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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के लिए हुए बैनामों की जांच शुरू
Updated Thu, 27 Jul 2017 01:27 PM IST
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आगरा लखनऊ एकसप्रेस वे
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आगरा। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की आगरा में भी जांच शुरू हो गई है। शासन के निर्देश पर आगरा और फतेहाबाद तहसील अंतर्गत एक्सप्रेसवे के लिए हुए बैनामों की जांच की जा रही है। बैनामा करने वालों के बैंक स्टेटमेंट निकलवाए जा रहे हैं। सदर तहसील अंतर्गत 17 बैनामे हुए थे।
आगरा-लखनऊ के बीच बना 302 किमी लंबा एक्सप्रेसवे सपा सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है। इसके लिए फतेहाबाद तहसील अंतर्गत 24 गांवों और सदर के आठ गांवों में जमीन अधिग्रहित की गई थी। फतेहाबाद में 276.0208 हेक्टेयर और सदर तहसील अंतर्गत 95.7431 हेक्टेयर जमीन ली गई थी। इसके लिए 456.54 करोड़ रुपये शासन से उपलब्ध कराए गए थे, इसमें से 364.96 करोड़ रुपये वितरित कर दिए गए थे। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस एक्सप्रेसवे की लागत पर सवाल खड़े करते हुए इसकी जांच के आदेश दिए।
इस पर पूर्व में अपर जिलाधिकारी भूमि अध्याप्ति के माध्यम से शासन को उन लोगों की सूची भेजी जा चुकी है, जिन्होंने एक्सप्रेसवे बनने से एक साल पहले इसके आसपास जमीन खरीदी थी। इसके बाद शासन के आदेश पर ही लेखपालों से बैनामों की जांच कराई गई। इससे उच्च अधिकारी संतुष्ट नहीं थे।
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अब तक उपजिलाधिकारियों के माध्यम से एक्सप्रेसवे के लिए हुए बैनामों की जांच कराई जा रही है। बुधवार को एसडीएम सदर रजनीश मिश्रा ने जांच शुरू कर दी। पहले दिन बैनामों का रिकार्ड देखा गया। मगर, इसकी विस्तृत जांच बैनामा करने वालों के बैंक स्टेटमेंट निकलवाने के बाद ही शुरू होगी। एसडीएम के अनुसार, एक-दो दिन में वह जांच पूरी कर शासन को भेज देंगे।
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आगरा-लखनऊ के बीच बना 302 किमी लंबा एक्सप्रेसवे सपा सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है। इसके लिए फतेहाबाद तहसील अंतर्गत 24 गांवों और सदर के आठ गांवों में जमीन अधिग्रहित की गई थी। फतेहाबाद में 276.0208 हेक्टेयर और सदर तहसील अंतर्गत 95.7431 हेक्टेयर जमीन ली गई थी। इसके लिए 456.54 करोड़ रुपये शासन से उपलब्ध कराए गए थे, इसमें से 364.96 करोड़ रुपये वितरित कर दिए गए थे। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस एक्सप्रेसवे की लागत पर सवाल खड़े करते हुए इसकी जांच के आदेश दिए।
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इस पर पूर्व में अपर जिलाधिकारी भूमि अध्याप्ति के माध्यम से शासन को उन लोगों की सूची भेजी जा चुकी है, जिन्होंने एक्सप्रेसवे बनने से एक साल पहले इसके आसपास जमीन खरीदी थी। इसके बाद शासन के आदेश पर ही लेखपालों से बैनामों की जांच कराई गई। इससे उच्च अधिकारी संतुष्ट नहीं थे।
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अब तक उपजिलाधिकारियों के माध्यम से एक्सप्रेसवे के लिए हुए बैनामों की जांच कराई जा रही है। बुधवार को एसडीएम सदर रजनीश मिश्रा ने जांच शुरू कर दी। पहले दिन बैनामों का रिकार्ड देखा गया। मगर, इसकी विस्तृत जांच बैनामा करने वालों के बैंक स्टेटमेंट निकलवाने के बाद ही शुरू होगी। एसडीएम के अनुसार, एक-दो दिन में वह जांच पूरी कर शासन को भेज देंगे।