{"_id":"3-58924","slug":"Agra-58924-3","type":"story","status":"publish","title_hn":"इसे सिर्फ स्टिकर न समझें, ओवरलोडिंग का ‘परमिट’ है यह ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इसे सिर्फ स्टिकर न समझें, ओवरलोडिंग का ‘परमिट’ है यह
Agra
Updated Tue, 07 May 2013 05:30 AM IST
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अमित सिंह
आगरा। ट्रकों पर आरसीआई, संग्राम राजा, जीएफसी लिखा अथवा मोनोग्राम सा बना बहुत बार आपने भी देखा होगा। एक नजर में किसी कंपनी का नाम लगने वाले ये स्टिकर (ट्रक ड्राइवरों के बीच प्रचलित) दरअसल कुछ दलालों द्वारा जारी एक तरह का परमिट हैं। ये परिवहन विभाग के चेकिंग स्टाफ के लिए संकेतक का काम भी करते हैं। फिर ये ट्रक यदि ओवरलोड भी हैं तो पकड़े नहीं जाएंगे। और यह सब यूं ही नहीं है। ट्रक को कितनी दूरी तय करनी है, इस हिसाब से दलाल पैसे वसूलते हैं। संबंधित अधिकारियों को उनका हिस्सा मिल जाता है और धड़ल्ले से दौड़ते ओवरलोड ट्रक हर माह सरकारी खजाने को करोड़ों की चोट पहुंचाते रहते हैं। यह गोरखधंधा बेहद सुनियोजित ढंग से संचालित है।
ओवरलोड ट्रकों को पास कराने के इस अवैध धंधे का नेटवर्क यूपी, एमपी, राजस्थान और दिल्ली तक फैला हुआ है। दलाल अधिकारियों की मिलीभगत से एक कोड व स्टीकर चालकों को देते हैं। इसके बूते उनका ट्रक धड़ल्ले से हर सीमा पार कर जाता है। स्टिकर का सीधा सा मतलब है कि ‘चढ़ावा’ अधिकारियों की जेब में पहुंच चुका है। आगरा की मंडल सीमा से रोजाना हजारों ट्रक गुजरते हैं। मंडलभर में ओवरलोड ट्रक चलाने का महीने का खर्चा आठ हजार और एक जिले का दो हजार रुपये वसूला जा रहा है।
सोमवार को अमर उजाला टीम ने दोपहर 12 बजे के बाद एमजी रोड टू, बिचपुरी रोड से जयपुर हाइवे, सिकंदरा रोड पर ओवरलोड ट्रकों को कोड व स्टिकर के बूते पास होते देखा। इन्हें कैमरे में कैद भी किया। पास होने वाले अधिकतर ट्रकों पर जीआर, एसजीएस, जीएफसी, एसआरटी, टाटा, आरसीआई, काका, पीईटीएस व पॉवर के स्टिकर थे। बताते हैं, हाईवे से निकलने वाले हर तीसरे ट्रक पर स्टीकर होता है। इसमें आरसीआई, संग्राम राजा और जीएफसी स्टिकर वाले ट्रक सर्वाधिक होते हैं। इंडस्ट्रियल एरिया सिकंदरा क्षेत्र में सड़क पर खड़े एक ट्रक (आरजे-02जीए-5116) के चालक से बात की गई तो उसने बताया कि वह मुरैना के उपाध्याय के यहां से स्टिकर लाता है। अन्य कागजात के साथ तीन स्टिकर उसकी फाइलों में थे।
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इस बारे में बातचीत के लिए आरटीओ संजय माथुर और एआरटीओ विश्वजीत प्रताप सिंह को फोन किया गया लेकिन दोनों से संपर्क नहीं हो सका।
जुर्म है ओवरलोडिंग
किसी भी मालवाहक वाहन पर निर्धारित सीमा से अधिक वजन लादना ओवरलोडिंग है। यह नियमत: जुर्म है। ओवरलोड पाए जाने पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत जुर्माने का प्रावधान है। जुर्माना न अदा कर पाने पर ट्रांसपोर्टरों पर कार्रवाई की जाती है। लेकिन दलालों ने ऐसा रास्ता निकाला कि ट्रांसपोर्टरों, अधिकारियों और खुद उनकी जेब गरम होती रहे। इस अवैध काम को अंजाम देने के लिए दलालों ने बाकायदा पूरा तंत्र खड़ा कर लिया है। कार्रवाई का शिकार वही ट्रक होता है जिसपर स्टिकर न लगा हो।
दलालों का अपना निगरानी तंत्र भी है
ऐसा नहीं है कि कोई ट्रक चालक एक माह के लिए स्टिकर लेकर कई माह तक उसका फायदा उठा ले। एक तो हर माह स्टिकर बदल दिए जाते हैं, दूसरे दलालों के आदमी हाईवे पर तैनात होते हैं। ये चेक करते हैं कि कहीं पुराना स्टिकर तो नहीं इस्तेमाल हो रहा। यदि ऐसा पाया गया तो ट्रकवालों से बाकायदा सरकारी स्टाइल में जुर्माना वसूला जाता है। किसी ने आनाकानी की तो पहले ये अपने तरीके से निपटते हैं। बात न बनी तो मिलीभगत वाले विभागीय अधिकारी से इन पर कार्रवाई कराई जाती है।
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आहूजा, तनेजा और उपाध्याय के गिरोह
इस इलाके में गोरखधंधे के संचालक अहूजा, तनेजा और उपाध्याय बताए गए हैं। इनका पूरा नाम कोई नहीं लेता। यदि आरसीआई, एसआरटी स्टीकर ट्रक पर लगा है, तो संबंधित लोग समझ जाते हैं कि आहूजा का ट्रक है और उसे कोई नहीं रोकेगा। इसी तरह, पता चला कि इलाहाबाद मंडल में विधायक नाम से मशहूर व्यक्ति गोरखधंधे का संरक्षक है। हाईवे पर बने कुछ चुनिंदा ढाबे इन स्टिकर संचालकों के एजेंट के रूप में काम करते हैं। प्राय: ट्रक चालक यहीं भुगतान कर स्टिकर हासिल करते हैं।
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आगरा। ट्रकों पर आरसीआई, संग्राम राजा, जीएफसी लिखा अथवा मोनोग्राम सा बना बहुत बार आपने भी देखा होगा। एक नजर में किसी कंपनी का नाम लगने वाले ये स्टिकर (ट्रक ड्राइवरों के बीच प्रचलित) दरअसल कुछ दलालों द्वारा जारी एक तरह का परमिट हैं। ये परिवहन विभाग के चेकिंग स्टाफ के लिए संकेतक का काम भी करते हैं। फिर ये ट्रक यदि ओवरलोड भी हैं तो पकड़े नहीं जाएंगे। और यह सब यूं ही नहीं है। ट्रक को कितनी दूरी तय करनी है, इस हिसाब से दलाल पैसे वसूलते हैं। संबंधित अधिकारियों को उनका हिस्सा मिल जाता है और धड़ल्ले से दौड़ते ओवरलोड ट्रक हर माह सरकारी खजाने को करोड़ों की चोट पहुंचाते रहते हैं। यह गोरखधंधा बेहद सुनियोजित ढंग से संचालित है।
ओवरलोड ट्रकों को पास कराने के इस अवैध धंधे का नेटवर्क यूपी, एमपी, राजस्थान और दिल्ली तक फैला हुआ है। दलाल अधिकारियों की मिलीभगत से एक कोड व स्टीकर चालकों को देते हैं। इसके बूते उनका ट्रक धड़ल्ले से हर सीमा पार कर जाता है। स्टिकर का सीधा सा मतलब है कि ‘चढ़ावा’ अधिकारियों की जेब में पहुंच चुका है। आगरा की मंडल सीमा से रोजाना हजारों ट्रक गुजरते हैं। मंडलभर में ओवरलोड ट्रक चलाने का महीने का खर्चा आठ हजार और एक जिले का दो हजार रुपये वसूला जा रहा है।
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सोमवार को अमर उजाला टीम ने दोपहर 12 बजे के बाद एमजी रोड टू, बिचपुरी रोड से जयपुर हाइवे, सिकंदरा रोड पर ओवरलोड ट्रकों को कोड व स्टिकर के बूते पास होते देखा। इन्हें कैमरे में कैद भी किया। पास होने वाले अधिकतर ट्रकों पर जीआर, एसजीएस, जीएफसी, एसआरटी, टाटा, आरसीआई, काका, पीईटीएस व पॉवर के स्टिकर थे। बताते हैं, हाईवे से निकलने वाले हर तीसरे ट्रक पर स्टीकर होता है। इसमें आरसीआई, संग्राम राजा और जीएफसी स्टिकर वाले ट्रक सर्वाधिक होते हैं। इंडस्ट्रियल एरिया सिकंदरा क्षेत्र में सड़क पर खड़े एक ट्रक (आरजे-02जीए-5116) के चालक से बात की गई तो उसने बताया कि वह मुरैना के उपाध्याय के यहां से स्टिकर लाता है। अन्य कागजात के साथ तीन स्टिकर उसकी फाइलों में थे।
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जुर्म है ओवरलोडिंग
किसी भी मालवाहक वाहन पर निर्धारित सीमा से अधिक वजन लादना ओवरलोडिंग है। यह नियमत: जुर्म है। ओवरलोड पाए जाने पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत जुर्माने का प्रावधान है। जुर्माना न अदा कर पाने पर ट्रांसपोर्टरों पर कार्रवाई की जाती है। लेकिन दलालों ने ऐसा रास्ता निकाला कि ट्रांसपोर्टरों, अधिकारियों और खुद उनकी जेब गरम होती रहे। इस अवैध काम को अंजाम देने के लिए दलालों ने बाकायदा पूरा तंत्र खड़ा कर लिया है। कार्रवाई का शिकार वही ट्रक होता है जिसपर स्टिकर न लगा हो।
दलालों का अपना निगरानी तंत्र भी है
ऐसा नहीं है कि कोई ट्रक चालक एक माह के लिए स्टिकर लेकर कई माह तक उसका फायदा उठा ले। एक तो हर माह स्टिकर बदल दिए जाते हैं, दूसरे दलालों के आदमी हाईवे पर तैनात होते हैं। ये चेक करते हैं कि कहीं पुराना स्टिकर तो नहीं इस्तेमाल हो रहा। यदि ऐसा पाया गया तो ट्रकवालों से बाकायदा सरकारी स्टाइल में जुर्माना वसूला जाता है। किसी ने आनाकानी की तो पहले ये अपने तरीके से निपटते हैं। बात न बनी तो मिलीभगत वाले विभागीय अधिकारी से इन पर कार्रवाई कराई जाती है।
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आहूजा, तनेजा और उपाध्याय के गिरोह
इस इलाके में गोरखधंधे के संचालक अहूजा, तनेजा और उपाध्याय बताए गए हैं। इनका पूरा नाम कोई नहीं लेता। यदि आरसीआई, एसआरटी स्टीकर ट्रक पर लगा है, तो संबंधित लोग समझ जाते हैं कि आहूजा का ट्रक है और उसे कोई नहीं रोकेगा। इसी तरह, पता चला कि इलाहाबाद मंडल में विधायक नाम से मशहूर व्यक्ति गोरखधंधे का संरक्षक है। हाईवे पर बने कुछ चुनिंदा ढाबे इन स्टिकर संचालकों के एजेंट के रूप में काम करते हैं। प्राय: ट्रक चालक यहीं भुगतान कर स्टिकर हासिल करते हैं।