केस में परिजनों से पूछताछ की जाएगी।
परिजनों के बयान तक नहीं
तत्कालीन एसएसपी मुनिराज जी. ने मामले में क्रिमिनल इंटेलीजेंस विंग के प्रभारी निरीक्षक आनंद साही, चौकी प्रभारी अवधपुरी योगेंद्र सिंह, सिपाही महेंद्र, सत्यम और रूपेश को निलंबित कर दिया था। 25 अक्तूबर को विवेचक टीम के साथ आगरा आए थे।
इसके बाद एक बार और टीम आई। फिर कोई नहीं आया। परिजनों के बयान तक दर्ज नहीं किए गए हैं। परिजन आरोपी पुलिसकर्मियों के नाम सामने लाने की मांग कई बार कर चुके हैं।