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अंधेरे से जंग, जिंदगानी हो रही तंग
Updated Tue, 24 Apr 2018 11:15 PM IST
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विद्युतीकरण
- फोटो : Amar Ujala
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एटा/मारहरा/राजा का रामपुर। हर घर को रोशन करने के लिए तमाम योजनाएं और कवायदें हो रही हैं, लेकिन जिले में आज भी तमाम गांव अंधेरे में डूबे हैं। गांवों का हाल यह है कि खंभे लग गए हैं, लेकिन तार नहीं खिंचे। ग्रामीण खंभों को देखकर बिजली आने की उम्मीद संजोए हैं, लेकिन सरकारी रहनुमा उम्मीदों पर पानी फेरने मेें जुटे हैं। अमर उजाला टीम ने ऐसे गांवों का जायजा लिया, तो ग्रामीणों का दर्द कुछ यूं सामने आया।
समोखर और राम नगर को बिजली का इंतजार
विधान सभा मारहरा के दो गांव समोखर, रामनगर में दीपक की रोशनी में जिंदगी बसर करने को मजबूर हैं। यहां विद्यार्थी मिट्टी के तेल से दीपक जलाकर पढ़ाई करते हैं। कुछ साल पहले गांव में लगे बिजली के खंभे ग्रामीणों के लिए पशु बांधने बाले खूंटे बनकर रह गए हैं। ग्रामीण राम रहीस और जनक सिंह कहते हैं कि गांव में बिजली के आने की खबर तो सुनी थी, लेकिन पता नहीं कि कब आएगी? सोचा था कि दुनिया छोड़ने से पहले गांव में बिजली की रोशनी देख लेते, लेकिन यह भी नसीब होता नजर नहीं आता। रामदास और सुरेश चंद्र का कहना है कि गांव में विद्युतीकरण न होने से शिक्षा का स्तर गिर रहा है। छात्र अखिलेश कुमार ने बताया कि दीपक के सहारे ही पढ़ाई करते हैं। दो साल पहले गांव में खंभेे तो लगा दिए गए, मगर बिजली का कोई अता पता नहीं है।
खंभे टूटने लगे, मगर नहीं खिचे तार
अलीगंज तहसील से महज 12 किमी दूर गांव मोर्चा नहर का भी हाल कुछ ऐसा ही है। तीन हजार की आबादी वाले गांव में लोग लालटेन, कुप्पी और मोमबत्ती से काम चलाते हैं। विद्युत निगम ने गांव में खंभेे तो लगा दिए, मगर अभी तक तार नहीं खींचे गये। बिजली न होने से नहर के किनारे बसा गांव रात में डरावना लगता है। लोगों को वारदातों का डर सताता रहता है। गांव के भूपेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में काफी प्रयासों के बाद बिजली आने की प्रक्रिया हुई थी। खंभेेे लगाने के बाद निगम तार डालना भूल गया। अजय कुमार, उग्रसेन यादव और विपनेश कुमार का कहना है कि आठ माह पहले लगाए गए बिजली के खंभे टूटकर गिरने लगे हैं। तार खींचना तो शायद गांव विकसित होता।
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विद्युत निगम का दावा
विद्युत निगम का दावा है कि जिले के 784 राजस्व गांव विद्युतीकरण से संतृप्त हो चुके हैं। पांच सौ से अधिक आबादी वाले 368 मजरों में से 257 का काम पूरा हो चुका है। वहीं 111 मजरों में काम समाप्ति की ओर है। जून 2018 तक काम पूरा हो जाएगा। 300 से अधिक आबादी वाले 471 मजरे भी संतृप्त हो चुके हैं। वहीं सौ से अधिक आबादी वाले 717 मजरों में 475 में आंशिक रूप से काम रह गया है। वहीं शेष 242 में काम होना है। जो इस वित्तीय वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। अधिशासी अभियंता ग्रामीण सोपाली सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि सौ से कम आबादी वाले शत प्रतिशत नगलों एवं मजरों का विद्युतीकरण पॉवर टू ऑल योजना के अंतर्गत किया जाएगा। इसके साथ ही जिले का पूरा आबादी क्षेत्र विद्युतीकरण से संतृप्त हो जाएगा।
कहते हैं आंकड़े
576 ग्राम पंचायतें हैं जिले में
853 राजस्व गांव हैं जिले में
784 गांवों को विद्युतीकृत करने का दावा
242 गांवों में होना है विद्युतीकरण
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समोखर और राम नगर को बिजली का इंतजार
विधान सभा मारहरा के दो गांव समोखर, रामनगर में दीपक की रोशनी में जिंदगी बसर करने को मजबूर हैं। यहां विद्यार्थी मिट्टी के तेल से दीपक जलाकर पढ़ाई करते हैं। कुछ साल पहले गांव में लगे बिजली के खंभे ग्रामीणों के लिए पशु बांधने बाले खूंटे बनकर रह गए हैं। ग्रामीण राम रहीस और जनक सिंह कहते हैं कि गांव में बिजली के आने की खबर तो सुनी थी, लेकिन पता नहीं कि कब आएगी? सोचा था कि दुनिया छोड़ने से पहले गांव में बिजली की रोशनी देख लेते, लेकिन यह भी नसीब होता नजर नहीं आता। रामदास और सुरेश चंद्र का कहना है कि गांव में विद्युतीकरण न होने से शिक्षा का स्तर गिर रहा है। छात्र अखिलेश कुमार ने बताया कि दीपक के सहारे ही पढ़ाई करते हैं। दो साल पहले गांव में खंभेे तो लगा दिए गए, मगर बिजली का कोई अता पता नहीं है।
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खंभे टूटने लगे, मगर नहीं खिचे तार
अलीगंज तहसील से महज 12 किमी दूर गांव मोर्चा नहर का भी हाल कुछ ऐसा ही है। तीन हजार की आबादी वाले गांव में लोग लालटेन, कुप्पी और मोमबत्ती से काम चलाते हैं। विद्युत निगम ने गांव में खंभेे तो लगा दिए, मगर अभी तक तार नहीं खींचे गये। बिजली न होने से नहर के किनारे बसा गांव रात में डरावना लगता है। लोगों को वारदातों का डर सताता रहता है। गांव के भूपेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में काफी प्रयासों के बाद बिजली आने की प्रक्रिया हुई थी। खंभेेे लगाने के बाद निगम तार डालना भूल गया। अजय कुमार, उग्रसेन यादव और विपनेश कुमार का कहना है कि आठ माह पहले लगाए गए बिजली के खंभे टूटकर गिरने लगे हैं। तार खींचना तो शायद गांव विकसित होता।
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विद्युत निगम का दावा
विद्युत निगम का दावा है कि जिले के 784 राजस्व गांव विद्युतीकरण से संतृप्त हो चुके हैं। पांच सौ से अधिक आबादी वाले 368 मजरों में से 257 का काम पूरा हो चुका है। वहीं 111 मजरों में काम समाप्ति की ओर है। जून 2018 तक काम पूरा हो जाएगा। 300 से अधिक आबादी वाले 471 मजरे भी संतृप्त हो चुके हैं। वहीं सौ से अधिक आबादी वाले 717 मजरों में 475 में आंशिक रूप से काम रह गया है। वहीं शेष 242 में काम होना है। जो इस वित्तीय वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। अधिशासी अभियंता ग्रामीण सोपाली सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि सौ से कम आबादी वाले शत प्रतिशत नगलों एवं मजरों का विद्युतीकरण पॉवर टू ऑल योजना के अंतर्गत किया जाएगा। इसके साथ ही जिले का पूरा आबादी क्षेत्र विद्युतीकरण से संतृप्त हो जाएगा।
कहते हैं आंकड़े
576 ग्राम पंचायतें हैं जिले में
853 राजस्व गांव हैं जिले में
784 गांवों को विद्युतीकृत करने का दावा
242 गांवों में होना है विद्युतीकरण