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देश सेवा के जुनून में छोड़ दी इंजीनियर की नौकरी
Updated Thu, 14 Jun 2018 11:22 PM IST
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देश सेवा के जुनून में छोड़ दी इंजीनियर की नौकरी
- फोटो : अमर उजाला
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एटा। मन में बचपन से देेेश सेवा का जज्बा था। भविष्य को संवारने की राह में जब रजनीश के कदम बढ़े तो वह इंजीनियर बना। मगर देश की रक्षा का जुनून बरकरार रहा। वो वर्ष 2012 था, जब रजनीश का देश की रक्षा का सपना पूरा हुआ। इंजीनियर की नौकरी को ठुकरा कर कदम बार्डर की ओर बढ़ा दिए। नौकरी पाने के बाद देश की रक्षा में शहादत देकर सैनिक परिवार के साथ जिले का नाम रोशन कर गया।
कहा जाता है कि देश रक्षा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है। शहीद रजनीश ने अपने इस धर्म का बखूबी निभाया। मगर अपने पीछे वह एक कहानी छोड़ गया। कहानी इंजीनियर से देश सेवक बनने और युवाओं के लिए मिसाल बनने की। परिजन बताते हैं कि शहीद जवान को बचपन से ही देश भक्ति गीत सुनना काफी पसंद था। इसे लेकर वह देश की रक्षा करने के लिए वह हमेशा प्रयासरत रहते थे। परिजनों ने बताया कि बीटेक की डिग्री प्राप्त करने के बाद शहीद का सबसे पहला चयन पुलिस विभाग में एसआई के पद पर हुआ था। इसमें शहीद ने ज्वाइनिंग नहीं की। इसके बाद शहीद की दूसरी नौकरी केमिकल इंजीनियर के पद पर लगी थी। जिसे कुछ समय करने के बाद शहीद ने छोड़ दिया। वर्ष 2012 में बीएसएफ में भर्तियां हुई तो मन में पल रहे देश सेवा के अरमान को मानों पंख लग गए। जवान ने बीएसएफ में एसआई के पद पर नियुक्ति पाई और बार्डर पर बंदूक लिए जुट गया वतन की रक्षा में। गुरुवार को जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो लोगों की जुुबां पर उसकी कामयाबी की दास्तां तैरने लगी। लोग जवान की सराहना करते नजर आए। साथ ही वे अपने बच्चों को भी शहीद की तरह से ही देश सेवा में भेजने की बात कहते दिखे।
माटी के लालों ने कायम की मिसाल
गांव सादियापुर की माटी के लाल देश सेवा में जज्बा दिखाते रहे हैं। वर्ष 2010 से लेकर 2013 तक गांव के चार लाल सेना में नौकरी पा चुके हैं। गांव के युवाओं ने पहली बार देश सेवा की ओर कदम बढ़ा कर नई मिसाल कायम की। युवाओं की पहल और शहीद की शहादत पर हर कोई गर्व कर रहा है।
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कहा जाता है कि देश रक्षा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है। शहीद रजनीश ने अपने इस धर्म का बखूबी निभाया। मगर अपने पीछे वह एक कहानी छोड़ गया। कहानी इंजीनियर से देश सेवक बनने और युवाओं के लिए मिसाल बनने की। परिजन बताते हैं कि शहीद जवान को बचपन से ही देश भक्ति गीत सुनना काफी पसंद था। इसे लेकर वह देश की रक्षा करने के लिए वह हमेशा प्रयासरत रहते थे। परिजनों ने बताया कि बीटेक की डिग्री प्राप्त करने के बाद शहीद का सबसे पहला चयन पुलिस विभाग में एसआई के पद पर हुआ था। इसमें शहीद ने ज्वाइनिंग नहीं की। इसके बाद शहीद की दूसरी नौकरी केमिकल इंजीनियर के पद पर लगी थी। जिसे कुछ समय करने के बाद शहीद ने छोड़ दिया। वर्ष 2012 में बीएसएफ में भर्तियां हुई तो मन में पल रहे देश सेवा के अरमान को मानों पंख लग गए। जवान ने बीएसएफ में एसआई के पद पर नियुक्ति पाई और बार्डर पर बंदूक लिए जुट गया वतन की रक्षा में। गुरुवार को जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो लोगों की जुुबां पर उसकी कामयाबी की दास्तां तैरने लगी। लोग जवान की सराहना करते नजर आए। साथ ही वे अपने बच्चों को भी शहीद की तरह से ही देश सेवा में भेजने की बात कहते दिखे।
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माटी के लालों ने कायम की मिसाल
गांव सादियापुर की माटी के लाल देश सेवा में जज्बा दिखाते रहे हैं। वर्ष 2010 से लेकर 2013 तक गांव के चार लाल सेना में नौकरी पा चुके हैं। गांव के युवाओं ने पहली बार देश सेवा की ओर कदम बढ़ा कर नई मिसाल कायम की। युवाओं की पहल और शहीद की शहादत पर हर कोई गर्व कर रहा है।
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