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एडीएम को बोला फार्मासिस्ट, ये कोई वक्त है अस्पताल आने का
Updated Thu, 08 Jun 2017 12:36 AM IST
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मथुरा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राल पर एडीएम वित्त रवींद्र कुमार को जब कोई नहीं मिला तो मरीज बनकर चिकित्सक को फोन किया। उपचार की गुहार लगाई। फार्मासिस्ट ने तो यह तक कह दिया कि ये कोई टाइम है उपचार के लिए हॉस्पिटल आने का।
बुधवार शाम करीब पांच बजे एडीएम वित्त रवींद्र कुमार एसडीएम सदर डा.वैभव शर्मा के साथ राल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लेने पहुंच गए। यहां उन्हें जंगलराज मिला। हर तरफ गंदगी के ढेर थे। स्वास्थ्य केंद्र में कई जगह उपले रखे हुए थे। गोबर भी बिखरा पड़ा था। बीयर की बोतल भी पड़ी थीं।
स्वास्थ्य केंद्र की दीवार पर एक दर्जन स्वास्थ्य कर्मियों की लिस्ट अंकित थी लेकिन मौके पर सिर्फ वार्ड ब्वाय इस्लामुद्दीन मौजूद थे। हालांकि वह आराम की मुद्रा में थे। एडीएम वित्त ने अपना परिचय दिए बिना बच्चे की बीमारी का बहाना करते हुए डा.मनोज वशिष्ठ को फोन पर उपचार के लिए आने को कहा।
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चिकित्सक ने आनाकानी कर दी। फार्मासिस्ट विनीत वार्ष्णेय का नंबर बताते हुए फोन करने की सलाह दे दी। एडीएम वित्त ने फार्मासिस्ट से को भी अपना परिचय दिए बिना उपचार के लिए मदद मांगी तो उसने कह दिया कि यह कोई इलाज का टाइम है। अब कल आना।
इस दौरान एडीएम ने ग्रामीणों से भी बातचीत की। बताया गया कि यहां चिकित्सकीय स्टाफ दिन में 12 बजे तक आता है, दोपहर दो बजे के करीब चले जाते हैं। एडीएम और एसडीएम ने करीब डेढ़ घंटे तक निरीक्षण किया।
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बुधवार शाम करीब पांच बजे एडीएम वित्त रवींद्र कुमार एसडीएम सदर डा.वैभव शर्मा के साथ राल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लेने पहुंच गए। यहां उन्हें जंगलराज मिला। हर तरफ गंदगी के ढेर थे। स्वास्थ्य केंद्र में कई जगह उपले रखे हुए थे। गोबर भी बिखरा पड़ा था। बीयर की बोतल भी पड़ी थीं।
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स्वास्थ्य केंद्र की दीवार पर एक दर्जन स्वास्थ्य कर्मियों की लिस्ट अंकित थी लेकिन मौके पर सिर्फ वार्ड ब्वाय इस्लामुद्दीन मौजूद थे। हालांकि वह आराम की मुद्रा में थे। एडीएम वित्त ने अपना परिचय दिए बिना बच्चे की बीमारी का बहाना करते हुए डा.मनोज वशिष्ठ को फोन पर उपचार के लिए आने को कहा।
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चिकित्सक ने आनाकानी कर दी। फार्मासिस्ट विनीत वार्ष्णेय का नंबर बताते हुए फोन करने की सलाह दे दी। एडीएम वित्त ने फार्मासिस्ट से को भी अपना परिचय दिए बिना उपचार के लिए मदद मांगी तो उसने कह दिया कि यह कोई इलाज का टाइम है। अब कल आना।
इस दौरान एडीएम ने ग्रामीणों से भी बातचीत की। बताया गया कि यहां चिकित्सकीय स्टाफ दिन में 12 बजे तक आता है, दोपहर दो बजे के करीब चले जाते हैं। एडीएम और एसडीएम ने करीब डेढ़ घंटे तक निरीक्षण किया।