पहली मशीन मेड फोर्ड ने लुभाया

Agra Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
आगरा। रैली में एक से बढ़कर एक विन्टेज और क्लासिक कारें बरबस ध्यान आकर्षित कर रही थीं। सन 1928 की फोर्ड के ए मॉडल की कार काफिले की शान थी। यह पहली मशीन मेड कार थी। इसके अलावा द्वितीय विश्व युद्ध में इस्तेमाल की गई अमेरिकी जीप। 1942 की पोंटिएक कार हो या फिर 1960 की शेवरले।
विन्टेज कार रैली में 19 विन्टेज कारों ने प्रतिभाग किया। दिल्ली के गौरव गुलाटी अपने दोस्तों के साथ 1942 की पोन्टिएक कार लेकर आए थे। दिल्ली के अर्जुन महादे 1928 मॉडल ‘ए’ की फोर्ड कार के साथ आए थे। उन्होंने बताया कि यह पहली मशीन मेड कार है। इसके पहले फोर्ड कंपनी मॉडल ‘टी’ के नाम से हैंड मेड कार ही बनाती थी।
उन्होंने बताया कि उनके पिता पवन महादे ने इस कार को प्रेजेंट किया था। 40 हॉर्स पावर के इंजन वाली इस कार में 40 लीटर का पेट्रोल टैंक है। इसकी रिम 21 इंच की है। बैटरी भी संभालकर रखनी होती है। इस कार को वह साल के आठ महीने जैक्स पर रखते हैं, ताकि इसके टायर खराब नहीं हों। चार माह हल्की फुल्की ड्राइव करते हैं। किसी तरह की खराबी आने पर मैकेनिक हाथ लगाने को तैयार नहीं होते। इसके पार्ट्स वह कनाडा से मंगवाते हैं। उन्होंने बताया कि वह लंदन से विन्टेज कार रैली में प्रतिभाग करने आए हैं। वह लंदन में पढ़ाई कर रहे हैं।
शिवराज आनंद सन 1947 की हिलमैन कार लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि यह ब्रिटिश कार बहुत लोकप्रिय रही है। छोटे इंजन की इस कार की खासियत है इसका ड्रॉप हेड यानि छत। इसे पूरा या आधा बंद किया जा सकता है। ओपन भी चलाई जाती है। उन्होंने बताया कि इस कार को ‘जिंदगी मिलेगी ना दोबारा’ में अभिनेता ने चलाया था। इसका रखरखाव बहुत मुश्किल होता है। इसके पार्ट्स ब्रिटेन में ही मिल पाते हैं।
दिल्ली के राजवंत ग्रेवाल अपने पाकिस्तानी मित्र मोहसिन इकरम के साथ अपनी क्लासिक कार सनबीम टॉलबॉट लेकर आए थे। 1947 मॉडल की यह कार बेजोड़ है। उन्होंने बताया कि इस कार की मेंटिनेंस बड़े ध्यान से करते हैं।
नवीन कोहली 1962 मॉडल की शेवरले बैरियल लेकर आए थे। उनके साथ दो मैकेनिक भी आए थे। उन्होंने बताया कि किसी तरह की गड़बड़ी होने पर मैकेनिक साथ होना जरूरी है। इस कार के पार्ट्स मिलना मुश्किल होता है।
अर्जुन प्रीत अपनी विन्टेज सनबीव एल्पाइन मॉडल 1959 लेकर आए थे। इसी तरह सरदार गुरुदीप सिंह एंपाला शेवरले 1960 और स्टुकी वैगन 1959 लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि क्लासिक कारें रखने का उनका शौक बहुत पुराना है। उनके कलेक्शन में 30 से अधिक क्लासिक कारें हैं। वह दो कारों को लेकर इस रैली में आए हैं।
ऊना (हिमाचल प्रदेश) से आए रिटायर्ड मेजर नागेंद्र सिंह अमेरिकी जीप (1944) लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि इस जीप को द्वितीय विश्व युद्ध में इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद सेना ने इसकी नीलामी कर दी। इस जीप को उन्होंने खरीद लिया। वह कई रैलियों में इस क्लासिक गाड़ी को प्रदर्शित कर चुके हैं। रैली में 1963 की पोन्टिएक, 1944 की फोर्ड, आगरा के विकास शिवहरे ने रैली में अपनी 1963 की अंबेसडकर कार के साथ प्रतिभाग किया।

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