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‘सीड टू मार्केट’ प्लान किसानों को दिलाएगा दोगुना मुनाफा
Updated Wed, 05 Jul 2017 11:50 PM IST
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मथुरा। देश के कृषि विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले कृषि विश्वविद्यालय संघ ने सरकार को किसानों की आय दोगुना करने का फार्मूला सुझाया है। ‘सीड टू मार्केट’ नामक इस प्लान में कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि से जुडे़ सभी सरकारी और प्राइवेट एजेंसियों के बीच तालमेल की आवश्यकता जताई है।
बुधवार को मथुरा स्थित वेटरनेरी विश्वविद्यालय में आयोजित कृषि विश्वविद्यालय संघ की बैठक में देश के चार कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अफसरों सहित देश के कई कृषि वैज्ञानिकों ने प्रतिभाग किया।
इसमें संघ के अध्यक्ष और आसाम कृषि विवि. के कुलपति डा. केएम बजरबारूआह ने ‘सीड टू मार्केट’ प्लान के तहत कहा कि किसान उत्पादन तो बेहतर कर रहा है, लेकिन उसे बाजार नहीं मिल पा रहा है। मथुरा के आलू का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में आलू किसान को फेंकना पड़ रहा है, जबकि आसाम में आलूू की कीमत 25 रुपये प्रति किलो है। सरकार को इसी व्यवस्था पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने खेती के वैज्ञानिक तरीकों की चर्चा करते हुए पशुपालन को किसानों के लिए उपयोगी बताया।
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बैठक में जबलपुर कृषि विवि. के कुलपति डा. वीएस तोमर, जूनागढ़ कृषि विवि. के कुलपति डा. एआर पाठक, आनंद कृषि विवि. के कुलपति डा. एनसी पटेल, आईसीईएआर के उपमहा निदेशक (शिक्षा) डा. एनएस राठौर और संघ के सचिव डा. आरपी सिंह ने देश के कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा जलवायु आधारित खेती, फल, बागवानी व विवि. द्वारा चलाए जा रहे पाठ्यक्रम, नए बीज और नई तकनीक के बारे में चर्चा हुई। बैठक में वेटरनेरी विवि के कुलपति प्रो. केएमएल पाठक भी मौजूद रहे।
हो रहा ‘फारमर्स प्रोड्यूजर्स आर्गेनाइजेशन’ का गठन
किसानों की फसल का वाजिब मूल्य दिलाने को ‘फारमर्स प्रोड्यूजर्स आर्गेनाइजेशन’ का गठन किया जा रहा है। इसका हर पांच साल बाद रिव्यू होगा, जो खेती, फसल के बाजार पर नजर रखेगा। यह किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाएगा। सभी प्रदेश सरकारों के सचिवों को इसकी रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
डा. केएम बजरबारूआह
ये है सीड टू मार्केट प्लान
इसमें किसानों की आय दोगुना करने के लिए खेत में बीज डालने से लेकर उसे मार्केट तक पहुंचाने की प्रक्रिया को शामिल किया गया है। इसमें कृषि से जुड़ी सभी एजेंसियों के बीच तालमेल बना कर किसान की फसल को उचित मूल्य दिलाने की कोशिश होगी। इसमें भंडारण से देश के एक स्थान से दूसरे स्थान तक फसल को ले जाने का प्रबंध भी शामिल है। उदाहरण के तौर पर मथुरा-आगरा का आलू जिसे किसान यहां कम कीमत के कारण फेंकने को मजबूर हैं। उसका भंडारण कर वर्तमान में ऐसे स्थानों में भेजा जा सकता है जहां आलू की कीमत अधिक है। सीड टू मार्केट प्लान में कुछ ऐसे ही सुझाव शामिल किए गए हैं।
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बुधवार को मथुरा स्थित वेटरनेरी विश्वविद्यालय में आयोजित कृषि विश्वविद्यालय संघ की बैठक में देश के चार कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अफसरों सहित देश के कई कृषि वैज्ञानिकों ने प्रतिभाग किया।
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इसमें संघ के अध्यक्ष और आसाम कृषि विवि. के कुलपति डा. केएम बजरबारूआह ने ‘सीड टू मार्केट’ प्लान के तहत कहा कि किसान उत्पादन तो बेहतर कर रहा है, लेकिन उसे बाजार नहीं मिल पा रहा है। मथुरा के आलू का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में आलू किसान को फेंकना पड़ रहा है, जबकि आसाम में आलूू की कीमत 25 रुपये प्रति किलो है। सरकार को इसी व्यवस्था पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने खेती के वैज्ञानिक तरीकों की चर्चा करते हुए पशुपालन को किसानों के लिए उपयोगी बताया।
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बैठक में जबलपुर कृषि विवि. के कुलपति डा. वीएस तोमर, जूनागढ़ कृषि विवि. के कुलपति डा. एआर पाठक, आनंद कृषि विवि. के कुलपति डा. एनसी पटेल, आईसीईएआर के उपमहा निदेशक (शिक्षा) डा. एनएस राठौर और संघ के सचिव डा. आरपी सिंह ने देश के कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा जलवायु आधारित खेती, फल, बागवानी व विवि. द्वारा चलाए जा रहे पाठ्यक्रम, नए बीज और नई तकनीक के बारे में चर्चा हुई। बैठक में वेटरनेरी विवि के कुलपति प्रो. केएमएल पाठक भी मौजूद रहे।
हो रहा ‘फारमर्स प्रोड्यूजर्स आर्गेनाइजेशन’ का गठन
किसानों की फसल का वाजिब मूल्य दिलाने को ‘फारमर्स प्रोड्यूजर्स आर्गेनाइजेशन’ का गठन किया जा रहा है। इसका हर पांच साल बाद रिव्यू होगा, जो खेती, फसल के बाजार पर नजर रखेगा। यह किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाएगा। सभी प्रदेश सरकारों के सचिवों को इसकी रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
डा. केएम बजरबारूआह
ये है सीड टू मार्केट प्लान
इसमें किसानों की आय दोगुना करने के लिए खेत में बीज डालने से लेकर उसे मार्केट तक पहुंचाने की प्रक्रिया को शामिल किया गया है। इसमें कृषि से जुड़ी सभी एजेंसियों के बीच तालमेल बना कर किसान की फसल को उचित मूल्य दिलाने की कोशिश होगी। इसमें भंडारण से देश के एक स्थान से दूसरे स्थान तक फसल को ले जाने का प्रबंध भी शामिल है। उदाहरण के तौर पर मथुरा-आगरा का आलू जिसे किसान यहां कम कीमत के कारण फेंकने को मजबूर हैं। उसका भंडारण कर वर्तमान में ऐसे स्थानों में भेजा जा सकता है जहां आलू की कीमत अधिक है। सीड टू मार्केट प्लान में कुछ ऐसे ही सुझाव शामिल किए गए हैं।