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Health: क्या है सेरेब्रल पाल्सी? जन्म के बाद न रोने वाले 25 फीसदी बच्चे हो जाते हैं शिकार

Mon, 06 Oct 2025 07:55 AM IST
आगरा ब्यूरो अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: आगरा ब्यूरो Updated Mon, 06 Oct 2025 07:55 AM IST
सार

जन्म के बाद न रोने वाले करीब 25 फीसदी नवजात शिशु सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हो सकते हैं, जिससे उनका चलना-बोलना और मानसिक-शारीरिक विकास प्रभावित होता है। परिजन ऐसे बच्चों को बोझ न मानकर फिजियोथेरेपी और विशेषज्ञ परामर्श पर जोर देने की अपील की है।

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25% of babies who don't cry at birth are at risk of cerebral palsy
नवजात शिशु (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : freepik.com

विस्तार

जन्म के बाद न रोने वाले करीब 25 फीसदी नवजात शिशु सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हो सकते हैं, जिससे उनका चलना-बोलना और मानसिक-शारीरिक विकास प्रभावित होता है। परिजन ऐसे बच्चों को बोझ न मानकर फिजियोथेरेपी और विशेषज्ञ परामर्श पर जोर देने की अपील की है।
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सामान्य रूप से चलना-बोलना नहीं, मां-पिता को देख कोई हावभाव नहीं। ऐसे बच्चे सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित होते हैं। इससे इनका मानसिक-शारीरिक विकास प्रभावित होता है। चिकित्सक बताते हैं जन्म लेेने के बाद न रोने वाले नवजात में सेरेब्रल पाल्सी का खतरा सबसे ज्यादा है। चिकित्सक ऐसे बच्चों को बोझ न समझने के बजाय अतिरिक्त देखभाल की सलाह दे रहे हैं।
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इंडियन पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि जन्म लेने के बाद न रोने वाले 25 फीसदी नवजात इस बीमारी से पीड़ित हैं। ये चलने, फिरने, बोलने, खड़े होने की दिक्कत होती है। मां-पिता समेत अन्य को देखकर चेहरे पर किसी तरह के भाव नहीं आते हैं। इसमें शिशुओं के ठीक होने की संभावना नहीं होती। कई में मानसिक सेहत ठीक मिलती है।
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पूर्व अध्यक्ष डॉ. अरुण जैन ने बताया कि दिमाग कार्य नहीं करता है। इसमें शिशुओं के हाथ-पैर ढीले या अकड़न हो सकती है। गर्दन सीधे नहीं कर पाते हैं। कई बार दिमागी बुखार के कारण भी ये दिक्कत बन सकती है। परिजनों से अपील है कि निराश होने के बजाय मानसिक रोग, बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर फिजियोथेरेपी पर अधिक जोर दें। इससे बच्चों के दैनिक कार्य करने में सहायक बनती है।
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