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जिला अस्पताल की बर्न यूनिट बनी कबाड़खाना
Updated Tue, 26 Jun 2018 10:48 PM IST
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मथुरा। महर्षि दयानंद जिला अस्पताल में बर्न यूनिट कबाड़खाना बन गई है। यूनिट के पर्सनल वार्ड में कबाड़ा भर दिया गया है। यहां उपचार का न कोई प्रबंध है, न स्टाफ की तैनाती। स्टाफ रूम पर ताला जड़ा है। 30 से 40 प्रतिशत जला होने पर मरीज को तत्काल आगरा रेफर कर दिया जाता है।
जिला अस्पताल में जले हुए मरीजों के उपचार के लिए कुछ साल पहले ही बर्न यूनिट का निर्माण किया गया था। इस यूनिट में कई वार्ड बनाए गए। इसमें अधिक गंभीर स्थिति वाले मरीजों को अलग भर्ती करने की भी व्यवस्था की गई। यहां तक कि स्टाफ के लिए भी अतिरिक्त कक्ष तैयार किया गया, लेकिन ये सभी व्यवस्थाएं सिर्फ भवन निर्माण तक ही सीमित होकर रह गईं।
आमतौर पर यहां 5 से 6 मरीज भर्ती रहते हैं, लेकिन इनके उपचार के लिए स्टाफ की कोई व्यवस्था नहीं है। स्टाफ रूम पर ताला लगा हुआ है। गंभीर मरीजों को यहां से रेफर करने में तत्पर रहते हैं। चिकित्सक यदाकदा ही आते हैं।
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एंबुलेंस मिली न स्ट्रेचर
बैरागपुरा में घर की छत से गिरे असगर को उपचार के लिए जिला अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल सकी। जिला अस्पताल पहुंचा तो यहां स्ट्रेचर नहीं मिला। ऐसे में घर से टेंपो द्वारा जिला अस्पताल पहुंचे असगर को यहां स्ट्रेचर नहीं मिला तो बेटा ही उसे गोदी में उठाकर चिकित्सक तक ले गया।
बर्न यूनिट में अलग से स्टाफ नहीं है। जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड का स्टाफ ही बर्न यूनिट में काम करता है। कई बार शासन को अतिरिक्त स्टाफ की डिमांड का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन कोई स्टाफ नहीं मिल सका है।
- डॉ. वीके गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल, मथुरा
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जिला अस्पताल में जले हुए मरीजों के उपचार के लिए कुछ साल पहले ही बर्न यूनिट का निर्माण किया गया था। इस यूनिट में कई वार्ड बनाए गए। इसमें अधिक गंभीर स्थिति वाले मरीजों को अलग भर्ती करने की भी व्यवस्था की गई। यहां तक कि स्टाफ के लिए भी अतिरिक्त कक्ष तैयार किया गया, लेकिन ये सभी व्यवस्थाएं सिर्फ भवन निर्माण तक ही सीमित होकर रह गईं।
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आमतौर पर यहां 5 से 6 मरीज भर्ती रहते हैं, लेकिन इनके उपचार के लिए स्टाफ की कोई व्यवस्था नहीं है। स्टाफ रूम पर ताला लगा हुआ है। गंभीर मरीजों को यहां से रेफर करने में तत्पर रहते हैं। चिकित्सक यदाकदा ही आते हैं।
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एंबुलेंस मिली न स्ट्रेचर
बैरागपुरा में घर की छत से गिरे असगर को उपचार के लिए जिला अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल सकी। जिला अस्पताल पहुंचा तो यहां स्ट्रेचर नहीं मिला। ऐसे में घर से टेंपो द्वारा जिला अस्पताल पहुंचे असगर को यहां स्ट्रेचर नहीं मिला तो बेटा ही उसे गोदी में उठाकर चिकित्सक तक ले गया।
बर्न यूनिट में अलग से स्टाफ नहीं है। जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड का स्टाफ ही बर्न यूनिट में काम करता है। कई बार शासन को अतिरिक्त स्टाफ की डिमांड का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन कोई स्टाफ नहीं मिल सका है।
- डॉ. वीके गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल, मथुरा