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फर्जी शिक्षकों ने पुलिस की भी मुश्किलें बढ़ाईं
Updated Thu, 18 Oct 2018 11:08 PM IST
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teacher shimla
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कासगंज।
फर्जी शिक्षकों ने शिक्षा विभाग की ही नहीं बल्कि पुलिस की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भूमिगत हुए 16 शिक्षकों को न तो पुलिस गिरफ्तार कर सकी और न ही साक्ष्य जुटा पाई। शासन ने फर्जी शिक्षकों का ब्यौरा मांगा है। शिक्षा विभाग ने ब्यौरा संकलन के साथ ही पुलिस से प्रगति रिपोर्ट मांग ली है।
कासगंज में अब तक 33 शिक्षकों के फर्जीवाड़े के प्रमाणिकता हो चुकी है। इनमें से 17 शिक्षक वर्ष 2010 में जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस ने इस फर्जीवाड़े की जांच तो कर ली, लेकिन वर्ष 2010 एवं 2011 में फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पा चुके 16 शिक्षकों की जांच पूरी नहीं हो सकी। शिक्षकों के खिलाफ वर्ष 2016 में पटियाली कोतवाली में मामला दर्ज कराया गया था। इन शिक्षकों ने शैक्षिक दस्तावेजों के साथ साथ मूल पते के दस्तावेज भी फर्जी लगाए। फर्जी पते में सभी शिक्षक फर्रुखाबाद के थे। पुलिस की टीमें कई बार इनकी गिरफ्तारी को गईं, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। ऐसे में जांच भी अधर में लटकी रही। यह प्रकरण धीमे-धीमें ठंडे बस्ते में चला गया। अब जब शासन ने फर्जी शिक्षकों को ब्यौरा मांगा है तो शिक्षा विभाग ने पटियाली पुलिस से अब तक की प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
सिर्फ नोटिस तक सिमटी कार्रवाई
कासगंज। फर्जी शिक्षक प्रकरण में दो बाबू भी दोषी पाए गए थे। तत्कालीन डीएम के विजयेंद्र पांडियान ने एक बाबू को निलंबित कर दिया था जबकि पुलिस दोनों बाबुओं से पूछताछ कर रही थी। पुलिस ने इन बाबुओं को नोटिस दिए। यह कार्रवाई सिर्फ यहीं तक सिमट कर रह गई।
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- मेरी तैनाती के दौरान मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था। विवेचक से जानकारी करेंगे कि प्रकरण में क्या प्रगति हुई है। शिक्षा विभाग द्वारा जो भी जानकारी मांगी जाएगी उसका जवाब भेजा जाएगा- राजेश कुमार मीणा कोतवाली प्रभारी पटियाली।
- सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई। पटियाली में दो साल पहले शिक्षकों पर मुकदमा दर्ज हुआ। इसकी जानकारी की गई है। पुलिस की प्रगति रिपोर्ट भी शासन को भेज दी जाएगी- अंजली अग्रवाल, बीएसए।
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फर्जी शिक्षकों ने शिक्षा विभाग की ही नहीं बल्कि पुलिस की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भूमिगत हुए 16 शिक्षकों को न तो पुलिस गिरफ्तार कर सकी और न ही साक्ष्य जुटा पाई। शासन ने फर्जी शिक्षकों का ब्यौरा मांगा है। शिक्षा विभाग ने ब्यौरा संकलन के साथ ही पुलिस से प्रगति रिपोर्ट मांग ली है।
कासगंज में अब तक 33 शिक्षकों के फर्जीवाड़े के प्रमाणिकता हो चुकी है। इनमें से 17 शिक्षक वर्ष 2010 में जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस ने इस फर्जीवाड़े की जांच तो कर ली, लेकिन वर्ष 2010 एवं 2011 में फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पा चुके 16 शिक्षकों की जांच पूरी नहीं हो सकी। शिक्षकों के खिलाफ वर्ष 2016 में पटियाली कोतवाली में मामला दर्ज कराया गया था। इन शिक्षकों ने शैक्षिक दस्तावेजों के साथ साथ मूल पते के दस्तावेज भी फर्जी लगाए। फर्जी पते में सभी शिक्षक फर्रुखाबाद के थे। पुलिस की टीमें कई बार इनकी गिरफ्तारी को गईं, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। ऐसे में जांच भी अधर में लटकी रही। यह प्रकरण धीमे-धीमें ठंडे बस्ते में चला गया। अब जब शासन ने फर्जी शिक्षकों को ब्यौरा मांगा है तो शिक्षा विभाग ने पटियाली पुलिस से अब तक की प्रगति रिपोर्ट मांगी है।
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सिर्फ नोटिस तक सिमटी कार्रवाई
कासगंज। फर्जी शिक्षक प्रकरण में दो बाबू भी दोषी पाए गए थे। तत्कालीन डीएम के विजयेंद्र पांडियान ने एक बाबू को निलंबित कर दिया था जबकि पुलिस दोनों बाबुओं से पूछताछ कर रही थी। पुलिस ने इन बाबुओं को नोटिस दिए। यह कार्रवाई सिर्फ यहीं तक सिमट कर रह गई।
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- मेरी तैनाती के दौरान मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था। विवेचक से जानकारी करेंगे कि प्रकरण में क्या प्रगति हुई है। शिक्षा विभाग द्वारा जो भी जानकारी मांगी जाएगी उसका जवाब भेजा जाएगा- राजेश कुमार मीणा कोतवाली प्रभारी पटियाली।
- सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई। पटियाली में दो साल पहले शिक्षकों पर मुकदमा दर्ज हुआ। इसकी जानकारी की गई है। पुलिस की प्रगति रिपोर्ट भी शासन को भेज दी जाएगी- अंजली अग्रवाल, बीएसए।