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पर्यूषण पर्व: व्रत, नियम से करेंगे साधना
Updated Wed, 12 Sep 2018 10:39 PM IST
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पर्यूषण पर्व
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
एटा। धर्म का मर्म को समझने और अंगीकार करने का पर्व नजदीक आ रहा है। पर्यूषण पर्व के दिन निकट आने के साथ ही श्रावकों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। पर्व के दौरान उपवास और एकासन की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। उपवास रखने के लिए श्रावक-श्राविकाओं ने व्रत, नियम का चार्ट तैयार कर लिया है।
14 सितंबर से जैन समाज के पर्यूषण पर्व शुरू हो रहे हैं। इस दौरान जैन श्रावक-श्राविकाएं नियम और संयम का पालन करेंगे। एकासन द्वारा आत्मा को कसने का उपक्रम किया जाता है। विकास जैन शास्त्री बताते हैं कि पर्यूषण पर्व आत्मा के अनुसंधान का पर्व है। नियम, व्रत और उपवास से मन को दृढ़ बनाया जाता है। एकासन में श्रावक-श्राविकाएं एक स्थान पर बैठकर मौन पूर्वक भोजन करते हैं। आशीष जैन शास्त्री बताते हैं कि पर्यूषण पर्व के दौरान श्रावकों को नियम और संयम से रहना चाहिए। साथ ही आकुलता न हो इसके लिए शक्ति अनुसार उपवास करने चाहिए। पर्यूषण पर्व को लेकर श्रावक-श्राविकाओं में खासा उत्साह नजर आ रहा है। घरों में भी व्रत को लेकर साफ-सफाई का काम जोरों पर है। वहीं मंदिरों में साज-सज्जा अंतिम चरण में है।
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14 सितंबर से जैन समाज के पर्यूषण पर्व शुरू हो रहे हैं। इस दौरान जैन श्रावक-श्राविकाएं नियम और संयम का पालन करेंगे। एकासन द्वारा आत्मा को कसने का उपक्रम किया जाता है। विकास जैन शास्त्री बताते हैं कि पर्यूषण पर्व आत्मा के अनुसंधान का पर्व है। नियम, व्रत और उपवास से मन को दृढ़ बनाया जाता है। एकासन में श्रावक-श्राविकाएं एक स्थान पर बैठकर मौन पूर्वक भोजन करते हैं। आशीष जैन शास्त्री बताते हैं कि पर्यूषण पर्व के दौरान श्रावकों को नियम और संयम से रहना चाहिए। साथ ही आकुलता न हो इसके लिए शक्ति अनुसार उपवास करने चाहिए। पर्यूषण पर्व को लेकर श्रावक-श्राविकाओं में खासा उत्साह नजर आ रहा है। घरों में भी व्रत को लेकर साफ-सफाई का काम जोरों पर है। वहीं मंदिरों में साज-सज्जा अंतिम चरण में है।
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