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आगरा: जूता बनाने वाली 35 फैक्टरियां हो गईं बंद, मानक बदलने के कारण एमएसएमई इकाइयों से सरकारी विभाग नहीं कर रहे खरीद
Thu, 23 Sep 2021 01:45 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 23 Sep 2021 01:45 PM IST
सार
बूट मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील गुप्ता ने बताया कि चार साल पहले तक डायरेक्टर जनरल सप्लाइज एंड डिस्पोजल से टेंडर निकलते थे। बाद में मशीनरी के मानक बदलने से ताजनगरी की इकाइयां टेंडर से बाहर होने लगी, जबकि एफडीडीआई ने उन मानकों से क्वालिटी में कोई अंतर नहीं बताया।
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आगरा: बूट मैन्युफैक्चर्र संस्था के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रक्षा मंत्रालय, सैन्य बलों द्वारा जूता खरीद में मशीनरी और टर्न ओवर से जुड़े मानक बदलने के बाद से आगरा की 35 जूता फैक्टरियां बंद हो चुकी हैं। इससे पांच हजार से ज्यादा कारीगर बेरोजगार हो चुके हैं। वहीं दिल्ली की बड़ी औद्योगिक इकाइयां इन मानकों के मुताबिक टेंडर हासिल कर रही हैं। बूट मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन इस मामले में रक्षा मंत्री और एमएसएमई मंत्री से मिलकर मानकों को एमएसएमई इकाईयों के मुताबिक करने की मांग करने जाएंगी।
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देश के सैनिकों, पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों के लिए कभी 80 फीसदी जूते आगरा में बनते थे। अब मानक बदलने के कारण छोटी इकाइयां टेंडर में हिस्सा नहीं ले पा रही है। इस कारण आगरा में जूता बनाने की 45 में से 35 इकाइयों पर ताले लटक गए हैं। बूट मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के सचिव अनिल महाजन ने बताया कि सरकारी रक्षा विभागों ने मानकों में बदलाव कर बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाया है। इस वजह से 2017 तक जिन कंपनियों का टर्नओवर 18 से 20 करोड़ तक था, वह अब 2 करोड़ भी नहीं कर पा रहीं है। कानपुर में 22 में से 18 फैक्टरियां बंद हो चुकी हैं और कोलकाता की फैक्टरियां भी इसी दुर्दशा से जूझ रही हैं।
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200 रुपये का जूता 630 में खरीद रही सरकार
बूट मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील गुप्ता ने बताया कि चार साल पहले तक डायरेक्टर जनरल सप्लाइज एंड डिस्पोजल से टेंडर निकलते थे। बाद में मशीनरी के मानक बदलने से ताजनगरी की इकाइयां टेंडर से बाहर होने लगी, जबकि एफडीडीआई ने उन मानकों से क्वालिटी में कोई अंतर नहीं बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि एनसीसी के जूते जेम पोर्टल पर 200 रुपये में सप्लाई किए गए, जबकि सरकार ने उसे 630 रुपये में खरीदा। हम कम रेट पर अच्छा उत्पाद दे सकते हैं। डीजीओएस ने एक ही पार्टी को 197000 जोड़ों का आर्डर दिया। यह आर्डर 11 माह में सप्लाई करना था, लेकिन चार साल में भी सप्लाई नहीं हो सका। आगरा में यही बूट 550-600 रुपए में बन रहा है।
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15 दिन में फटे गए थे परिषदीय विद्यार्थियों के जूते
रौनक गुप्ता और राहुल महाजन ने बताया कि 2018 में सरकार की गलत नीतियों के कारण परिषदीय स्कूलों के बच्चों के जूते और बैग 15 दिन में ही फट गए थे। यही वजह है कि इस साल सरकार ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों को जूते देने के बजाय उनके अभिभावकों के खातों में पैसे भेजने का मन बनाया है।
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