उम्मीद की मशाल: 45 किमी लंबी उटंगन नदी का होगा पुर्नउद्धार, आगरा के 50 गांवों के खेतों की बुझेगी प्यास
सीडीओ ने बताया कि नदी का सर्वे कार्य पूर्ण हो चुका है। बांध बनाने के लिए स्थान चिह्नित किए जा चुके हैं। नदी के पुर्नउद्धार कार्य में करीब 20 हजार मनरेगा श्रमिकों को रोजगार मिलेगा।
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अरावली की पहाड़ियों से निकल कर आगरा के पांच ब्लॉक में बहते हुए यमुना में गिरने वाली उटंगन नदी अब 50 गांवों में खेतों व पशुओं की प्यास बुझाएगी। आगरा सीमा में करीब 45 किमी लंबी नदी का पुर्नउद्धार होगा। 500-500 मीटर पर 110 मिट्टी के बांध बनाकर पानी रोका जाएगा। नदी का सर्वे पूरा हो चुका है। मई के पहले सप्ताह में 20 हजार से अधिक मनरेगा श्रमिकों को नदी की डिसिल्टिंग से रोजगार भी मिलेगा।
राजस्थान के करौली जिले से निकलने वाली उटंगन 288 किमी लंबी है। यह करीब 45 किमी आगरा में बहती है। साल के 10 महीने नदी सूखी रहती है। इसे बारहमासी नदी बनाने के लिए पिछले साल इसकी डिसिल्टिंग कराई गई थी। इस बार पानी रोकने के लिए बंधे बनाए जाएंगे।
मुख्य विकास अधिकारी ए मनिकन्डन ने बताया कि मिट्टी के 110 बंधे बना कर नदी में 500-500 मीटर दूरी पर पानी रोका जाएगा। इस पानी का उपयोग ग्रामीण खेतों की सिंचाई, पशुओं की पेयजल व अन्य उपयोग में कर सकेंगे। नदी में पूरा कार्य मनरेगा से होगा। करीब 20 हजार श्रमिकों को रोजगार मिलेगा।
50 गांव के श्रमिकों को मिलेगा रोजगार
सीडीओ ने बताया कि नदी का सर्वे कार्य पूर्ण हो चुका है। बांध बनाने के लिए स्थान चिह्नित किए जा चुके हैं। फतेहाबाद, शमसाबाद, पिनाहट, सैंया और खेरागढ़ के 50 गांवों श्रमिकों को रोजगार मिलेगा। प्रत्येक गांव में मजदूर सक्रिय श्रमिकों की सूची बन गई है। उन्होंने बताया कि इस कार्य को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज कराया जाएगा। उटंगन बरसाती नदी है। बंधे बनने के बाद इसमें 10 महीने तक पानी रहेगा।
खारी, करबन व यमुना का भी सर्वे
सीडीओ ए मनिकन्डन ने बताया कि उटंगन के अलावा खारी नदी, यमुना नदी और करबन नदी का सर्वे भी कराया जा रहा है। सर्वे के बाद इन नदियों की सफाई, जल भंडारण व अन्य कार्यों के लिए प्रस्ताव बनाए जाएंगे। उटंगन की तर्ज पर ही खारी नदी में शमसाबाद एवं सैंया क्षेत्र में सात मिट्टी के बांध प्रस्तावित हैं। सभी कार्य मई के पहले सप्ताह में शुरू हो जाएंगे।
बरसात से पहले होंगे ये काम
- जगनेर में 31 पेरीफेरल बंधों का निर्माण होगा
- पंचायतों में वर्षा जल संचयन के लिए 481 ट्रेंच बनेंगे
- 602 छोटी-बड़ी माइनर की सिल्ट सफाई होगी
- 952 सोक व रिचार्ज पिट का निर्माण प्रस्तावित