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जिले में इस बार भी नहीं मिला एक भी शिक्षक को सम्मान
Updated Thu, 06 Sep 2018 12:08 AM IST
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फिरोजाबाद। शिक्षक दिवस पर राज्य एवं राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए कई जिलों के शिक्षकों का सम्मान किया गया। मगर शिक्षाधिकारियों की उदासीनता के कारण जिले का कोई भी शिक्षक इस बार भी सम्मान नहीं पा सका है। सवाल है कि विभाग की नजरों में आखिर कोई शिक्षक सम्मान के काबिल नहीं है।
राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 17 शिक्षक चयनित हुए। मगर जिले में कोई शिक्षक सम्मान नहीं पा सका है। जबकि हकीकत में देखा जाए तो जिले के कई परिषदीय स्कूल ऐसे हैं, जो कि प्रदेश में नजीर बने हैं। बेसिक शिक्षा डायरेक्टर ने खुद ट्वीटर पर ट्वीट करके उनसे सीख लेने को कहा था।
मगर विभागीय अधिकारी शिक्षक को सम्मान को दिलाने के लिए न तो प्रयास करते हैं और न ही शिक्षकों को प्रोत्साहित करते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में 1976 के बाद किसी को किसी शिक्षक को राष्ट्रपति पुरस्कार और न ही राज्य पुरस्कार मिला है। कई बार शिक्षकों ने आवेदन किए है, मगर हस्ताक्षर करने पर टालते हैं। बीएसए अरविंद पाठक ने कहा कि कोई शिक्षक का आवेदन प्राप्त नहीं हुआ था। जिसे आगे भेजते।
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जिले के एक चर्चित शिक्षक ने राष्ट्रपति या राज्य शिक्षक पुरस्कार पाने के लिए अधिकारियों को गुमराह कर प्रमाण पत्र हासिल कर लिया। सांठगांठ करके सर्विस बुक पर भी चढ़वा लिया। शिक्षकों के पुराने कारनामों की शिकायत हुई तो अधिकारियों को सर्विस बुक में लिखना पडा कि इस प्रकार का कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ।
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राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों के 17 शिक्षक चयनित हुए। मगर जिले में कोई शिक्षक सम्मान नहीं पा सका है। जबकि हकीकत में देखा जाए तो जिले के कई परिषदीय स्कूल ऐसे हैं, जो कि प्रदेश में नजीर बने हैं। बेसिक शिक्षा डायरेक्टर ने खुद ट्वीटर पर ट्वीट करके उनसे सीख लेने को कहा था।
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मगर विभागीय अधिकारी शिक्षक को सम्मान को दिलाने के लिए न तो प्रयास करते हैं और न ही शिक्षकों को प्रोत्साहित करते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में 1976 के बाद किसी को किसी शिक्षक को राष्ट्रपति पुरस्कार और न ही राज्य पुरस्कार मिला है। कई बार शिक्षकों ने आवेदन किए है, मगर हस्ताक्षर करने पर टालते हैं। बीएसए अरविंद पाठक ने कहा कि कोई शिक्षक का आवेदन प्राप्त नहीं हुआ था। जिसे आगे भेजते।
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जिले के एक चर्चित शिक्षक ने राष्ट्रपति या राज्य शिक्षक पुरस्कार पाने के लिए अधिकारियों को गुमराह कर प्रमाण पत्र हासिल कर लिया। सांठगांठ करके सर्विस बुक पर भी चढ़वा लिया। शिक्षकों के पुराने कारनामों की शिकायत हुई तो अधिकारियों को सर्विस बुक में लिखना पडा कि इस प्रकार का कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ।