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प्रधान और सचिव हजम कर गए शौचालयों की धनराशि
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एटा। जिले में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में एक और नया खेल सामने आ गया है। प्रधान और सचिव ने शौचालयों के निर्माण के लिए आई धनराशि का गबन कर लिया। ग्राम निधि खाता छह में आई राशि को निकाल कर बंदरबांट किया गया और अभिलेखों में शौचालयों का निर्माण दिखा दिया गया। मामले की जांच की गई, तो हकीकत सामने आ गई। अब सीडीओ को कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट सौंपी गई है।
दरअसल, जिले में शौचालय निर्माण में लगातार खेल हो रहा है। पहले भी जिले में प्रधान और सचिवों ने जमकर धनराशि का बंदरबांट किया है। ताजा मामला जैथरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत मेंदुपुरा और कस्तूरपुरा का है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने कस्तूरपुरा में 34 और मेंदुपुरा में 12 शौचालयों के निर्माण का पैसा निकाल लिया। जबकि अभिलेखों में शौचालयों का निर्माण पूरा दिखा दिया। मामले की शिकायत ग्रामीणों ने एआर कोआपरेटिव और बीडीओ जैथरा दीपक कुमार से की।
उन्होंने संज्ञान लेते हुए दोनों ग्राम पंचायतों में जांच की। जांच में सामने आया कि मौके पर शौचालय बने ही नहीं थे। साथ ही जिन लाभार्थियों के शौचालयों का निर्माण दिखाया गया था, उनसे बात की गई तो उन्होंने भी शौचालयों का लाभ मिलने से इंकार कर दिया। जांच में सामने आया कि ग्राम निधि खाते से 10 हजार रुपये प्रति शौचालय की दर से धनराशि निकाली गई थी। बीडीओ जैथरा दीपक कुमार ने मामले की जांच रिपोर्ट सीडीओ उग्रसेन पांडेय को सौंप दी है। जांच के बाद ग्राम पंचायतों में हड़कंप मचा हुआ है।
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लगातार खुल रही पोल
जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए शौचालयों के निर्माण में गोलमाल की लगातार पोल खुल रही है। पहले जैथरा ब्लॉक के निजामाबाद ग्राम पंचायत में प्रधान और सचिव द्वारा गबन किया गया था। इसके बाद जलेसर की पिलखतरा, शीतलपुर की छितौनी और ककरावली समेत तमाम ग्राम पंचायतों में खुलासे हुए हैं।
कई ग्राम पंचायतों में होंगे खुलासे
जिले के सकीट ब्लॉक में भी कई ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण के नाम पर खेल किया गया है। प्रशासन अगर ठीक से जांच कराए, तो बड़े खुलासे होंगे। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि डीएम ने सकीट ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों की गोपनीय जांच शुरू करा दी है।
अटक जाती है कार्रवाई
जिले में पहले भी हुए खुलासों में कार्रवाईयां जांच की आंच में दफन हो जाती हैं। प्रधान और सचिव को नोटिस देकर जवाब मांग लिया जाता है और कार्रवाई शून्य रहती है। अगर मामला बढ़ जाता है, तो निलंबित कर दिया जाता है, लेकिन वक्त बीतने के बाद बहाली कर दी जाती है।
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दरअसल, जिले में शौचालय निर्माण में लगातार खेल हो रहा है। पहले भी जिले में प्रधान और सचिवों ने जमकर धनराशि का बंदरबांट किया है। ताजा मामला जैथरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत मेंदुपुरा और कस्तूरपुरा का है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने कस्तूरपुरा में 34 और मेंदुपुरा में 12 शौचालयों के निर्माण का पैसा निकाल लिया। जबकि अभिलेखों में शौचालयों का निर्माण पूरा दिखा दिया। मामले की शिकायत ग्रामीणों ने एआर कोआपरेटिव और बीडीओ जैथरा दीपक कुमार से की।
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उन्होंने संज्ञान लेते हुए दोनों ग्राम पंचायतों में जांच की। जांच में सामने आया कि मौके पर शौचालय बने ही नहीं थे। साथ ही जिन लाभार्थियों के शौचालयों का निर्माण दिखाया गया था, उनसे बात की गई तो उन्होंने भी शौचालयों का लाभ मिलने से इंकार कर दिया। जांच में सामने आया कि ग्राम निधि खाते से 10 हजार रुपये प्रति शौचालय की दर से धनराशि निकाली गई थी। बीडीओ जैथरा दीपक कुमार ने मामले की जांच रिपोर्ट सीडीओ उग्रसेन पांडेय को सौंप दी है। जांच के बाद ग्राम पंचायतों में हड़कंप मचा हुआ है।
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लगातार खुल रही पोल
जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए शौचालयों के निर्माण में गोलमाल की लगातार पोल खुल रही है। पहले जैथरा ब्लॉक के निजामाबाद ग्राम पंचायत में प्रधान और सचिव द्वारा गबन किया गया था। इसके बाद जलेसर की पिलखतरा, शीतलपुर की छितौनी और ककरावली समेत तमाम ग्राम पंचायतों में खुलासे हुए हैं।
कई ग्राम पंचायतों में होंगे खुलासे
जिले के सकीट ब्लॉक में भी कई ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण के नाम पर खेल किया गया है। प्रशासन अगर ठीक से जांच कराए, तो बड़े खुलासे होंगे। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि डीएम ने सकीट ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों की गोपनीय जांच शुरू करा दी है।
अटक जाती है कार्रवाई
जिले में पहले भी हुए खुलासों में कार्रवाईयां जांच की आंच में दफन हो जाती हैं। प्रधान और सचिव को नोटिस देकर जवाब मांग लिया जाता है और कार्रवाई शून्य रहती है। अगर मामला बढ़ जाता है, तो निलंबित कर दिया जाता है, लेकिन वक्त बीतने के बाद बहाली कर दी जाती है।