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तो टीटीजेड से बाहर हो जाएगी सुहागनगरी...
Updated Sun, 15 Apr 2018 11:28 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
फिरोजाबाद। सुहागनगरी को टीटीजेड से बाहर करने के लिए आगरा की नेशनल चेंबर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। मामले में एक मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट में ताजमहल की सुंदरता कायम रखने और पर्यावरणीय प्रदूषण को रोकने के लिए एमसी मेहता द्वारा वर्ष 1984 में दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है। इसी बीच आगरा के नेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने फिरोजाबाद को टीटीजेड से बाहर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में चेंबर ने कहा है कि नागपुर की संस्था नीरी की रिपोर्ट के अनुसार फिरोजाबाद की इकाइयों से ताजमहल को किसी प्रकार को कोई खतरा नहीं है।
यहां गैस से संचालित इकाइयों से होने वाला प्रदूषण ताजमहल तक नहीं पहुंचता है। चेंबर ने यह भी कहा कि फिरोजाबाद टीटीजेड में होने से यहां का विकास अवरुद्ध हो गया है। यहां नए उद्योग नहीं लग पा रहे हैं। इसके चलते रोजगार नहीं बढ़ पा रहा है। टीटीजेड रोक के कारण विभिन्न अदालतों में गैस के आवेदन लंबित हैं।
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नेशनल चेंबर ने फिरोजाबाद को टीटीजेड से बाहर करने की मांग की है। इसकी सुनवाई करते हुए उच्चतम अदालत ने सीईसी (सेंट्रल एमपावर्ड कमेटी) को अपनी रिपोर्ट देने के लिए एक माह का वक्त दिया है। रिपोर्ट के आधार पर ही न्यायालय फिरोजाबाद के लिए निर्णय लेगी।
मामले में उद्यमियों का कहना है कि यदि फिरोजाबाद टीटीजेड से अलग कर दिया जाता है तो यहां की इकाइयों को मिलने वाली सस्ती गैस का कोटा खत्म हो जाएगा। ऐसे में उद्योग चलाने के लिए गैस का अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर मूल्य लिया जाएगा। इससे यहां के लघु उद्योग (चूड़ी, ब्लोइंग, ग्लासवेयर, हस्त चलित इकाइयां) बंदी के कगार पर पहुंच जाएंगी। इससे कांच और चूड़ी उद्योग की स्थिति गंभीर हो जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट में ताजमहल की सुंदरता कायम रखने और पर्यावरणीय प्रदूषण को रोकने के लिए एमसी मेहता द्वारा वर्ष 1984 में दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है। इसी बीच आगरा के नेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने फिरोजाबाद को टीटीजेड से बाहर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में चेंबर ने कहा है कि नागपुर की संस्था नीरी की रिपोर्ट के अनुसार फिरोजाबाद की इकाइयों से ताजमहल को किसी प्रकार को कोई खतरा नहीं है।
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यहां गैस से संचालित इकाइयों से होने वाला प्रदूषण ताजमहल तक नहीं पहुंचता है। चेंबर ने यह भी कहा कि फिरोजाबाद टीटीजेड में होने से यहां का विकास अवरुद्ध हो गया है। यहां नए उद्योग नहीं लग पा रहे हैं। इसके चलते रोजगार नहीं बढ़ पा रहा है। टीटीजेड रोक के कारण विभिन्न अदालतों में गैस के आवेदन लंबित हैं।
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नेशनल चेंबर ने फिरोजाबाद को टीटीजेड से बाहर करने की मांग की है। इसकी सुनवाई करते हुए उच्चतम अदालत ने सीईसी (सेंट्रल एमपावर्ड कमेटी) को अपनी रिपोर्ट देने के लिए एक माह का वक्त दिया है। रिपोर्ट के आधार पर ही न्यायालय फिरोजाबाद के लिए निर्णय लेगी।
मामले में उद्यमियों का कहना है कि यदि फिरोजाबाद टीटीजेड से अलग कर दिया जाता है तो यहां की इकाइयों को मिलने वाली सस्ती गैस का कोटा खत्म हो जाएगा। ऐसे में उद्योग चलाने के लिए गैस का अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर मूल्य लिया जाएगा। इससे यहां के लघु उद्योग (चूड़ी, ब्लोइंग, ग्लासवेयर, हस्त चलित इकाइयां) बंदी के कगार पर पहुंच जाएंगी। इससे कांच और चूड़ी उद्योग की स्थिति गंभीर हो जाएगी।