{"_id":"61160b7eccaca73f5d52388c","slug":"ada-house-damage-ceiling-plaster-down-fall-latest-news","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आगरा: एडीए के बनाए मकानों की टूट रही छत, 127 करोड़ के मकान भी हुए खंडहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आगरा: एडीए के बनाए मकानों की टूट रही छत, 127 करोड़ के मकान भी हुए खंडहर
Fri, 13 Aug 2021 11:34 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 13 Aug 2021 11:34 AM IST
सार
127 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए इन मकानों में 3640 मकान ऐसे हैं, जो आवंटन से पहले ही खंडहर हो गए। इसके कॉलम और बीम में दरारें आ चुकी हैं।
विज्ञापन
आगरा विकास प्राधिकरण के घरों की हालत
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा में आगरा विकास प्राधिकरण ने अपनी शास्त्रीपुरम कॉलोनी, कालिंदी विहार में ऐसे मकान बनाए हैं कि उनकी छतें गिरने का सिलसिला जारी है। न केवल पुराने शास्त्रीपुरम, बल्कि नए बनाए बीएसयूपी के 5 हजार मकान खंडहर में बदल गए हैं।
विज्ञापन
127 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए इन मकानों में 3640 मकान ऐसे हैं, जो आवंटन से पहले ही खंडहर हो गए। इसके कॉलम और बीम में दरारें आ चुकी हैं। शास्त्रीपुरम के 1360 मकान भी जर्जर हालत है, जबकि यह एक साल पहले जुलाई 2020 में ही आवंटित हुए हैं। दो ब्लॉक में रह रहे लोगों को सीलन, छत का प्लास्टर गिरने, दीवारों, खिड़कियों के ऊपर कॉलम में दरारें दहशत में ला चुकी हैं। बारिश में नल की तरह से इन मकानों की छत टपक रही है, जिस वजह से छतें टूटकर नीचे गिर रही हैं।
विज्ञापन
आईआईटी बताएगा, रहने लायक हैं या नहीं
आवंटन से पहले ही बीएसयूपी के 5 हजार में से 3640 मकान खंडहर हो जाने पर आगरा विकास प्राधिकरण ने आईआईटी रुड़की को जांच सौंपी है। आईआईटी की टीम एक बार आगरा आ चुकी है। यह तीन बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट सौंपेेगी कि मकान रहने लायक हैं या नहीं। रिपोर्ट तीन कैटेगरी पर बनाई जाएगी। मकानों में कम मरम्मत के बाद रहना मुमकिन है या नहीं, कुछ में ज्यादा मरम्मत करनी होगी और ऐसे, जो ध्वस्त करने लायक हैं। 25 सितंबर को आईआईटी रुड़की आगरा विकास प्राधिकरण को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। एडीए ने यह स्टडी कराने के लिए दो करोड़ रुपये जारी किए हैं।
विज्ञापन
शास्त्रीपुरम के ई-ब्लॉक में गिरी छत
बृहस्पतिवार सुबह शास्त्रीपुरम ई-ब्लॉक में अचानक छत का हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया, जिसमें रह रहे संजय श्रीवास्तव का परिवार बाल-बाल बचा। सुबह जल्दी उठ जाने के कारण सभी लोग उस समय कमरे से बाहर थे। छत की सभी सरिया बाहर निकल आईं। घटिया गुणवत्ता की निर्माण सामग्री के गिरने से संजय श्रीवास्तव का फ्रिज, एलईडी टीवी, पलंग टूट गया। उनके बच्चे बाल बाल बच गए, जो हादसे से 10 मिनट पहले से कमरे से बाहर निकले थे।
बीएसयूपी में आधा पैसा केंद्र सरकार का
बीएसयूपी केंद्र, प्रदेश सरकार की संयुक्त योजना थी। इसमें 50 प्रतिशत केंद्र सरकार, 40 फीसदी प्रदेश सरकार को और 10 फीसदी रकम लाभार्थी से वसूल की गई है। साल 2009 में बीएसयूपी योजना लांच की गई थी। 2012 में काम शुरू हुआ और 2019 में मकान पूरे हो पाए। इनमें से कुछ ब्लॉक 2017 में पूरे हो गए पर आवंटित नही हुए। बीते साल आवंटन के बाद आवंटियों ने गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए।
बृहस्पतिवार सुबह शास्त्रीपुरम ई-ब्लॉक में अचानक छत का हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया, जिसमें रह रहे संजय श्रीवास्तव का परिवार बाल-बाल बचा। सुबह जल्दी उठ जाने के कारण सभी लोग उस समय कमरे से बाहर थे। छत की सभी सरिया बाहर निकल आईं। घटिया गुणवत्ता की निर्माण सामग्री के गिरने से संजय श्रीवास्तव का फ्रिज, एलईडी टीवी, पलंग टूट गया। उनके बच्चे बाल बाल बच गए, जो हादसे से 10 मिनट पहले से कमरे से बाहर निकले थे।
बीएसयूपी में आधा पैसा केंद्र सरकार का
बीएसयूपी केंद्र, प्रदेश सरकार की संयुक्त योजना थी। इसमें 50 प्रतिशत केंद्र सरकार, 40 फीसदी प्रदेश सरकार को और 10 फीसदी रकम लाभार्थी से वसूल की गई है। साल 2009 में बीएसयूपी योजना लांच की गई थी। 2012 में काम शुरू हुआ और 2019 में मकान पूरे हो पाए। इनमें से कुछ ब्लॉक 2017 में पूरे हो गए पर आवंटित नही हुए। बीते साल आवंटन के बाद आवंटियों ने गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए।
रात में गिरती तो होती मौत
घर की छत गिरने से 10 मिनट पहले ही हम सोकर उठे थे और कमरे से बाहर थे। रात में गिरती तो कोई भी जिंदा नहीं बचता, सब दबकर मर जाते। - संजय श्रीवास्तव, ई-ब्लॉक शास्त्रीपुरम
छत से टपकता रहा पानी
इससे तो अच्छा था कि किराए के घर में ही रहते। छत से पानी टपक रहा। हाथ से प्लास्टर टूटता है। डर लगता है कि कहीं छत गिर न जाए- - पुष्पा देवी, शास्त्रीपुरम बीएसयूपी
रेत से बने मकान हैं ये
आवंटित हुए छह महीने नहीं बीते कि यह मकान जर्जर हो गए। यह रेत से बने मकान है, जो ज्यादा दिन नहीं टिक पाएंगे। - किशोर कुमार, बीएसयूपी
मकानों में लगीं पीली ईंटें
बीएसयूपी के इन मकानों में पीली ईंटें लगी हैं और छत पर सीमेंट दिखता ही नहीं। कोई ऐसा घर नहीं है जिसकी छत न टपक रही हो और जिसमें सीलन न आ रही हो। - रंजीत शास्त्रीपुरम
सितंबर में आएगी रिपोर्ट
आईआईटी रुड़की से जांच करा रहे हैं कि यह भवन रहने लायक हैं या नहीं। जो भवन रहने लायक होंगे, उनमें मरम्मत कराकर कमियां दूर कराएंगे। जो ध्वस्त करने लायक होंगे, उन्हें ध्वस्त कराएंगे। सितंबर में आईआईटी की रिपोर्ट आएगी। - डॉ. राजेंद्र पैंसिया, उपाध्यक्ष, आगरा विकास प्राधिकरण
मां तुझे प्रणाम: स्वतंत्रता दिवस पर सजेंगे शहर के चौराहे, आजादी के जश्न का हिस्सा बनें, प्रतियोगिताओं में जीतें इनाम
घर की छत गिरने से 10 मिनट पहले ही हम सोकर उठे थे और कमरे से बाहर थे। रात में गिरती तो कोई भी जिंदा नहीं बचता, सब दबकर मर जाते। - संजय श्रीवास्तव, ई-ब्लॉक शास्त्रीपुरम
छत से टपकता रहा पानी
इससे तो अच्छा था कि किराए के घर में ही रहते। छत से पानी टपक रहा। हाथ से प्लास्टर टूटता है। डर लगता है कि कहीं छत गिर न जाए- - पुष्पा देवी, शास्त्रीपुरम बीएसयूपी
रेत से बने मकान हैं ये
आवंटित हुए छह महीने नहीं बीते कि यह मकान जर्जर हो गए। यह रेत से बने मकान है, जो ज्यादा दिन नहीं टिक पाएंगे। - किशोर कुमार, बीएसयूपी
मकानों में लगीं पीली ईंटें
बीएसयूपी के इन मकानों में पीली ईंटें लगी हैं और छत पर सीमेंट दिखता ही नहीं। कोई ऐसा घर नहीं है जिसकी छत न टपक रही हो और जिसमें सीलन न आ रही हो। - रंजीत शास्त्रीपुरम
सितंबर में आएगी रिपोर्ट
आईआईटी रुड़की से जांच करा रहे हैं कि यह भवन रहने लायक हैं या नहीं। जो भवन रहने लायक होंगे, उनमें मरम्मत कराकर कमियां दूर कराएंगे। जो ध्वस्त करने लायक होंगे, उन्हें ध्वस्त कराएंगे। सितंबर में आईआईटी की रिपोर्ट आएगी। - डॉ. राजेंद्र पैंसिया, उपाध्यक्ष, आगरा विकास प्राधिकरण
मां तुझे प्रणाम: स्वतंत्रता दिवस पर सजेंगे शहर के चौराहे, आजादी के जश्न का हिस्सा बनें, प्रतियोगिताओं में जीतें इनाम