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इस पांच साल की बेटी ने पिता को दी मुखाग्नि
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कासगंज में मासूम बच्ची इच्छा अपने पिता के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि देती
- फोटो : KASGANJ
बेटियों को अभिशाप समझने वालों के लिए इस मासूम इच्छा ने आइना दिखाया है। 5 साल की उम्र में ही उसने रूढ़िवादिता को पीछे छोड़ दिया। बीमारी से जूझते पिता की मौत के बाद इकलौती बेटी ने पिता के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी है। अंतिम संस्कार के दौरान यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
शहर के चित्रगुप्त कॉलोनी निवासी अमर सक्सेना पुत्र सुनील सक्सेना पिछले एक साल से बीमार थे। वे किडनी की समस्या से परेशान थे।
उनकी पत्नी भावना सक्सेना उनका इलाज करा रहीं थीं। इकलौती मासूम बेटी इच्छा अभी अधिक समझदार नहीं हैं। लंबी बीमारी के दौरान बरेली के एक निजी चिकित्सालय में अमर सक्सेना ने शनिवार को दम तोड़ दिया। अंतिम संस्कार के लिए अमर सक्सेना का पार्थिव शरीर सोरों के शमशान घाट ले जाया गया। यहां जब अंतेष्टी का नंबर आया तो मुखाग्नि के लिए पांच साल की बेटी इच्छा आगे आई क्योंकि अमर के कोई और संतान नहीं है। यहां बेटी अंतिम क्रियाओं के बारे में कुछ नहीं जानती थी। फिर जानकारों ने उसका सहयोग किया और जैसे जैसे बड़े उसे क्रियाओं के बारे में बताते गए वह वैसे वैसे क्रियाएं करती रही। यह दृश्य देखकर स्थल पर मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।
कंपकपाते हाथ और पिता के जाने की सिसकियां
मासूम इच्छा अपने पिता की मौत के बाद सिसक रही है। जब उसे मुखाग्नि के लिए आगे लाया और क्रियाएं कराई गईं तो उसके हाथ कंपकंपा रहे थे। सहारे के लिए एक बुजुर्ग बेटी का साथ दे रहे थे। इस दौरान बेटी सिसकने के साथ फफक भी पड़ी।
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शहर के चित्रगुप्त कॉलोनी निवासी अमर सक्सेना पुत्र सुनील सक्सेना पिछले एक साल से बीमार थे। वे किडनी की समस्या से परेशान थे।
उनकी पत्नी भावना सक्सेना उनका इलाज करा रहीं थीं। इकलौती मासूम बेटी इच्छा अभी अधिक समझदार नहीं हैं। लंबी बीमारी के दौरान बरेली के एक निजी चिकित्सालय में अमर सक्सेना ने शनिवार को दम तोड़ दिया। अंतिम संस्कार के लिए अमर सक्सेना का पार्थिव शरीर सोरों के शमशान घाट ले जाया गया। यहां जब अंतेष्टी का नंबर आया तो मुखाग्नि के लिए पांच साल की बेटी इच्छा आगे आई क्योंकि अमर के कोई और संतान नहीं है। यहां बेटी अंतिम क्रियाओं के बारे में कुछ नहीं जानती थी। फिर जानकारों ने उसका सहयोग किया और जैसे जैसे बड़े उसे क्रियाओं के बारे में बताते गए वह वैसे वैसे क्रियाएं करती रही। यह दृश्य देखकर स्थल पर मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।
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कंपकपाते हाथ और पिता के जाने की सिसकियां
मासूम इच्छा अपने पिता की मौत के बाद सिसक रही है। जब उसे मुखाग्नि के लिए आगे लाया और क्रियाएं कराई गईं तो उसके हाथ कंपकंपा रहे थे। सहारे के लिए एक बुजुर्ग बेटी का साथ दे रहे थे। इस दौरान बेटी सिसकने के साथ फफक भी पड़ी।
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