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सीने पर नृत्य के बाद की गई थी मासूम की बलि
Updated Sun, 14 Jan 2018 11:49 PM IST
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murder
- फोटो : amar ujala
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एटा। छह वर्षीय मासूम राजा की बलि से पहले तांत्रिक ने उसके सीने पर तांडव नृत्य किया था। इससे मासूम की मौत हो गई थी। कोतवाली नगर पुलिस ने तांत्रिक और पड़ोसी आरोपी को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया।
कोतवाली नगर क्षेत्र के शिवओमपुरी निवासी मासूम राजा उर्फ गुड्डू की बलि देने के लिए हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने तांत्रिक चंदन सिंह निवासी नगला बरी थाना सिढ़पुरा कासगंज और पड़ोसी धर्मवीर को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने बताया कि मासूम की बलि देने से पहले तांत्रिक धर्मवीर के घर तीन बार पहले जीव जंतुओं की बलि चढ़ा चुका था। इसके बाद भी धर्मवीर का बीमार बेटा शिवा ठीक नहीं हुआ। इसके बाद तांत्रिक ने बच्चे की बलि चढ़ाने की राय दी। इसके बाद धर्मवीर ने राजा का अपहरण किया और बलि देने के लिए उसकी हत्या कर दी गई।
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पुलिस धर्मवीर को नहीं छोड़ती तो नहीं होती घटना
बालक के लापता होने की शिकायत राजा के पिता ने 29 दिसंबर को कोतवाली नगर पुलिस को दर्ज कराई थी। इस पर पुलिस ने घटना के तीसरे दिन पुलिस ने आरोपी पड़ोसी धर्मवीर को हिरासत में लिया था। पुलिस आराम से कोतवाली नगर में उसे पांच दिन तक बैठाए रखी और इसके बाद निर्दोष बताकर छोड़ दिया।
बाद में बालक का शव मिलने के बाद पुलिस ने फिर से धर्मवीर को पकड़ा। लोगों का कहना है यदि पांच दिन थाने में रहे आरोपी से पुलिस कड़ाई से पूछताछ करती तो शायद मासूम की जान बच सकती थी। वही दूसरी ओर इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी कर रही है कि चिकित्सक शव मिलने के दो दिन पहले ही हत्या होने का दावा कर रहे है।
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कोतवाली नगर क्षेत्र के शिवओमपुरी निवासी मासूम राजा उर्फ गुड्डू की बलि देने के लिए हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने तांत्रिक चंदन सिंह निवासी नगला बरी थाना सिढ़पुरा कासगंज और पड़ोसी धर्मवीर को गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस ने बताया कि मासूम की बलि देने से पहले तांत्रिक धर्मवीर के घर तीन बार पहले जीव जंतुओं की बलि चढ़ा चुका था। इसके बाद भी धर्मवीर का बीमार बेटा शिवा ठीक नहीं हुआ। इसके बाद तांत्रिक ने बच्चे की बलि चढ़ाने की राय दी। इसके बाद धर्मवीर ने राजा का अपहरण किया और बलि देने के लिए उसकी हत्या कर दी गई।
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पुलिस धर्मवीर को नहीं छोड़ती तो नहीं होती घटना
बालक के लापता होने की शिकायत राजा के पिता ने 29 दिसंबर को कोतवाली नगर पुलिस को दर्ज कराई थी। इस पर पुलिस ने घटना के तीसरे दिन पुलिस ने आरोपी पड़ोसी धर्मवीर को हिरासत में लिया था। पुलिस आराम से कोतवाली नगर में उसे पांच दिन तक बैठाए रखी और इसके बाद निर्दोष बताकर छोड़ दिया।
बाद में बालक का शव मिलने के बाद पुलिस ने फिर से धर्मवीर को पकड़ा। लोगों का कहना है यदि पांच दिन थाने में रहे आरोपी से पुलिस कड़ाई से पूछताछ करती तो शायद मासूम की जान बच सकती थी। वही दूसरी ओर इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी कर रही है कि चिकित्सक शव मिलने के दो दिन पहले ही हत्या होने का दावा कर रहे है।