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अब जारी किया अध्यादेश, जब फीस भर चुके अभिभावक
Updated Sun, 15 Apr 2018 11:18 PM IST
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private school fees
फिरोजाबाद। कान्वेंट और प्राइवेट स्कूलों में बेतहाशा फीस बढ़ोत्तरी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अध्यादेश जारी कर दिया है, लेकिन जिले में अफसर अब तक यह तय नहीं तय कर पाए कि अभिभावकों को राहत कैसे दिलाई जाए। अफसर अध्यादेश और नियम-निर्देशों में उलझे हैं, जबकि पहली अप्रैल से बढ़ी फीस और ड्रेस की रकम वसूलने वाले स्कूल मौज में हैं। प्रशासन और शिक्षा विभाग ने अपनी ओर निर्देश जारी करने के बजाय अध्यादेश ही कॉन्वेंट और निजी स्कूलों को थमा दिया है।
विद्यालयों में परीक्षाएं फरवरी और मार्च के मध्य खत्म हो गई थीं। एक अप्रैल से ज्यादातर स्कूलों ने नया शिक्षा सत्र शुरू कर दिया। उसी स्कूल के बच्चे को नई कक्षा में प्रवेश देने के लिए फिर से एडमिशन फीस जमा कराई गई। अभिभावक अध्यादेश का इंतजार करते रहे और स्कूलों ने अभिभावकों पर दबाव बनाकर अप्रैल, मई, जून की त्रैमासिक फीस वसूल कर ली। अभिभावक असमंजस में हैं कि जो फीस जमा हो चुकी है। प्रशासन और मंडलीय कमेटी उसका समायोजन कराएगी या रुपये स्कूल के खाते में जमा मान लिए जाएंगे।
माध्यमिक और बेसिक शिक्षा के विद्यालयों को शिक्षा विभाग ने अध्यादेश की इंटरनेट प्रति भेजी है। तर्क यह है कि इस सत्र में विद्यालयों ने फीस, ड्रेस, किताबें जिस भी मद में रुपये बढ़ाए हैं, उसका तुलनात्मक विवरण और फीस बढ़ाने के पीछे अपने तथ्य भी दें। इन तथ्यों का मंडलीय समिति या जिला स्तरीय कमेटी परीक्षण करेंगी। महंगाई की तुलना में फीस बढ़ी मिलने पर कार्रवाई होगी।
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फीस बढ़ोतरी पर अध्यादेश आया है। इसे विद्यालयों को समझने और किसी मद में बढ़ोतरी करने पर उसे तर्क के साथ प्रस्तुत करने के लिए भेजा है। कुछ स्कूलों में त्रैमासिक फीस बढ़ी हुई जमा कराने की सूचना है, लेकिन किसी अभिभावक की तरफ से शिकायत नहीं आई है। एक दो दिन में तथ्य और आदेश और साफ हो जाएंगे।
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विद्यालयों में परीक्षाएं फरवरी और मार्च के मध्य खत्म हो गई थीं। एक अप्रैल से ज्यादातर स्कूलों ने नया शिक्षा सत्र शुरू कर दिया। उसी स्कूल के बच्चे को नई कक्षा में प्रवेश देने के लिए फिर से एडमिशन फीस जमा कराई गई। अभिभावक अध्यादेश का इंतजार करते रहे और स्कूलों ने अभिभावकों पर दबाव बनाकर अप्रैल, मई, जून की त्रैमासिक फीस वसूल कर ली। अभिभावक असमंजस में हैं कि जो फीस जमा हो चुकी है। प्रशासन और मंडलीय कमेटी उसका समायोजन कराएगी या रुपये स्कूल के खाते में जमा मान लिए जाएंगे।
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माध्यमिक और बेसिक शिक्षा के विद्यालयों को शिक्षा विभाग ने अध्यादेश की इंटरनेट प्रति भेजी है। तर्क यह है कि इस सत्र में विद्यालयों ने फीस, ड्रेस, किताबें जिस भी मद में रुपये बढ़ाए हैं, उसका तुलनात्मक विवरण और फीस बढ़ाने के पीछे अपने तथ्य भी दें। इन तथ्यों का मंडलीय समिति या जिला स्तरीय कमेटी परीक्षण करेंगी। महंगाई की तुलना में फीस बढ़ी मिलने पर कार्रवाई होगी।
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फीस बढ़ोतरी पर अध्यादेश आया है। इसे विद्यालयों को समझने और किसी मद में बढ़ोतरी करने पर उसे तर्क के साथ प्रस्तुत करने के लिए भेजा है। कुछ स्कूलों में त्रैमासिक फीस बढ़ी हुई जमा कराने की सूचना है, लेकिन किसी अभिभावक की तरफ से शिकायत नहीं आई है। एक दो दिन में तथ्य और आदेश और साफ हो जाएंगे।