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श्री पारस अस्पताल प्रकरण: अब डीजीपी से मिलेंगे अधिवक्ता, मुकदमा दर्ज करने की करेंगे मांग

Tue, 27 Jul 2021 12:04 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 27 Jul 2021 12:04 AM IST
सार

आगरा के बहुचर्चित श्री पारस अस्पताल प्रकरण में अब तक पीड़ितों की शिकायत पर मुकदमे दर्ज नहीं हुए हैं। इस पर अधिवक्ताओं ने कहा है कि पुलिस अस्पताल का क्लीनचिट देने में लगी है।

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Advocates will meet DGP and demand to file a case against the paras hospital agra
श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन की मॉकड्रिल के मामले में अब तक पीड़ितों की शिकायत पर मुकदमे दर्ज नहीं किए गए हैं। पुलिस को तहरीर देने के बाद पीड़ित भटकने को मजबूर हैं। उधर, पुलिस ने कोर्ट में भी आख्या नहीं भेजी थी, जिस वजह से प्रार्थनापत्र पर कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। ऐसे में अधिवक्ताओं के पैनल ने डीजीपी से मुलाकात करने का फैसला लिया है। 

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युवा अधिवक्ता संघ के मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने बताया कि अधिवक्ताओं के पैनल के पास पीड़ित अशोक चावला, राजू यादव, गीतिमा ग्रोवर, क्षितिज शर्मा, दूरबीन सिंह, पीयूष तिवारी, मनोज यादव, अमित चावला आदि के प्रार्थनापत्र आ चुके हैं। इन प्रार्थनापत्र को एसएसपी के यहां 20 दिन पहले दिया जा चुका है। मगर, अब तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है। 
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इस कारण ही कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया है। इस पर थाना न्यू आगरा से रिपोर्ट मांगी गई थी। मगर, थाने ने रिपोर्ट नहीं भेजी। इस कारण कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। पुलिस के रवैये से लगता है कि जान बूझकर आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। अगर, अब मुकदमे दर्ज नहीं किए जाते हैं तो डीजीपी से अधिवक्ताओं का पैनल मिलने जाएगा।

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जांच को भ्रमित कर रही पुलिस
एडवोकेट पैनल के वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण तेहरिया ने कहा कि बिना मुकदमा दर्ज किए किसी साक्ष्य का संकलन नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि पुलिस देरी कर रही है। पीड़ितों का मुकदमा दर्ज करने के बजाय पुलिस जांच को भ्रमित कर रही है, जिससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। 

पीड़ितों के साथ मजाक
युवा अधिवक्ता संघ के संरक्षक सुनील शर्मा ने कहा कि पुलिस भी प्रशासन की तरह पारस अस्पताल को क्लीन चिट देने में लगी है। कहीं ना कहीं पूरे प्रकरण में पीड़ितों के साथ मजाक किया जा रहा है। लोग इधर से उधर भटकने के लिए मजबूर हैं।
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