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आंखों के सामने आशियाना जलता देखते रहे बेबस लोग

Wed, 18 Apr 2018 11:08 PM IST
Updated Wed, 18 Apr 2018 11:08 PM IST
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आंखों के सामने आशियाना जलता देखते रहे बेबस लोग
fire shimla
पटियाली।
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जिन उम्मीदों से लोगों ने अपना सिर छिपाने को घर बनाया था। उसी आशियाने को लोगों ने अपनी आंखों के सामने जलता हुआ देखा। आग ने ऐसा कहर ढाया कि चंद घंटों में गांव ही राख में तब्दील हो गया। पटियाली क्षेत्र में अग्नि प्रभावित गांव रिकैरा, नगला नियाजी एवं रामसा नगला में कुछ बचा था तो बस अफरा, तफरी, आंखों में आंसू और चीत्कार का मंजर। बच्चों की किलकारियां भी चीत्कार में दब गईं। अपने बच्चों को साथ लिए महिलाएं खेतों में शरण लिए हुए थीं। आग काबू में हुई तो घर में कुछ भी नहीं मिला सिवाए राख के।

रिकैरा गांव में आग ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। इस गांव का तो पूरा अस्तित्व ही आग ने मिटा डाला। करीब एक हजार से अधिक आबादी का गांव काफी खुशहाल था। यहां के किसान खादर में खरबूज, तरबूज, खीरा आदि की खेती करते हैं। वहीं गेहूं आदि की फसलें भी खेतों में खड़ी थीं। गांव में कुल 175 मकान थे जिनमें से 155 आग की भेंट चढ़ गए। घर में तिनका-तिनका जोड़कर घर की जरूरतों का जो सामान सजोया था, किसी के गहने रखे थे तो किसी की बचत की नकदी, तो कोई फसल बेचकर पैसा लाया था, तो किसी ने बीमारी के इलाज के लिए पैसे बचे थे, घर में खुद के खाने के लिए गल्ला रखा तो पशुओं के लिए चारा। यह सब आग की भेंट चढ़ गया अब न ही खाने को दाना बचा और न ही पशुओं के लिए चारा। ऐसा मंजर रिकैरा के अग्नि पीड़ितों का तो था ही वहीं नगला नियाज अली और रामसा नगला में भी यही आलम हुआ। ग्रामीणों की सर छुपाने की छत भी नहीं थी, अब खुले आसमान के नीचे अग्नि पीड़ित ग्रामीण रहने को मजबूर होंगे। बर्बादी का मंजर देखकर गांव की महिला पछाड़ खाकर रो रहीं थीं। उन्हें अपने घर की और बच्चों की चिंता सता रही थी। ग्रामीणों की समझ में नहीं आ रहा था कि उनके बेपटरी हो चुकी जिंदगी कैसे पटरी पर आएगी। क्योंकि वर्षों की खून पसीने की मेहनत तो कुछ ही देर में राख हो गई अब कैसे क्या होगा। रिकैरा में श्यामपाल की पत्नी अपनी मासूम बच्चे को कलेजे से लगाए माथे पर हाथ रखकर रो रही थी। बार बार बर्बादी के मंजर को देखकर चीत्कार कर रही थी। गांव के ही राजेंद्र ने बताया कि पूरा गांव ही जलकर राख हो गया अब गांव में कुछ नहीं बचा। उन्होंने बताया कि बुर्जी बिटौरे जलने से पशुओं का चारा भी जल गया और ईधन भी जल गया।
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