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वसूली नहीं संगठन को लिया जाता है चंदा: ठा. भानु प्रताप सिंह
Updated Sat, 10 Nov 2018 10:13 PM IST
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वसूली नहीं संगठन को लिया जाता है चंदा: ठा. भानु प्रताप सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। भारतीय किसान यूनियन भानु किसानों का संगठन है। इसमें अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। वहीं धन वसूली को लेकर राहुल गुप्ता की ओर से सुनाई गई ऑडियो को भी झूठा बताते हुए कहा कि संगठन में चंदा जरूर लिया जाता है। किसी से वसूली नहीं की जाती है। यह बात भाकियू भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठा. भानु प्रताप सिंह ने कही।
शनिवार को ठंडी सड़क स्थित काली मंदिर पर पत्रकारों से वार्ता करते ठा. भानु प्रताप सिंह ने एक सवाल के जवाब में कबूल किया कि वह संगठन के लिए चंदा लेते है। किसी से वसूली नहीं करते हैं। साथ ही उन्होंने संगठन से निष्कासित किए गए वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गुप्ता के आरोपों को खारिज कर दिया। राहुल गुप्ता पर आरोप लगाया है कि वह पदों की बिक्री करने के साथ साथ धन वसूली और संगठन को भ्रष्टाचार के दलदल में धकेलने का काम कर रहे थे। इसलिए उन्हें पद से निष्कासित किया गया है। उन्होंने कहा कि संगठन का 40 साल पुराना पंजीकरण है। उन्होंने किसान हित की बात कहते हुए कहा कि वह किसानों की दुर्घटना में मौत होने पर दुर्घटना बीमा की मांग सरकार से कर रहे हैं। साथ ही किसान आयोग का गठन करने पर जोर दे रहे हैं। इस दौरान संतोष यादव प्रधान, विशनपाल सिंह चौहान, रामवीर यादव, प्रदीप उपाध्याय, बसंत पतझड़ आदि मौजूद रहे।
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शनिवार को ठंडी सड़क स्थित काली मंदिर पर पत्रकारों से वार्ता करते ठा. भानु प्रताप सिंह ने एक सवाल के जवाब में कबूल किया कि वह संगठन के लिए चंदा लेते है। किसी से वसूली नहीं करते हैं। साथ ही उन्होंने संगठन से निष्कासित किए गए वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गुप्ता के आरोपों को खारिज कर दिया। राहुल गुप्ता पर आरोप लगाया है कि वह पदों की बिक्री करने के साथ साथ धन वसूली और संगठन को भ्रष्टाचार के दलदल में धकेलने का काम कर रहे थे। इसलिए उन्हें पद से निष्कासित किया गया है। उन्होंने कहा कि संगठन का 40 साल पुराना पंजीकरण है। उन्होंने किसान हित की बात कहते हुए कहा कि वह किसानों की दुर्घटना में मौत होने पर दुर्घटना बीमा की मांग सरकार से कर रहे हैं। साथ ही किसान आयोग का गठन करने पर जोर दे रहे हैं। इस दौरान संतोष यादव प्रधान, विशनपाल सिंह चौहान, रामवीर यादव, प्रदीप उपाध्याय, बसंत पतझड़ आदि मौजूद रहे।
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