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देर शाम छात्र का शव पहुंचा, तो बिलख पड़े परिवारीजन
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:17 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दन्नाहार(मैनपुरी)। रुड़की में आत्महत्या करने वाले मैनपुरी निवासी छात्र का शव रविवार देर शाम पैतृक गांव चौरासी पहुंचा। शव के गांव पहुंचने के साथ ही घर में व गांव की कोहराम मच गया। मृतक अमन के परिवारीजनों का रो-रोकर बुरा था। वहीं ग्रामीण भी होनहार अमन की असमय मृत्यु से दुखी नजर आ रहे थे। देर शाम को गमगीन माहौल में छात्र के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
कोतवाली क्षेत्र के गोपीनाथ अड्डा के समीप निवास कर रहे दिनेश चौहान मूलरूप से थाना दन्नाहार क्षेत्र चौरासी के रहने वाले हैं। उनका पुत्र अमन बेहद होनहार था। छात्र के चाचा संतोष ने बताया कि अमन सेंटमेरी का टापर छात्र रहा। इसके बाद उसने दिल्ली सेंट स्टीफन कालेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी।
उसका उपचार आगरा में डाक्टर गुरुनानी से चल रहा था। इस बीच उसने इंजीनियरिंग की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली थी। उधर, चिकित्सक ने सलाह दी थी कि अमन का एडमीशन न कराए जाए अगर कराएं तो उसे अकेला ना छोड़ा जाए। इसकी वजह उसकी मानसिक स्थिति बताई गई है।
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उहोंने बताया कि परिवारीजनों को अमन से काफी उम्मीदें थीं। शायद इसी वजह से उन्होने आईआईटी रुड़की में उसे प्रवेश दिलवा दिया। जिसका नतीजा उसकी आत्महत्या के रूप में सामने आया। लोगों के मुताबिक जब मानसिक स्थिति ठीक थी तो अमन वैज्ञानिक बनने की बात कहा करता था।
उसे पढाई के जुनून के आगे और किसी भी चीज से मतलब नहीं था। अमन की मौत के बाद घर में मातम छाया हुआ है। वहीं देर शाम छात्र का शव पैतृक गांव चौरासी पहुंचने के बाद कोहराम मच गया। परिवारीजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं होनहार छात्र की असमय मौत से ग्रामीण भी दुखी नजर आ रहे थे।
मृतक के घर में चीख पुकार के बीच महिलाएं व पुरुष परिवारीजनों को ढांढस बंधा रहे थे। शव के गांव पहुंचने के कुछ देर बाद गमगीन माहौल में छात्र के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। हादसे के बाद मृतक के घर पर शोक संवेदनाए व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है।
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कोतवाली क्षेत्र के गोपीनाथ अड्डा के समीप निवास कर रहे दिनेश चौहान मूलरूप से थाना दन्नाहार क्षेत्र चौरासी के रहने वाले हैं। उनका पुत्र अमन बेहद होनहार था। छात्र के चाचा संतोष ने बताया कि अमन सेंटमेरी का टापर छात्र रहा। इसके बाद उसने दिल्ली सेंट स्टीफन कालेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी।
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उसका उपचार आगरा में डाक्टर गुरुनानी से चल रहा था। इस बीच उसने इंजीनियरिंग की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली थी। उधर, चिकित्सक ने सलाह दी थी कि अमन का एडमीशन न कराए जाए अगर कराएं तो उसे अकेला ना छोड़ा जाए। इसकी वजह उसकी मानसिक स्थिति बताई गई है।
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उहोंने बताया कि परिवारीजनों को अमन से काफी उम्मीदें थीं। शायद इसी वजह से उन्होने आईआईटी रुड़की में उसे प्रवेश दिलवा दिया। जिसका नतीजा उसकी आत्महत्या के रूप में सामने आया। लोगों के मुताबिक जब मानसिक स्थिति ठीक थी तो अमन वैज्ञानिक बनने की बात कहा करता था।
उसे पढाई के जुनून के आगे और किसी भी चीज से मतलब नहीं था। अमन की मौत के बाद घर में मातम छाया हुआ है। वहीं देर शाम छात्र का शव पैतृक गांव चौरासी पहुंचने के बाद कोहराम मच गया। परिवारीजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं होनहार छात्र की असमय मौत से ग्रामीण भी दुखी नजर आ रहे थे।
मृतक के घर में चीख पुकार के बीच महिलाएं व पुरुष परिवारीजनों को ढांढस बंधा रहे थे। शव के गांव पहुंचने के कुछ देर बाद गमगीन माहौल में छात्र के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। हादसे के बाद मृतक के घर पर शोक संवेदनाए व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है।