श्री पारस अस्पताल प्रकरण: पीड़ितों के साथ अधिवक्ताओं ने दिया धरना, मांग रहे इन सवालों के जवाब
मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने कहा कि पुलिस प्रशासन नियम-कानून को ताक पर रखकर अस्पताल संचालक को बचाने का प्रयास कर रहा है। संघ के संरक्षक सुनील शर्मा एडवोकेट ने कहा कि किसी भी न्यायिक कार्रवाई को तोड़मरोड़ कर किया जाना भी अपराध की श्रेणी में आता है।
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आगरा श्री पारस अस्पताल के ऑक्सीजन मॉकड्रिल मामले में एक महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। मृतकों के पीड़ित भटकने को मजबूर हैं। पुलिस प्रशासन सुनवाई नहीं कर रहा है। यह आरोप लगाते हुए युवा अधिवक्ता संघ आगरा मंडल ने गुरुवार को व्यापारिक व सामाजिक संगठन एवं पीड़ितों के साथ दीवानी चौराहा स्थित चौधरी चरण सिंह पार्क में सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने कहा कि पुलिस प्रशासन नियम-कानून को ताक पर रखकर अस्पताल संचालक को बचाने का प्रयास कर रहा है। संघ के संरक्षक सुनील शर्मा एडवोकेट ने कहा कि किसी भी न्यायिक कार्रवाई को तोड़मरोड़ कर किया जाना भी अपराध की श्रेणी में आता है। किसी भी पीड़ित व्यक्ति की शिकायत पर मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया है, जो कि निंदनीय है। वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश कुमार वर्मा ने कहा कि पीड़ितों की लड़ाई अधिवक्ताओं का पैनल लड़ रहा है। उच्च न्यायालय में भी अधिवक्ता पीड़ितों की पैरवी करेंगे।
धरने में प्रमुख रूप से मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा, संरक्षक सुनील शर्मा, युवा अध्यक्ष दीवानी अरविंद गौतम, नरेंद्र कुमार शर्मा, उमेश कुमार वर्मा, योगेश लवानिया, पंकज सिंह, हरीश चतुर्वेदी, कृष्ण मुरारी माहेश्वरी, गगन शर्मा, ओंकार सिंह, राजीव ठाकुर, धर्मेंद्र वर्मा, सुशील अग्रवाल, कृपाल सिंह वर्मा, देवेंद्र सिंह, अभिनव शर्मा, मयंक सिंह, मुकेश बघेल, ललित कुमार, नितेश सिंह, संजय दीक्षित, कृष्ण शर्मा आदि मौजूद रहे।
कई एसोसिएशन ने किया समर्थन
संयुक्त व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश विधि प्रकोष्ठ के मंडल अध्यक्ष ठाकुर जयदीप सिंह ने भी युवा अधिवक्ता संघ को समर्थन दिया है। उत्तर प्रदेश स्वर्णकार समाज एसोसिएशन, संयुक्त व्यापार मंडल महानगर अध्यक्ष संजय शर्मा, मयंक दुआ, संजय प्लेस मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन, स्वर्णकार जनजागृति एसोसिएशन, श्रीधाम जन सेवा समिति, नमक मंडी व्यवसाय समिति ने धरना स्थल पर पहुंचकर पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए युवा अधिवक्ता संघ का समर्थन किया है।
धरना स्थल पर पीड़ित लोग भी मौजूद थे। पीड़ित क्षितिज शर्मा अपनी मां की याद में भावुक होकर रोने लगा। इस पर अधिवक्ताओं ने उसे संभाला। यही कुछ हाल अन्य लोगों का भी था। पीड़ित अशोक चावला के पिता और भाई की पत्नी की मौत हुई थी। पीड़ित अशोक चावला भी परिवार में दो लोगों की मौत से पूरी तरह टूट गए हैं। पीड़ित राजू यादव ने बताया कि बहनोई के चले जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई है। बहन की जिम्मेदारी भी अब उन पर आ गई है। परिवार के सामने आर्थिक संकट है।
केंद्रीय मंत्री से की सीबीआई जांच की मांग
पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जनमंच ने सांसद एसपी सिंह बघेल के केंद्रीय मंत्री बनाए जाने पर खुशी जाहिर की। दीवानी में लड्डू का वितरण किया। इसके बाद बैठक की। इसमें उनसे मांग की कि श्री पारस अस्पताल प्रकरण की सीबीआई जांच कराई जाए। बैठक में चौधरी अजय सिंह, वीरेंद्र फौजदार, सुरेंद्र लाखन, हरिबाबू, सत्यप्रकाश, जितेंद्र चौहान, सत्येंद्र कुमार यादव, अरुण पचौरी, विजय वर्मा, प्रवीन शर्मा, रोहन सिंह, अजय छोंकर आदि मौजूद रहे।
1. महामारी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने के बाद चार्जशीट लगाने में देरी क्यों लगा रही पुलिस। सामान्य अपराध में 30 दिन में चार्जशीट लगाने का प्रावधान होता है।
2. चिकित्सक की ओर से चौथ मांगने का मुकदमा दर्ज नहीं है। इसके बावजूद वीडियो बनाने के शक पुलिस आम लोगों को क्यों पकड़ रही है।
3. दंड प्रकिया संहिता की धारा 39 के अनुसार, जनता को अपराध की सूचना देने का अधिकार दिया गया है। इसमें हत्या और सदोष मानव वध की सूचना दी जा सकती है। फिर पुलिस आरोपी से पूछताछ की जगह वीडियो वायरल करने वाले को क्यों ढूंढ रही है।
4. पुलिस ने व्यापारी विनय बंसल को पकड़ा। उनका मोबाइल जब्त किया। उनसे पूछताछ की गई। पुलिस ने किस नियम के तहत मोबाइल को जब्त किया।
5. भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 126 के अनुसार, इसमें कोई भी व्यक्ति अथवा लोकसेवक इस बात को बताने के लिए बाध्य नहीं होगा कि किसी भी अपराध की सूचना या होने की सूचना उसे कहां से मिली, किसी भी साक्ष्य के लिए यह नहीं पूछा जा सकता है कि वह आया कहां से है।
6. पुलिस की केस डायरी में भी मुखबिर का जिक्र होता है, जबकि मुखबिर का नाम नहीं लिखा होता है। तब फिर वीडियो बनाने वालों को पुलिस क्यों तलाश कर रही है।
7. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में आम जन के स्वास्थ्य और स्वास्थ्य साधन को बनाए रखने का अधिकार दिया गया है, इसे बनाए रखने का कार्य राज्य के नीति निदेशक तत्व का है। फिर ऑक्सीजन की कमी क्यों हुई, अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के नोटिस क्यों लगाए गए।
8. श्री पारस अस्पताल के मालिक ने ऑक्सीजन की मॉकड्रिल करके मरीजों की छंटनी की बात कही, इस तरह से उन्होंने लोगों को अधिकार से वंचित किया है। इसमें पुलिस सीधे मुकदमा दर्ज कर सकती है, फिर क्यों नहीं हुआ।
(इन सवालों को युवा अधिवक्ता संघ के मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने उठाया है।)
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