आगरा: हेलो गैंग को पांच से दस हजार रुपये में बेचता था सिम, पुलिस ने इस तरह दबोचा
हेलो गैंग को दूसरों की आईडी पर सिम उपलब्ध कराने वाला आरोपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह गैंग को पांच से दस हजार रुपये में सिम बेचता था।
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आगरा में रेंज साइबर थाना पुलिस ने हेलो गैंग को दूसरों की आईडी पर जाली सिम उपलब्ध कराने के आरोप में अलीगढ़ के खैर निवासी विजय को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, वह पांच से दस हजार रुपये में सिम बेचता था। इसका इस्तेमाल गैंग लोगों से ठगी करने में करता था। बृहस्पतिवार को आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
सीओ हरीपर्वत एएसपी सत्य नारायण ने बताया कि फरवरी में रेंज साइबर थाना पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले दो गैंग पकड़े थे। इन गैंग के 11 सदस्यों को जेल भेजा गया था। आरोपी विभिन्न राज्य में विज्ञापन देते थे। लोन और नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। आरोपी लोगों से बात करने के लिए जिन सिम का प्रयोग करते थे, वह अलग-अलग लोगों की आईडी पर थीं। इन लोगों से बात की गई। उन्होंने सिम लेने से इनकार कर दिया।
जिसके बाद पुलिस सिम विक्रेता की तलाश में लग गई। इनमें से 25 सिम को एक ही विक्रेता ने बेचा था। वह अलीगढ़ के खैर निवासी विजय था। पुलिस ने तलाश शुरू कर दी। रेंज साइबर थाना के प्रभारी निरीक्षक आकाश सिंह और उनकी टीम तलाश में लगी। बुधवार रात को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। वह साइबर अपराधियों को दूसरों की आईडी की सिम बेचा करता था।
चलती फिरती दुकान चलाता है विजय
सीओ हरीपर्वत के मुताबिक आरोपी, विजय से पूछताछ में पता चला कि वो सिम बेचने का काम करता है। मगर, उसकी कोई दुकान नहीं है। वह जगह-जगह जाकर सिम बेचता है। कभी कुर्सी लगाकर और केनोपी में सिम बेचने का काम करता है। जब कभी उसे सिम साइबर ठगों को बेचनी होती थी, तब वह कम जानकार महिला और वृद्ध को चुनता था। मोबाइल एप से एक ही नाम से दो बार केवाईसी करके दो सिम जारी कर लेता था। इसके बाद एक सिम ग्राहक को देता था, जबकि उसी के नाम की दूसरी साइबर अपराधियों को पांच से दस हजार रुपये में बेच देता था। वह तकरीबन छह साल से सिम बेच रहा है। अब तक कितनी सिम साइबर अपराधियों को बेची हैं, इसकी जानकारी के लिए पुलिस पड़ताल में लगी है।
दो बार फोटो खिंचने पर दुकानदार से करें पूछताछ
पुलिस ने बताया कि सिम खरीदते समय सावधान रहें। सिम लेने के लिए आधार कार्ड देना होता है। दुकानदार नेटवर्क कंपनी के मोबाइल एप की मदद से ग्राहक और आधार कार्ड की फोटो खींचता है इसके बाद मोबाइल पर ओटीपी आता है। इसी तरह दुकानदार अपनी फोटो लेता है। सिम के बार कोड को भी स्कैन किया जाता है। इसके बाद सिम जारी हो जाती है। अगर, यह प्रक्रिया दुकानदार दो बार करवाता है तो समझ जाएं कि किसी तरह की धोखाधड़ी कर सकता है। इस पर दुकानदार से पूछताछ करें। अगर, आप एक ही सिम ले रहे हैं तो उसे यह प्रक्रिया दोबारा करने से रोक दें।