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मोहित हत्याकांड 10 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली, जांच पर उठाई उंगली
Agra
Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
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आगरा। मोहित हत्याकांड की जांच में अब झोल नजर आने लगे हैं। जीआरपी पुलिस ने बंदी मोहित की पत्नी की तहरीर तो ली पर उसमें नामजद लोगों पर जांच करना मुनासिब नहीं समझा। पुलिस अपने ढंग से आरोपियों की तलाश में जुटी है। हालांकि पुलिस का दावा है कि वह गैंग तक पहुंच गए हैं। बस उनकी गिरफ्तारी शेष है।
बंदी मोहित और सिपाही की हत्या मामले में जीआरपी के अलावा एसटीएफ भी जांच में जुटी है, लेकिन इन दोनों सुरक्षा एजेंसियों ने मोहित की पत्नी की तहरीर को तबज्जों नहीं दी। मोहित की पत्नी ने साफ लिखा था कि उसकी पति की हत्या में शम्मी कोहली के बेटों नितिन और सुमित का हाथ है। इसके बावजूद पुलिस ने इन दोनों से पूछताछ करना मुनासिब नहीं समझा। जीआरपी ने तो उनके चश्मदीद गवाह पवन को ही पूछताछ के लिए बुधवार को बुला लिया। सुबह से रात आठ बजे तक उससे पूछताछ की गई, जबकि गवाह को बुलाने का मकसद हिरासत में लिए तीन लोगों को पहचान कराना था। जीआरपी के अधिकारियों की मानें तो उन्होंने अपने ही तरीके से जांच की है। इसमें सर्विलांस के अलावा कई और तरीकों का इस्तेमाल किया है। वारदात के हिसाब से आठ गैंगों की तलाश की गई है। इसके बाद जांच कर दो गैंगों पर पुलिस आकर पुलिस की जांच थम गई है। पुलिस का दावा है कि वारदात को अंजाम देने वाला गैंग ट्रेस हो गया। बस उनकी गिरफ्तारी शेष है। मोहित के परिजन पुलिस की जांच प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि शुरू से ही पुलिस घालमेल कर रही है। हत्या वाले दिन उन्हें तहरीर देने से मना कर दिया गया, जबकि पुलिस ने अज्ञात में खुद मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके बाद जो तहरीर उन्होंने दी, उसे जांच में शामिल तो किया लेकिन जांच नहीं की। आज दस दिन से ऊपर हो गए, पुलिस के हाथ खाली के खाली हैं।
नामजदों से पूछताछ को कतरा रही पुलिस
आगरा। जीआरपी के अधिकारियों का कहना है कि वह नामजदों को कैसे गिरफ्तार कर ले। उनके खिलाफ अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं है। सवाल यह है कि क्या नामजदों से पूछताछ के लिए भी सबूत की जरूरत है या फिर पुलिस ने मान लिया है कि नामजद दोनों व्यक्ति निर्दोष हैं।
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बंदी मोहित और सिपाही की हत्या मामले में जीआरपी के अलावा एसटीएफ भी जांच में जुटी है, लेकिन इन दोनों सुरक्षा एजेंसियों ने मोहित की पत्नी की तहरीर को तबज्जों नहीं दी। मोहित की पत्नी ने साफ लिखा था कि उसकी पति की हत्या में शम्मी कोहली के बेटों नितिन और सुमित का हाथ है। इसके बावजूद पुलिस ने इन दोनों से पूछताछ करना मुनासिब नहीं समझा। जीआरपी ने तो उनके चश्मदीद गवाह पवन को ही पूछताछ के लिए बुधवार को बुला लिया। सुबह से रात आठ बजे तक उससे पूछताछ की गई, जबकि गवाह को बुलाने का मकसद हिरासत में लिए तीन लोगों को पहचान कराना था। जीआरपी के अधिकारियों की मानें तो उन्होंने अपने ही तरीके से जांच की है। इसमें सर्विलांस के अलावा कई और तरीकों का इस्तेमाल किया है। वारदात के हिसाब से आठ गैंगों की तलाश की गई है। इसके बाद जांच कर दो गैंगों पर पुलिस आकर पुलिस की जांच थम गई है। पुलिस का दावा है कि वारदात को अंजाम देने वाला गैंग ट्रेस हो गया। बस उनकी गिरफ्तारी शेष है। मोहित के परिजन पुलिस की जांच प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि शुरू से ही पुलिस घालमेल कर रही है। हत्या वाले दिन उन्हें तहरीर देने से मना कर दिया गया, जबकि पुलिस ने अज्ञात में खुद मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके बाद जो तहरीर उन्होंने दी, उसे जांच में शामिल तो किया लेकिन जांच नहीं की। आज दस दिन से ऊपर हो गए, पुलिस के हाथ खाली के खाली हैं।
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नामजदों से पूछताछ को कतरा रही पुलिस
आगरा। जीआरपी के अधिकारियों का कहना है कि वह नामजदों को कैसे गिरफ्तार कर ले। उनके खिलाफ अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं है। सवाल यह है कि क्या नामजदों से पूछताछ के लिए भी सबूत की जरूरत है या फिर पुलिस ने मान लिया है कि नामजद दोनों व्यक्ति निर्दोष हैं।
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