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अंतर्मन में झांककर ही होते हैं ईश्वर के दर्शन
Updated Mon, 23 Oct 2017 10:03 PM IST
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आगरा। बल्केश्वर स्थित गंगे गौरी बाग में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। कथा के दूसरे दिन भगवताचार्य पद्महस्ता भारती ने भगवान कृष्ण के उपदेश भक्तों को सुनाए। उन्होंने कहा कि गीता में लिखा है कि अंतर्मन में झांककर ही ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं।
नग्न आंखों से सिर्फ बाहरी चीजों को ही देखा जा सकता है। ईश्वर ज्योति है, जो हमारे मन में ही जलती है। यदि हम बिंदी लगाने वाले स्थान पर जरा सा ध्यान लगाएं तो अंतर्मन की आंखें ईश्वर के दर्शन करा सकती हैं। भागवताचार्य ने श्रीकृष्ण के भजनों की रसधारा बहाकर भक्तों को भावविभोर किया। इस दौरान मुख्य यजमान नरेश अग्रवाल, कुसुम अग्रवाल, सरला गर्ग, राजकुमारी गोयल, साधना गोयल, प्रमोद अग्रवाल, सियाराम, प्रमोद शर्मा, रमेश चंद, लक्ष्मण सिंह, शिव कुमार मौजूद रहे।
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नग्न आंखों से सिर्फ बाहरी चीजों को ही देखा जा सकता है। ईश्वर ज्योति है, जो हमारे मन में ही जलती है। यदि हम बिंदी लगाने वाले स्थान पर जरा सा ध्यान लगाएं तो अंतर्मन की आंखें ईश्वर के दर्शन करा सकती हैं। भागवताचार्य ने श्रीकृष्ण के भजनों की रसधारा बहाकर भक्तों को भावविभोर किया। इस दौरान मुख्य यजमान नरेश अग्रवाल, कुसुम अग्रवाल, सरला गर्ग, राजकुमारी गोयल, साधना गोयल, प्रमोद अग्रवाल, सियाराम, प्रमोद शर्मा, रमेश चंद, लक्ष्मण सिंह, शिव कुमार मौजूद रहे।
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