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मंदिर-मस्जिद का स्थायी निर्माण करना चाहते हैं लोग
Updated Mon, 21 May 2018 11:23 PM IST
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मंदिर-मस्जिद का स्थायी निर्माण करना चाहते हैं लोग
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज।
पटियाली तहसील का हिम्मतनगर बझेरा गांव ऐसा गांव है जहां मंदिर और मस्जिद बनवाने की ग्रामीण पिछले 10 वर्षों से नाकाम कोशिश कर रहे हैं। गांव में मस्जिद छप्पर में है। वहीं पीपल के पेड़ पर दूसरे समुदाय के लोग मंदिर मानकर पूजा अर्चना करते हैं। गांव में उसके अलावा न कोई मंदिर है और न कोई मस्जिद। चूंकि इस गांव की पुलिस सीमा पहले बदायूं के उसैत थाने की थी। इसके कारण यहां के पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी इस समस्या से अनभिज्ञ हैं। अब इस जिले के सिकंदरपुर थाने के तहत यह गांव आता है।
ग्रामीण बताते हैं कि मस्जिद काफी समय से छप्पर में ही संचालित है। वहीं दूसरे समुदाय के लोगों के द्वारा पीपल के पेड़ के पास चबूतरे पर मंदिर बनाने की कोशिश की गई। जिसे करीब 10 वर्ष पूर्व विवाद की स्थिति में उसैत थाना पुलिस ने निर्माण रोक दिया था। तब से मंदिर का निर्माण नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में दोनों समुदाय के लोगों के मन में टीस रहती है। और दोनों ही समुदाय के लोग एक दूसरे के निर्माण कार्यों पर नजर भी रखते हैं। गांव की आबादी करीब 500-550 के बीच है। यह हिम्मतनगर ग्राम पंचायत का मजरा बझेरा है। पूर्व प्रधान के द्वारा जो निर्माण रविवार को शुरू किया गया। उसे गांव के लोग मस्जिद का निर्माण मानकर विरोध करने लगे और विवाद ने सांप्रदायिक रंग ले लिया। दोनों समुदायों के लोगों को उपयुक्त स्थान न होने के कारण धार्मिक कार्यों को करने में दिक्कतें होतीं हैं।
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पटियाली तहसील का हिम्मतनगर बझेरा गांव ऐसा गांव है जहां मंदिर और मस्जिद बनवाने की ग्रामीण पिछले 10 वर्षों से नाकाम कोशिश कर रहे हैं। गांव में मस्जिद छप्पर में है। वहीं पीपल के पेड़ पर दूसरे समुदाय के लोग मंदिर मानकर पूजा अर्चना करते हैं। गांव में उसके अलावा न कोई मंदिर है और न कोई मस्जिद। चूंकि इस गांव की पुलिस सीमा पहले बदायूं के उसैत थाने की थी। इसके कारण यहां के पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी इस समस्या से अनभिज्ञ हैं। अब इस जिले के सिकंदरपुर थाने के तहत यह गांव आता है।
ग्रामीण बताते हैं कि मस्जिद काफी समय से छप्पर में ही संचालित है। वहीं दूसरे समुदाय के लोगों के द्वारा पीपल के पेड़ के पास चबूतरे पर मंदिर बनाने की कोशिश की गई। जिसे करीब 10 वर्ष पूर्व विवाद की स्थिति में उसैत थाना पुलिस ने निर्माण रोक दिया था। तब से मंदिर का निर्माण नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में दोनों समुदाय के लोगों के मन में टीस रहती है। और दोनों ही समुदाय के लोग एक दूसरे के निर्माण कार्यों पर नजर भी रखते हैं। गांव की आबादी करीब 500-550 के बीच है। यह हिम्मतनगर ग्राम पंचायत का मजरा बझेरा है। पूर्व प्रधान के द्वारा जो निर्माण रविवार को शुरू किया गया। उसे गांव के लोग मस्जिद का निर्माण मानकर विरोध करने लगे और विवाद ने सांप्रदायिक रंग ले लिया। दोनों समुदायों के लोगों को उपयुक्त स्थान न होने के कारण धार्मिक कार्यों को करने में दिक्कतें होतीं हैं।
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