बम-पटाखे चलाएं, जरा संभलकर

Agra Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
आगरा। बम-पटाखे दीपोत्सव को बेरंग कर सकते हैं। पटाखों की तेज आवाज कानों को नुकसान पहुंचा सकती है। अस्थमा और हृदय रोगियों के लिए बम-पटाखों का धुआं घातक साबित हो सकता है।

फट सकता है कान का पर्दा
100 डेसीबल से ज्यादा की आवाज कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकती है जबकि बम-पटाखे की आवाज तकरीबन 300 डेसीबल तक होती है। ईएनटी विशेषज्ञ डा. आलोक मित्तल ने बताया कि पटाखे चलाते समय कान में रूई लगा लें। किसी व्यक्ति के पास पटाखे चलाने के बजाय खुले स्थान पर चलाएं।

दूर से ही चलाएं बम
बम से जलने का भी खतरा रहता है। इससे बचने के लिए ब्रांडेड पटाखे ही खरीदें। इससे बम के अचानक से फटने का खतरा नहीं होता है। साथ ही किसी डंडे में मोमबत्ती को बांध कर ही बम-पटाखे चलाएं।

अस्थमा और हृदय रोगियों को खतरा
बम-पटाखे से निकलने वाला धुआं अस्थमा और हृदय रोगियों के लिए घातक होता है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डा. अतुल सारस्वत ने बताया कि बम में गंधक और पोटाश होता है। इससे उठने वाले धुएं से मरीजों को अस्थमा अटैक का खतरा रहता है। साथ ही हृदय रोगियों को भी धुएं के चलते सांस लेने में दिक्कत होती है।

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