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ब्रज में विलुप्त हो रही मल्ल विद्या
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डेमो
- फोटो : डेमो
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मथुरा। ब्रज में पारंपरिक विधा के रूप में पहचान बनाने वाली मल्ल विद्या अब विलुप्त होती जा रही है। ब्रज में अब न अखाड़े रहे हैं और न ही पहलवान नजर आते हैं। मथुरा में यह विधा चंद स्थानों पर ही सिमट कर रह गई है। बदले परिवेश में मल्ल विद्या की जगह आधुनिक जिम ले रहे हैं।
पांच दशक पहले तक ब्रज के अखाड़ा संस्कृति का वैभव बहुत ऊंचाई पर था। यहां प्राकृतिक वातावरण के मध्य ये स्थल जगह जगह देखे जाते थे। ब्रज केसरी पहलवानों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। देवेंद्र पहलवान का कहना है अखाड़ों में युवा पहलवान अनुभवी बुजुर्गों से पहलवानी की बारीकी खुद सीखते थे।
बदलते परिवेश में पहलवानी के गुर सिखाने वाले भी अब कम ही बचे हैं। यहां से सीखे दांवपेंच और अनुभव लेकर पहलवान देशभर में नाम कमाया करते थे, लेकिन अब व्यायाम कमरों और जिम तक सिमटकर रह गया है। मल्ल विद्या के पारंपरिक केंद्र मथुरा का भूतेश्वर अखाड़ा, बंगालीघाट अखाड़ा, मालाधारी अखाड़ा अंतर्यामी अखाड़ा, यशोदानंदन मंदिर अखाड़े की आज जीवंत हैं।
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जिम सेंटर में बदले अखाड़े
आधुनिक परिवेश में मल्ल विद्या के प्राचीन और सांस्कृतिक रूप अखाड़ों का स्थान अब आधुनिक जिम ले रहीं हैं। यहां सुबह से शाम तक युवा आधुनिक तरीकों से शरीर को चुस्त दुरुस्त रखने का प्रयास कर रहे हैं।
बदल रहे मल्ल विद्या के मायने
मल्ल विद्या परंपरा पुस्तक के संपादक डॉ. राजेश शर्मा कहते हैं कि आज मल्ल विद्या के मायने बदले हैं। खुले आसमान के नीचे व्यायाम करने की अपेक्षा अब युवा कमरों में बनीं जिम में कसरत कर स्वस्थ शरीर का भविष्य देख रहे हैं।
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पांच दशक पहले तक ब्रज के अखाड़ा संस्कृति का वैभव बहुत ऊंचाई पर था। यहां प्राकृतिक वातावरण के मध्य ये स्थल जगह जगह देखे जाते थे। ब्रज केसरी पहलवानों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। देवेंद्र पहलवान का कहना है अखाड़ों में युवा पहलवान अनुभवी बुजुर्गों से पहलवानी की बारीकी खुद सीखते थे।
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बदलते परिवेश में पहलवानी के गुर सिखाने वाले भी अब कम ही बचे हैं। यहां से सीखे दांवपेंच और अनुभव लेकर पहलवान देशभर में नाम कमाया करते थे, लेकिन अब व्यायाम कमरों और जिम तक सिमटकर रह गया है। मल्ल विद्या के पारंपरिक केंद्र मथुरा का भूतेश्वर अखाड़ा, बंगालीघाट अखाड़ा, मालाधारी अखाड़ा अंतर्यामी अखाड़ा, यशोदानंदन मंदिर अखाड़े की आज जीवंत हैं।
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जिम सेंटर में बदले अखाड़े
आधुनिक परिवेश में मल्ल विद्या के प्राचीन और सांस्कृतिक रूप अखाड़ों का स्थान अब आधुनिक जिम ले रहीं हैं। यहां सुबह से शाम तक युवा आधुनिक तरीकों से शरीर को चुस्त दुरुस्त रखने का प्रयास कर रहे हैं।
बदल रहे मल्ल विद्या के मायने
मल्ल विद्या परंपरा पुस्तक के संपादक डॉ. राजेश शर्मा कहते हैं कि आज मल्ल विद्या के मायने बदले हैं। खुले आसमान के नीचे व्यायाम करने की अपेक्षा अब युवा कमरों में बनीं जिम में कसरत कर स्वस्थ शरीर का भविष्य देख रहे हैं।