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बाबू मेहरबान, दुकान तोड़ बना लिए मकान
Updated Wed, 12 Sep 2018 10:41 PM IST
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बाबू मेहरबान, दुकान तोड़ बना लिए मकान
- फोटो : अमर उजाला
एटा। नगर पालिका में हर ओर भ्रष्टाचार है। हर पटल पर पालिका को डुबोने के लिए खेल चल रहा है। पालिका के संपत्ति विभाग में भी बड़ा खेल है। पालिका परिसर में बने अनुपम कामर्शियल कांपलेक्स के नाम पर बाबू जमकर गोलमाल कर रहा है। बताया जाता है कि बाबू की मेहरबानी से कांपलेक्स के आवंटियों ने दुकान तोड़कर मकान बना लिए हैं। मगर पालिका कोई भी कार्रवाई नहीं कर सकी।
नगर पालिका में सालों पहले करोड़ों रुपये की लागत से अनुपम कामर्शियल कांपलेक्स का निर्माण कराया गया जिसमें 288 दुकानें बनाई गईं। इसमें पालिका ने 223 दुकानें आवंटियों को दे दी। आलम यह हुआ कि निर्माण अधूरा रह जाने से किसी भी आवंटी ने दुकान पर कब्जा नहीं लिया। कुछ साल बाद कुछ आवंटी ने दुकानों पर कब्जा लिया, लेकिन उन्होंने दुकानों को तोड़कर मकान बना लिए हैं। पालिका कार्यालय के ऊपर ही बने हाल को तोड़कर आवंटियों ने कमरे, रसोई घर बना लिए हैं। सूत्र बताते हैं कि संपत्ति लिपिक की शह पर पूरा खेल चल रहा है। पिछले दिनों संपत्ति लिपिक की मनमानी का मामला बोर्ड बैठक में भी उठा था जिस पर उसे निलंबित कर दिया गया था, लेकिन पालिकाध्यक्ष ने मिनट बुक में ओवर राइटिंग कर लिपिक को बहाल करा दिया।
ऐसे में साफ है कि संपत्ति लिपिक और पालिका अधिकारियों की शह पर दुकान आवंटी मनमानी पर उतारू हैं। जबकि पालिका को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि हो रही है।
फाइलें भी लापता
अनुपम कांपलेक्स को लेकर पालिका के पास कोई रिकार्ड नहीं है। लिपिकों के लगातार बदलने से फाइलें गायब हो गई हैं। इसे लेकर आवंटियों से बकाया की वसूली भी अटकी हुई है।
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इनका कहना है
-आवंटियों को बकाया जमा करने को नोटिस जारी किए गए हैं। बाकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मकान बनाने के बारे में मुझे कुछ भी नहीं पता है। यशवीर सिंह, संपत्ति लिपिक
-दुकान में रेेस्टोरेंट तो बन सकता है। मगर घर बनाना गलत है। मेरी जानकारी में ऐसी कोई बात नहीं है।
मीरा गांधी, पालिकाध्यक्ष
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नगर पालिका में सालों पहले करोड़ों रुपये की लागत से अनुपम कामर्शियल कांपलेक्स का निर्माण कराया गया जिसमें 288 दुकानें बनाई गईं। इसमें पालिका ने 223 दुकानें आवंटियों को दे दी। आलम यह हुआ कि निर्माण अधूरा रह जाने से किसी भी आवंटी ने दुकान पर कब्जा नहीं लिया। कुछ साल बाद कुछ आवंटी ने दुकानों पर कब्जा लिया, लेकिन उन्होंने दुकानों को तोड़कर मकान बना लिए हैं। पालिका कार्यालय के ऊपर ही बने हाल को तोड़कर आवंटियों ने कमरे, रसोई घर बना लिए हैं। सूत्र बताते हैं कि संपत्ति लिपिक की शह पर पूरा खेल चल रहा है। पिछले दिनों संपत्ति लिपिक की मनमानी का मामला बोर्ड बैठक में भी उठा था जिस पर उसे निलंबित कर दिया गया था, लेकिन पालिकाध्यक्ष ने मिनट बुक में ओवर राइटिंग कर लिपिक को बहाल करा दिया।
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ऐसे में साफ है कि संपत्ति लिपिक और पालिका अधिकारियों की शह पर दुकान आवंटी मनमानी पर उतारू हैं। जबकि पालिका को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि हो रही है।
फाइलें भी लापता
अनुपम कांपलेक्स को लेकर पालिका के पास कोई रिकार्ड नहीं है। लिपिकों के लगातार बदलने से फाइलें गायब हो गई हैं। इसे लेकर आवंटियों से बकाया की वसूली भी अटकी हुई है।
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इनका कहना है
-आवंटियों को बकाया जमा करने को नोटिस जारी किए गए हैं। बाकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मकान बनाने के बारे में मुझे कुछ भी नहीं पता है। यशवीर सिंह, संपत्ति लिपिक
-दुकान में रेेस्टोरेंट तो बन सकता है। मगर घर बनाना गलत है। मेरी जानकारी में ऐसी कोई बात नहीं है।
मीरा गांधी, पालिकाध्यक्ष